नरक चतुदर्शी पूजन विधि, क्या है नरक चतुर्दशी और पढ़ें दिवाली से एक दिन पहले मनाने की कथा

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दीपावली महापर्व के दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी कहते है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर दैत्य का संहार कर उनके जेल खाने में बन्द 16 हजार एक सौ स्त्रियों तथा वहाँ के लोगों को उनके अत्याचार से मुक्त कराया था।इसलिये इसे नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। नरक चतुर्दशी की कथा बता रहे हैं रायपुर के महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला…

सतयुग के राजा रन्तिदेव ने नरक की यातना से बचने के लिये घोर तपस्या कर इसी दिन यमराज को प्रसन्न किया था।



कुरुक्षेत्र के मैदान में भीष्म पितामह ने आज ही के दिन बाणों की शैया ग्रहण किया था।

स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन तिल के तेल से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय मिट जाता है।

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मान्यता है कि इस दिन पितर देवताओं का आगमन हमारे घर में होता है उनके आत्मा की शान्ति के लिये यमराज के निमित्त घर के बाहर मिट्टी का एक चौमुखा व 16 छोटे दीपक को एक थाली में रखकर जलाया जाता है। रोली गुलाल पुष्प धुप से पूजा करके चौमुखा दीपक को मुख्य द्वार पर तथा शेष दीपक को घर के अलग अलग स्थानों पर रखें। फिर अपने इष्ट देव व कार्यस्थल की पूजा करें।
इस दिन सूर्योदय से पहले , अपने शरीर में सुगन्धित द्रव्यो से बने उबटन को मलकर स्नान करना चाहिये।

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(लेखन संकलन- पंडित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर)

कही – कही हल में लगी मिट्टी , अपामार्ग, भटकटैया को मस्तक के ऊपर घुमाकर स्नान करने का विधान है। स्नान के बाद यमराज के निमित्त तर्पण और जलांजलि देने का भी निर्देश किया गया है।

नरक चतुदर्शी पूजन विधि  (narak chaturdashi 2017 puja vidhi shubh muhurat time in hindi)

-सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें, सूर्य भगवान को अघ्र्य दें और तिल का तेल लगाकर स्नान करें।

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नरक चतुर्दशी पर शरीर पर चंदन का लेप लगाकर नहाएं और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करें।



-शाम को घर की दहनीज पर दीप जलाएं और यम देवता की पूजन करें।
-नरक चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमानजी की भी पूजन होती हैं।

इसलिए कहते हैं छोटी दीपावली (choti diwali 2017 in narak chaturdashi 2017)

दिवाली के एक दिन पहले आने वाले इस त्योहार के दिन दीप दान करते हैं। इस दिन घर के द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। इसलिए इसे छोटी दिवाली कहते हैं।

 

 

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