उज्जैन में ऐसे आए महाकाल, पुजारी ने पुत्र की चिता की चढ़ाई थी भस्म, पढ़ें पूरी कथा

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उज्जैन. भगवान शिव का प्रिय सावन माह का पहला सावन सोमवार आज से शुरु हो रहा है। यह महीना हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है, इसलिए शास्त्रों में इस माह को धर्म-कर्म का माह कहा गया है। सावन माह में बाबा महाकाल की आराधना का अलग ही महत्व है। मप्र के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देशभर में सिर्फ एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इसी वजह से तंत्र क्रियाओं की दृष्टी से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर शुरु से ही खास रहा है।
-शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार अवंतिका राज्य के राजा वृषभसेन भगवान शिव के आराधक थे। वे दिन का अधिक से अधिक समय भगवान शिव की भक्ति में देते थे।



-राजा का राजपाट अच्छा चल रहा था, इसी बीच एक अन्य राजा ने राज्य पर आक्रमण कर दिया। हालांकि अवंतिका के राजा युद्ध जीतने में सक्षम थे। इसलिए आक्रमण करने
वाले राजा ने असुरों के साथ लिया। उनमें एक गायब हो जाने वाली विद्या में पारांगत असुर भी था।
-असुरों ने अजीब टोटकों से राज्य में कई घातक हमले किेए। राज्य के लोग परेशान होने लगे। इस समस्या वाले समय में राज्यभर के लोग भगवान शिव की आराधना करने
लगे।
-भगवान शिव अवंतिका राज्य के वासियों की प्रार्थना सुनकर साक्षात प्रकट हुए और असुरों का नाश किया।
-इसके बाद अवंतिका राज्य के राजा वृषभसेन और प्रजा ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी, कि वे अवंतिका राज्य में ही रहें, इस प्रार्थना से भगवान प्रसन्न हुए और ज्योतिर्लिंग के रुप में अवंतिका राज्य में रहने लगे जो आज उज्जैन है। उसी समय से उज्जैन में भगवान शिव की अनोखी पूजा होती है।

इस वजह से पुजारी ने पुत्र की चिता की चढ़ाई थी भस्म
भगवान महाकाल को पहले मुर्दों की चिता से भस्म लाकर श्रृंगार किया जाता था, लेकिन एक बार की घटना से भगवान महाकाल प्रसन्न हुए तब से उपलों की राख होने लगी। दरअसल एक बार पुजारी को ताजा भस्म नहीं मिली थी, तब पुजारी ने अपने जिंदा बेटे की चिता जलाई और फिर उस भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार कर भस्म आरती की। इस पर भगवान महाकाल प्रसन्न हुए तब से यहां गाय के गोबर के कंडों से बनी भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार होता है।

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यह है भस्मआरती का नियम
-उज्जैन में विश्व का एकलौता शिवलिंग है, जहां भस्मआरती की जाती है। इस पूजा के समय बगैर सिले वस्त्र में ही पूजन कार्य किया जाता है। पुरुष रेशमी धोती व महिलाएं साड़ी पहनकर गर्भगृह में जाती हैं।
-तय शुल्क जमा करवाने के बाद सुबह 3.30 बजे मंदिर परिसर में पहुंचना होता है। अधिक जानकारी के लिए मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट  http://dic.mp.nic.in/ujjain/mahakal/default.aspx पर जाएं।

आयु बढ़ाते है बाबा महाकाल
आयु में वृद्धि और संकट टालने का एक भगवान महाकाल की एक खास पूजा होती है। सेहत संबंधी परेशानी से भी भगवान महाकाल सारे संकट दूर करते है।

 

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