गाय, बेटी और ग्रंथ तीनों की रायल्टी सबसे ऊंची-संत पं.कमलकिशोर नागरजी

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अरविंद गुप्ता @ बारां/कोटा। जीवन मंथन: बड़ा के बालाजी धाम में विराट श्रीमद् भागवत कथा में गौसेवक संत पूज्य नागरजी के ओजस्वी प्रवचन सुनने उमड़ा जनसैलाब। डेढ लाख वर्गफीट में पांडाल छोटा पड़ा। श्री बड़ां के बालाजी धाम में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमलकिशोर नागरजी ने कहा कि सामाजिक बुराइयों से कलियुग की उम्र बढ़ती है। संस्कृति की रक्षा के लिए पहल करो। तीन बातों पर अमल करो, पहला, आज देश में दर-दर की ठोकर खा रही है-गाय। दूसरा, धक्के खा रही है- बेटी और तीसरा, दर-दर धूल खा रहे है- ग्रंथ। ईश्वर ने हमे अतिरिक्त धन दिया वह अलमारी या बैंकों में जमा है, दूसरी तरफ रोज गायें कट रही है।



बेटियों की उम्र बढ़ रही है, पिता के घर में जवान बेटियां बैठी है। समय पर बेटी का संबंध करने की चिंता करो। भागवत ग्रंथ ब्राह्मणों के घर कपडों में बांध कर धूल खा रहे हैं। ये ग्रंथ हंस है जो सुनने वाले को ज्ञान के पंख देते हैं। जहां संभव हो सके श्रीमद् भागवत सत्संग सुनो। गाय, बेटी और ग्रंथ मनुष्य जीवन में सबसे बडी रॉयल्टी देते हैं। इनका खयाल करो।

दर्शन से बड़ी है कथा (kamal kishor nagar ji bhagwat katha)

पूज्य नागरजी ने ज्ञानदेव-नामदेव प्रसंग में कहा कि दर्शन करने से इच्छा पूरी होती है जबकि कथा सुनने से सारी इच्छाएं समाप्त हो जाती है। हमारे मन में केवल हरि इच्छा शेष रह जाती है। हरि हमें खजाने की चाबी देता है जबकि उसका सत्संग हरि को पाने की चाबी देता है। उन्होंने कहा कि जिनके पास कुछ हो न हो, केवल कथा श्रवण पास में हो। साधारण भोजन करके भी कथा सुन लो। कम खर्च में वहां कथा कराओ, जहां पहले कभी नहीं हुई।

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(पं.कमलकिशोर नागरजी ,)

आध्यात्मिक ढंग से मनाया भाया का जन्मदिन (bhagwat katha shri kamal kishor ji nagar )

शुक्रवार को आयोजक श्री महावीर गौशाला कल्याण संस्थान के संरक्षक पूर्व मंत्री श्री प्रमोद जैन भाया का जन्मदिन आध्यात्मिक ढंग से विशाल पांडाल में मंत्राच्चार के साथ मनाया गया। पूज्य नागरजी ने भाया दम्पŸिा को पुष्पाहार पहनाकर ऐसे पुण्य कार्य करते रहने के लिए आशीर्वाद दिया। इस मौके पर हजारों भक्तों ने पुष्पवर्षा की। इस अवसर पर एआईसीसी के महासचिव अविनाश पांडे, पीसीसी के प्रदेश महासचिव रघु शर्मा, नारकोटिक्स विभाग के कमिश्नर एसआर मीणा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। बडी संख्या में मथुरा, वृंदावन, द्वारका, अहमदाबाद, दिल्ली व मप्र के कई शहरों व कस्बों से श्रद्धालु संत नागरजी के ओजस्वी प्रवचन सुनने पहंुचे।

अमृत से आशीर्वाद का पलडा भारी
खचाखच भरे विशाल पांडाल में उन्होंने महाभारत का एक प्रसंग सुनाया। दुर्योधन ने द्वारकाधीश से कहा कि तुमने कूटनीति से पांडवों को जितवा दिया। उन्होने जवाब दिया- तुम भीष्म से पूछो ये बेईमानी से जीते या आशीर्वाद से। इस पर भीष्म ने बताया कि मैने दुर्योधन से कहा था कि सुबह जब आंख खुले तो पत्नी को खडा कर देना। मैं एक को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद दूंगा। दुर्योधन की पत्नी लेट हो गई और द्रोपदी वहां पहुंच गई। तप भरी आंखों ने उसे अखंड सौभाग्यवती भवः का आशीर्वाद दे दिया। इसलिए ये युद्ध पितामह के आशीर्वाद से जीता गया। हम ऐसे कर्म करें कि जीवन में श्राप नहीं आशीर्वाद मिले।

ज्ञान से ज्यादा गुणों के लायक बनो
उन्होंने ‘जय हनुमान ज्ञान गुण सागर’ चौपाई सुनाते हुए कहा कि हनुमान ने ज्ञान को तुरंत गुण बना लिया। क्योंकि ज्ञान का अहम आते ही अहंकार आ जाता है। आज यूनिवर्सिटी या कॉलेजों में ज्ञान मिल रहा है, गुण नहीं। जहां मिले वहां गुणानुवाद सुनो। कहीं न जा सको तो घर में गोविंद के गुण गाओ।



आजकल ‘मैं’ ज्यादा और ‘तू’ कम चलता है। इसलिए अहंकार बढ़ रहा है। सभी लायक से प्रार्थना है कि जीवन में अच्छे गुणों के लायक बनो। आज जो जिस कार्य के लायक है, वह उसके लायक कर्म नहीं कर रहा।

पंचम सोपान सूत्र-
– हम अवगुणों की खान हैं जबकि हमारी देह गुणों की खान है।
– शास्त्र हंस के समान है, ये सुनने वाले को ज्ञान के पंख देते हैं।
– मंदिर में खूब धक्के खाते हैं, फिर भी ईश्वर से नजर नहीं हटती, यही सच्ची आस्था है।
– गुणीजन कीे पूजा सर्वत्र होती है, जबकि राजा की पूजा केवल उसकी सीमा में होती है।
– स्वर्ग में सुख मिलता है लेकिन ग्रंथ सुनने में हमें आनंद मिलता है।
– जैन संतों से त्याग वृत्ति सीखो, हम वृत्ति बदली तो आनंद जरूर मिलेगा।

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