यहां एक बार रावण को नहीं पूजा तो भस्म हो गया था पूरा गांव, अब है ऐसी प्रथा

उज्जैन. हिंदू धर्म का सबसे खास त्योहार दशहरा देशभर में रावण दहन के साथ शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारे देश में कुछ जगह ऐसी भी हैं, जहां रावण पूजन की अनूठी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। वहीं इन परंपराओं के साथ अजीब धारणाएं भी दशकों से चली आ रही हैं।
मध्यप्रदेश के उज्जैन के नजदीक ग्राम चिकली में रावण का विधिविधान से पूजन किया जाता हैं। इस प्रथा के पीछे कहा जाता हैं कि एक बार रावण की पूजन नहीं की थी, तो पूरा गांव जलकर खाक हो गया था। इसके बाद से यह प्रथा कभी नहीं तोड़ी गई।


गांव में बनी हैं रावण की प्रतिमा

गांव में रावण की एक प्रतिमा बनी हुई हैं। इसकी रोजाना रावण के मंदिर के पुजारी पूजन करते हैं। कहा जाता है कि पहले मिट्टी की प्रतिमा थी, करीब 30 साल पहले सीमेंट की प्रतिमा बना दी गई हैं।

दशानन रावण की पूजा

भारत देश के कुछ स्थानों पर दशानन रावण की पूजा होती है।इसका पारंपरिक और पौराणिक रुप से अलग ही महत्व हैं। आइए रायपुर के महामाया मंदिर के पुजारी पण्डित मनोज शुक्ला से जानते हैं…

ग्रेटर नोयडा के बिसरख गाँव वाले अपने गावँ को रावण की जन्म स्थली मानते है । यहाँ दशहरे को रावण का दहन नही पूजन करते है।

राजस्थान के उदयपुर के झाडोर तहसील में स्थित भगवान कमलनाथ महादेव की स्थापना स्वयं रावण ने किया था। यहाँ शिव जी की पूजा से पहले रावण की पूजा की जाती है।

इलाहबाद में दशहरा उत्सव पर भारद्वाज आश्रम में रावण की पूजा करके भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। जिसे रावण का बारात कहते है। स्थानीय निवासी पुष्प वर्षा करते है।



आंध्रप्रदेश के काकीनाडा इलाके में बहुत बड़ा शिवलिंग है पास में ही रावण की मूर्ति बनी है । जिसकी पूजा की जाती है।

कानपूर में रावण का एक मन्दिर है जो साल में केवल दशहरे के दिन ही खोला जाता है ।

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जोधपुर के मण्डोर गाँव में रहने वाले मुदगल गोत्रीय ब्राह्मण स्वयं को रावण का वंशज मानकर पूजा करते है। तथा दशहरे के दिन पिंड दान कर स्नान करते है।

अलवर जिले के पार्श्वनाथ मन्दिर में रावण की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि रावण ने यहाँ खुद अपने हाथो से भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति बनाई थी।

हिमांचल के कांगड़ा जिले के बैजनाथ में दशहरे के दिन बाजार बन्द रहता है तथा पुतला जलाकर उत्सव नही मनाया जाता । ऐसा कहा जाता है की रावण ने यहाँ कई सालों तक भगवान शंकर की तपस्या किया था।

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के रावण ग्राम में रहने वाले कान्य कुब्ज ब्राह्मण परिवार अपने आपको रावण का वंशज मानते है। इस गांव के मन्दिर में रावण की लेटी हुई प्रतिमा है जहाँ पुरे गाँव वाले पूजा करते है।

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मध्यप्रदेश के ही मन्दसौर व शाजापुर जिले में दशानन रावण की पूजा करते है। यहाँ के रहवासी रावण को अपना दामाद मानते है

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के चिखली नामक गाँव में रावण की विशाल मूर्ति है। जहाँ चैत्र शुक्ल दशमी को पूरा गाँव पूजा में लीन रहता है। भव्य मेला भी लगता है।

मध्यप्रदेश के दमोह नगर का सिंधी परिवार रावण को अपना इष्ट मानकर पूजा करते है। मन्त्रोच्चार के साथ स्नान वस्त्र आदि सहित विधि विधान से पूजा कर प्रसाद बाँटते है।



मध्यप्रदेश के इंदौर नगर(बैभव नगर) में “राम का निराला धाम” के नाम से एक ऐसा मन्दिर है जहाँ रावण की मूर्ति विराजित है। तथा मन्दिर के प्रबन्ध कमेटी के नाम के जगह देवी देवताओ के नाम लिखे गये है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रायपुरा क्षेत्र में रावण की विशाल मूर्ति है। यहाँ के रहवासी इनकी पूजा करते व आरती उतारते है।

 

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