हनुमान जी ऐसे बने संकट मोचन, पढ़ें पूरी कथा और पूजन की सरल विधि!

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भगवान हनुमानजी को संकट मोचन यूं हीं नहीं कहा जाता है। एक बार भगवान राम मुश्किल में थे तब हनुमानजी ने ही समस्या हल की थी। तब से ही हनुमानजी संकट मोचन कहलाए थे। कहा जाता है कि महाकाल के एकादश रुद्रावतारों में से संकट मोचन हनुमानजी एक हैं। उनका जन्म वैशाख की पूनम को हुआ था। हनुमान जी की इस पूजन से शनि के कुप्रभाव भी समाप्त होते हैं, शनि की साढ़े साती से परेशान जातकों के लिए यह पूजा चमत्कारी लाभ देती हैं। भगवान हनुमान जी की पूजन की बेहद सरल विधि है। आइए आज आपको हनुमानजी की कथा, पूजन विधि आदि के बारे में बताते हैं।




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हनुमानजी के पूजन के लिए यह करें
-शनिवार और मंगलवार का दिन हनुमानजी के पूजन के लिए शुभ माना जाता है, इस दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
-सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें, स्नान करवाकर वस्त्र अर्पण करें। गंध, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत से पूजन करें।
– भगवान हनुमानजी की प्रतिमा को तांबे के पात्र से स्नान कराएं। संभव हो तो दूध दही से भी स्नान करवाएं और चोला, वस्त्र-आभुषण पहनाएं।
-सिंदूर चढ़ाएं, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, चांवल आदि से पूजन करें।



-भगवान हनुमानजी को प्रसाद में फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सुखे मेवे, शक्कर, पान आदि का भोग लगावें।
-इस पूजा के साथ आप व्रत भी कर सकते हैं।

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ऐसी है हनुमान से संकट मोचन बनने की कथा
रामायण जी के लंका कांड में उस घटना के बारे में स्पष्ट लिखा हैं, जब लक्ष्मण जी और मेगनाद का युद्ध हुआ था और लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे। इससे भगवान राम परेशान थे। विभीषण का राय के बाद वैध्य सुषेण से इलाज करवाया लेकिन उन्होंने 4 जड़ी-बूटियां लाने को कहा। वे केवल हिमालय पर ही मिल सकती थीं। कोई लाने वाला नहीं था, भगवान राम की चिंता को देख हनुमानजी ने संकट दुर किया था। हनुमानजी को उनकी भूली हुई शक्तियां याद दिलाई गई थी, तब वे आकाश में उड़कर संजीवनी बुटी लेने गए थे, जहां बुटी नहीं मिलने से वे पूरा पहाड़ उठा लाए थे। यह सच्ची कहानी आज भी हर किसी के जहन में जिंदा हैं।

 

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