प्राचीनतम शनि मंदिर की सच्ची कहानी, अंधे पुजारी की प्रार्थना पर शनिदेव ने दी थी आंखें

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इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर (अहिल्या नगरी) में भगवान शनिदेव का प्राचीनतम और चमत्कारिक शनिमंदिर जूनि इंदौर में स्थित हैं। यहां भगवान शनिदेव ने मंदिर के अंधे पुजारी की प्रार्थना से प्रसन्न होकर आंखें दी थी, जिसके बाद पुजारी ने आसपास के लोगों की मदद से मंदिर में प्रतिमा स्थापित करवाई। यह मंदिर भगवान शनि देव की इच्छा से यहां बनाया गया हैं। इतिहास में देखें तो यह मंदिर देश ही नहीं दुनियाभर का प्राचीन मंदिर हैं।

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शनि मंदिर की पौराणिक कथा shani dev katha

पुजारी मधुसुदन तिवारी बताते हैं कि शनि भगवान को प्रकट हुए करीब 500 साल हो गए हैं, जिस जगह भगवान विराजमान हैं, वहां पहले गोपालदास महाराज रहा करते थे। वे बचपन से ही नेत्रहीन थे। वे रोज मंदिर जिस जगह है वहां स्नान करते थे। एक दिन शनि देव ने उन्हें स्वप्न दिया, कि मैं शनि हूं। तुम इस कुंए पर स्नान करते हैं, इससे मैं दूषित हो जाता हूं। पंडित ने प्रार्थना कि माफी मांगी और उन्हें कहा कि आगे से ऐसा नहीं होगा। इतने में स्वप्न टूट गया।
सुबह अंधे पुजारी की आंखों से दिखाई देने लगा। भगवान शनिदेव के चमत्कार और प्रतिमा के बारे में इंदौर में राजा को सूचना भिजवाई। इसके बाद पंडित ने प्रतिमा को निकाला। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ भगवान शनिदेव की प्रतिमा को मंदिर में लेकर पहुंचे और कुंए से निकालकर पास के मंदिर में स्थापित करवाई गई।

वीडियो में करें दर्शन shani mandir video

50 फिट दूरी पर है राम मंदिर Ram mandir

कुंए से मूर्ति निकलने के बाद विधि विधान से शनि भगवान को राम मंदिर में विराजित किया गया, लेकिन शनि महाराज अगले दिन राम मंदिर से तकरीबन 50 फीट दूरी पर स्वयं ही पहुंच गए थे। आज भी उसी जगह विराजमान हैं।

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आंखें खोलते ही हुआ था चमत्कार chamatkar

पंडित की नींद खुली तो आंखे खोलते ही सब कुछ दिखने लगा। यह चमत्कारी होने से अन्य लोगों को भी पंडित का स्वप्न सही लगा और वे भी मूर्ति खोजने में जुट गए।


हर शनिवार को लगता है भक्तों का मेला Shaniwar

मंदिर में यूं तो सातों दिन भक्त भगवान की आराधना के लिए आते हैं। लेकिन शनि देव की पूजन के लिए शनिवार का विशेष दिन होने से मंदिर परिसर में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ होती हैं। भक्त दूर-दूर से शनिवार को दर्शन के लिए मंदिर आते हैं।

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