रमा एकादशी व्रत कथा: ये विधि अपनाकर करें पूजन प्रसन्न होंगे लक्ष्मीनारायण!

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रमा एकादशी/रम्भा एकादशी दिवाली महापर्व से चार दिन पहले आती हैं। यह व्रत देवी लक्ष्मी के नाम रमा से जाना जाता हैं। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के रुप में जानते हैं। यह इस बार 15 अक्टूबर, रविवार को है।
इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजन करने का विधान हैं। चतुर्मास की अंतिम एकादशी होने के कारण इसका खास महत्व बताया गया हैं। मान्यता हैं, कि रमा एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु की पूजन से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।



इस व्रत से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी खत्म हो जाते हैं। सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए यह व्रत सुख और सौभाग्यप्रद माना जाता हैं। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने का बड़ा महत्व हैं।

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रमा एकादशी व्रत कथा (rama ekadashi vrat katha and vidhi in hindi)

रमा एकादशी की पौराणिक कथा के मुताबिक प्राचीन काल में मुचुकंद नामक राजा के दामाद शोभन ने यह व्रत किया था। वे शरीर के बेहद कमजोर थे। इस वजह से शोभन भूख प्यास सहन नहीं कर पाए। आखिरकार भूख से उनके प्राण छूट गए।
मगर व्रत के फल से शोभन को उत्तम स्थान प्राप्त हुआ। रंभादि अप्सराएं शोभन की सेवा में रहने लगी।

भगवान विष्णु के 8 वें पूर्णावतार श्रीकृष्ण की भी पूजन (shri krishna puja vidhi in hindi)

रमा एकादशी के दिन महालक्ष्मी के रमा स्वरुप के साथ भगवान विष्णु के 8 वें पूर्णावतार श्रीकृष्ण के केशव स्वरुप के पूजन का विधान है। श्री कृष्ण के केशव स्वरुप का चित्रण अति सुंदर है।

इस विधि से करें व्रत (vrat and upvaas vidhi)

-सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत करके व्रत का संकल्प लें।
-भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूर्वक पंचोपचार पूजन शुरु करें, पंडित से भी पूजन करवाई जा सकती है।



-पूजन के बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरण करें।
-शाम को भगवान श्रीकृष्ण की पूजन का भी विधान है।

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-इसके बाद श्रीमद्भागवत या गीता पाठ भी करें।
-अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को ब्राह्मण या जरुरतमंदों को भोज कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें।
-भगवान श्री कृष्ण को माखन और मिश्री का भोग लगाकर भोजन ग्रहण करें।

 

 

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