ब्रिटेन में कैद है इकलौती 1000 साल पुरानी मां सरस्वती की चमत्कारिक प्रतिमा

Madhya Pradesh's Ayodhya How the british manufactured the myth of Bhojshala

Madhya Pradesh’s Ayodhya: How the british manufactured the myth of Bhojshala

धार. ब्रिटेन के ब्रिटिश म्यूजियम में देश-दुनिया की इकलौती 1000 साल पुरानी मां सरस्वती की चमत्कारिक प्रतिमा कैद में है। मध्यप्रदेश के धार जिला मुख्यालय पर भोजशााला में मां सरस्वती के एकमात्र मंदिर जहां माता साक्षात विराजमान थी। भूरे रंग की स्फटिक से निर्मित यह प्रतिमा अत्यंत ही चमत्कारिक, मनमोहक और शांत मुद्रा में दर्शन देती हैं। राजा भोज ने इस प्रतिमा को भोजशाल में जनदर्शन के लिए विराजित किया था। इस जगह राजा भोज की पूजन स्थली कहा जाता हैं, इसलिए यह भोजशाला कहलाई।

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जब भोज की पूजा से प्रसन्न हुई थी मां सरस्वती maa saraswati mandir in hindi

दरअसल धार के भोजशाला में राजा भोज ने सरस्वती माता की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा करवाई थी। राजा भोज के लिए लोग आज भी कहते हैं, कि राजा भोज मां सरस्वती के पुत्र थे। धार की भोजशाला राजाभोज की तपोभूमि कही जाती हैं। यहां भोज ने तपस्या और तंत्र साधना करके मां को प्रसन्न किया था।



मां सरस्वती ने प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। इसके बाद राजा भोज ने 1010 से 1055 ईस्वी सन में स्वयं अपने हाथों से मां सरस्वती की एक बेहद सुंदर प्रतिमा को तराशा था और यहां जनदर्शन के लिए विराजित किया था। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि ख्यात मूर्तिकार मंथल ने इस मूर्ति को तैयार किया था।

पूरे विश्व का सिद्धपीठ भोजशाला bhojshala mandir kaha hai

सारे संसार में धार स्थित भोजशाला को सिद्धपीठ मना जाता है। 1269 ईस्वी सन् से ही इस्लामी आक्रताओं ने अलग-अलग तरीकों से हिंदूस्तान के इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मान बिंदु भोजशाला पर आक्रमण किया था। उस समय इस आक्रमण को यहां के तात्कालीन हिंदू महाराजाओं ने विफल कर दिया था।

भोजशाला का लाइव वीडियो

सन् 1305 में मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला पर इस्लामी आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण कर दिया। खिलजी ने आक्रमण के दौरान मां सरस्वती की प्रतिमा को खंडित कर दिया और भोजशाला के कई हिस्सों को ध्वस्त कर दिया। आक्रमण के समय 1200 आचार्यों की हत्या भी कर दी।



राजा मेदनीयराज ने वनवासियों की मदद से भोजशाला की रक्षा की। 1902 में मेजर किनकैड भारत की अन्य अमूल्य धरोहरों के साथ मां सरस्वती की मूर्ति को भी अपने साथ इंग्लेंड ले गया। इस प्रतिमा का आज तक वापस नहीं लाया गया, राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने कोशिशें की थी, लेकिन विफल रहे। जिसके कारण मां सरस्वती आज भी लंदन के म्यूजियम में कैद हैं।

 

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