कुंडली में राहु ऐसा है तो रातों रात चमक जाती है राजनीति, जानिए ग्रहों की चाल

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वर्तमान में राजनीति एक ऐसा क्षेत्र बनता जा रहा है, जहाँ कम परिश्रम में भरपूर पैसा व प्रसिद्ध‍ि दोनों ही प्राप्त होते हैं। ढेरों सुख-सुविधाएँ अलग से मिलती ही है। और मजा ये कि इसमें प्रवेश के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की भी जरूरत नहीं होती। नीति कारक ग्रह राहु, सत्ता का कारक सूर्य, न्याय-प्रिय ग्रह गुरु, जनता का हितैषी शनि और नेतृत्व का कारक मंगल जब राज्य-सत्ता के कारक दशम भाव, दशम से दशम सप्तम भाव, जनता की सेवा के छठे भाव, लाभ एवं भाग्य स्थान से शुभ संबंध बनाए तो व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनता है। राजनीती एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है । और आज भारत की राजनीति अर्थात वैकुण्ठ की प्राप्ति के सामान है । राजनीती में सफलता के लिए मुख्य रूप से सूर्य, मंगल, गुरु, शनि और राहु कारक होते है ।



व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनेगा या नहीं ? इसका बहुत कुछ उसके जन्मकालिक ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अन्य व्यवसायों एवं करियर की भांति ही राजनीति में प्रवेश करने वालों की कुंडली में भी ज्योतिषीय योग होते हैं। कुंडली का दशम भाव राजनीती, सत्ता, अधिकार, सरकार से सम्बंधित भाव है ।।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द ने बताया की वैसे भी राजनीति दो शब्दों राज-नीति के योग से बना हुआ एक शब्द है जिसका सामान्य अर्थ है एक ऐसा राजा जिसकी नीतियां और राजनैतिक गतिविधियां इतनी परिपक्व और सुदृढ़ हों, जिसके आधार पर वह अपनी जनता का प्रिय शासक बन सके और अपने कार्यक्षेत्र में सम्मान और प्रतिष्ठा अर्जित करता हुआ उन्नति के चर्मात्कर्ष तक पहुंचे। राजनीति में पूर्णतया सफल केवल वही जातक हो सकता है जिसकी कुंडली में कुछ विशिष्ट धन योग, राजयोग एवं कुछ अति विशिष्ट ग्रह योग उपस्थित हों, क्योंकि एक सफल राजनेता को अधिकार, मान-सम्मान सफलता, रुतबा, धन शक्ति, ऐश्वर्य इत्यादि सभी कुछ अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं। अतः एक सफल राजनेता की कुंडली में विशिष्ट ग्रह योगों का पूर्ण बली होना अति आवश्यक है क्योंकि कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में तभी सफल होगा जब कुंडली में उपस्थित ग्रह योग उसका पूर्ण समर्थन करेंगे।



चौथा भाव जनता से सम्बंधित भाव है तो पाचवां घर जातक की बुद्धि विवेक का है । दूसरा भाव वाणी का है राजनीति में भाषण देने की कला का अच्छा होने के लिए द्वितीय भाव अच्छा होना चाहिए ।।
बुध ग्रह बुद्धि, सोच-समझ और बोलने की शक्ति का कारक है । बुद्धि, सोच-समझकर बोलना जैसे क्या और कैसे बोलना चाहिए यह कला बुध ही देता है ।।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द  ने बताया की  इन सभी ग्रहों और भावों का अनुकूल और मजबूत होना ही जातक को एक सफल राजनीतिज्ञ बनाता है । राजनीति एक बहुत ही बड़ा और उच्च अधिकारों और जनता के सहयोग का क्षेत्र होता है ।।जिसके लिये जरुरी है कुंडली में राजयोगो का होना । जितने ज्यादा केंद्र त्रिकोण के सम्बन्ध आपस में बनते है, कुण्डली में राजयोग उतना ही ज्यादा शक्तिशाली होता है ।।राजनीति में जाने के लिए भी कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों का प्रबल होना जरूरी है। राहु को राजनीति का ग्रह माना जाता है। यदि इसका दशम भाव से संबंध हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति धूर्त राजनीति करता है। अनेक तिकड़मों और विवादों में फँसकर भी अपना वर्चस्व कायम रखता है। राहु यदि उच्च का होकर लग्न से संबंध रखता हो तब भी व्यक्ति चालाक होता है।
राजनीति के लिए दूसरा ग्रह है गुरु- गुरु यदि उच्च का होकर दशम से संबंध करें, या दशम को देखें तो व्यक्ति बुद्धि के बल पर अपना स्थान बनाता है। ये व्यक्ति जन साधारण के मन में अपना स्थान बनाते हैं। चालाकी की नहीं वरन् तर्कशील, सत्य प्रधान राजनीति करते हैं।
राजयोग के प्रभाव से जातक समाज में सम्मान का जीवन जीता है । जो जातक राजनीती में होते है, उनकी कुंडली में राजयोग होता ही है । इसी के प्रभाव से यह समाज में अपनी पहचान और उच्च स्तर का जीवन जीते है ।। सूर्य ग्रहों का राजा है, मंगल सेनापति, गुरु मंत्री एवं सर्वोत्कृष्ट सलाहकार, शनि जनता का कारक है तो राहु चलाकी, गुप्त षड्यंत्र और आज की वर्तमान राजनीति का बहुत ही महत्वपूर्ण कारक ग्रह है ।।
सूर्य राजा, सफलता, सरकार का कारक होने से राजनीति में उच्च अधिकार और सफलता दिलाता है । मंगल बल और साहस का कारक है, यह जातक को हिम्मत देने का काम करता है ।।गुरु सही रास्ता दिखाने वाला है तो इसके इसी गुण के कारण राजनीती में सफल होने वाले जातक मंत्री आदि जैसे पद को प्राप्त करते है ।।शनि की अनुकूल स्थिति जातक को जनता से सहयोग दिलाती है । शनि के अनुकूल होने से राजनीती में जातक लोकप्रियता प्राप्त करता है ।।
इसके अलावा दशम भाव या दशम भाव से बना गजकेसरी योग । दशम भाव में बैठा शुभ और बली राहु या शनि इन सभी का किसी अन्य योगकारक ग्रहों से सम्बन्ध होना राजनीति में सफलता के लिए शुभ होता है ।जन्म कुण्डली के दशम घर को राजनीति का घर कहते हैं। सत्ता में भाग लेने के लिए दषमेष और दशम भाव का मजबूत स्थिति में होना जरूरी है। दशम भाव में उच्च, मूल त्रिकोण या स्वराषिस्थ ग्रह के बैठने से व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में बल मिलता है। गुरु नवम भाव में शुभ प्रभाव में स्थित हो और दषम घर या दश्मे ष का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है। सूर्य राज्य का कारक ग्रह है अतः यह दशम भाव में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो और राहु छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव से संबंध बनाए तो राजनीति में सफलता की प्रबल संभावना बनती है। इस योग में वाणी के कारक (द्वितीय भाव के स्वामी) ग्रह का प्रभाव आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है।



जानिए कैसे राजनीती में राहु की भूमिका होती है विशेष 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द   ने बताया की राजनीति में राहु का महत्वपूर्ण स्थान है। राहू को सभी ग्रहों में नीतिकारक ग्रह का दर्जा दिया गया है। इसका प्रभाव राजनीति के घर से होना चाहिए। राहु के शुभ प्रभाव से ही नीतियों के निर्माण व उन्हें लागू करने की क्षमता व्यक्ति विशेष में आती है। राजनीति के घर (दशम भाव) से राहु का संबंध बने तो राजनेता में स्थिति के अनुसार बात करने की योग्यता आती है। तीसरे, छठे भाव में स्तिथ उच्च का या मूल त्रिकोर का राहू भी बड़े राजनैतिक योग में सहायक है।राहु आज की राजनीति का हीरो है, कारण कि आज वर्तमान राजनीति में सफल होने के लिए राहु का अनुकूल और शुभ होना बहुत जरुरी है । यदि राहू अनुकूल परिणाम न दे तो जातक राजनीती में एक बार नहीं कई बार असफल हो जाता है ।
सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु का संबंध छठे, सातवें, दसवे व ग्यारहवें भाव से देखा गया है। छठे भाव को सेवा का भाव कहते हैं। व्यक्ति में सेवा भाव होने के लिए इस भाव से दशम या दशमेश का संबंध होना चाहिए। सातवां भाव दशम से दशम है इसलिए इसे विशेष रूप से देखा जाता है।

जानिए जन्म लग्न से राजनीति के योग

मेष लग्न- प्रथम भाव में सूर्य, दशम में मंगल व शनि हो तथा दूसरे भाव में राहु हो तो जनता का हितैषी राजनेता बनेगा।
वृष लग्न- दशम भाव का राहु व्यक्ति को राजनीति में प्रवेश दिलाता है। राहु के साथ शुक्र भी हो तो राजनीति में प्रखरता आती है।
मिथुन लग्न- शनि नवम में तथा सूर्य, बुध लाभ भाव में हो तो व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। राहू सप्तम में तथा सूर्य 4, 7 या 10वें भाव में हो तो प्रखर व्यक्तित्व तथा विरोधियों में धाक जमाने वाला राजनेता बनता है।
कर्क लग्न-शनि लग्न में, दशमेश मंगल दूसरे भाव में, राहू छठे भाव में तथा सूर्य बुध पंचम या ग्यारहवें भाव में चंद्रमा से दृष्ट हो तो व्यक्ति राजनीति में यश पाता है।
सिंह लग्न-सूर्य, चंद्र, बुध व गुरु धन भाव में हों, मंगल छठे भाव में, राहु बारहवें भाव में तथा शनि ग्यारहवें घर में हो तो व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लम्बे समय तक शासन में रखता है, इस दौरान उसे लोकप्रियता व वैभव प्राप्त होता है।
कन्या लग्न- दशम भाव में बुध का संबंध सूर्य से हो, राहु, गुरु, शनि लग्न में हो तो व्यक्ति राजनीति में रूचि लेगा।
तुला लग्न- चंद्र, शनि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति वाकपटु होता है। सूर्य सप्तम में, गुरू आठवें, शनि नौवें तथा मंगल बुध ग्यारहवें भाव में हो तो राजनीति में अपार सफलता पाता है तथा प्रमुख सलाहकार बनता है।



वृश्चिक लग्न-लग्नेश मंगल बारहवें भाव में गुरू से दृष्ट हो, शनि लाभ भाव में हो, चंद्र-राहु चौथे भाव में हो, शुक्र सप्तम में तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ शुभ भाव में हो तो व्यक्ति प्रखर नेता बनता है।
धनु लग्न-चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र हों तथा दशम भाव में कर्क का मंगल हो तो तकनीकी सोच के साथ राजनीति करता है।
मकर लग्न- राहु चौथे भाव में हो तथा नीचगत बुध उच्चगत शुक्र के साथ तीसरे भाव में हो तो नीचभंग राजयोग से व्यक्ति राजनीति में दक्ष तथा चतुर होता है।
कुंभ लग्न- लग्न में सूर्य शुक्र हो तथा दशम में राहू हो तो राहू तथा गुरू की दशा में राजनीति में सफलता मिलती है। गुरू की दशा में प्रबल सफलता मिलती है।
मीन लग्न-चंद्र, शनि लग्न में, मंगल ग्यारहवें तथा शुक्र छठे भाव में हो तो शुक्र की दशा में राजनीतिक लाभ तथा श्रेष्ठ धन लाभ होता है।

जानिए राजनीति कारक ग्रहों को

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द  ने बताया की एक सफल राजनेता बनने के लिए वैसे तो समस्त नौ ग्रहों का बली होना आवश्यक है किंतु फिर भी सूर्य, मंगल, गुरु और राहु में चार ग्रह मुख्य रूप से राजनीति में सफलता प्रदान करने में सशक्त भूमिका निभाते हैं। साथ ही चंद्रमा का शुभ व पक्ष बली होना भी अति आवश्यक है। सूर्य ग्रह तो है ही सरकारी राजकाज में सफलता का कारक, मंगल से नेतृत्व और पराक्रम की प्राप्ति होती है। गुरु पारदर्शी निर्णय क्षमता एवं विवेक शक्ति प्रदान करता है तथा राहु को ज्योतिष में शक्ति, हिम्मत, शौर्य, पराक्रम, छल कपट और राजनीति का कारक माना गया है।



अतः कुंडली में यदि ये चारों ग्रह बलवान एवं शुभ स्थिति में होंगे तो ये एक सशक्त, प्रभावी, कर्मठ, जुझारु एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की नींव पर एक पूर्णतया सरल एवं सशक्त राजनेता रूपी इमारत का निर्माण करेंगे जिस पर राष्ट्र सदैव गौरवान्वित रहेगा। राजनीति में संबंधित भाव: ज्योतिषीय दृष्टि से राजनीति से संबंधित भाव मुख्यतया- लग्न, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ, नवम्, दशम एवं एकादश हैं। लग्न व्यक्ति और व्यक्तित्व है, लग्नेश प्राप्तकर् है। तृतीय भाव सेना, चतुर्थ भाव जनता, पंचम भाव राजसी ठाटबाट एवं मंत्री पद की भोग्यता, षष्ठ भाव युद्ध एवं कर्म, नव भाव भाग्य, दशम् भाव कार्य, व्यवसाय, राजनीति और एकादश लाभ भाव है। दृढ़ व्यक्तित्व, जनमत संग्रह, पराक्रम, जनता का पूर्ण समर्थन, सफलता, धन और मंत्री पद की योग्यता। ये सभी गुण एक राजनेता बनने के लिए परमावश्यक तत्व हैं।
साथ ही जब इन भावेशों का संबंध लाभ भाव से बनेगा तो ऐसे विशिष्ट ग्रहयोगों से युक्त कुंडली वाला जातक ‘‘एक सफल राजनेता’’ बनेगा। इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। राजनीति क्षेत्र के योग: – सूर्य एवं राहु बली होने चाहिए। – दशमेश स्वगृही हो अथवा लग्न या चतुर्थ भाव में बली होकर स्थित हो। – दशम भाव में पंचमहापुरुष योग हो एवं लग्नेश भाग्य स्थान में बली हो तथा सूर्य का भी दशम भाव पर प्रभाव हो।
उपाय – राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिये –
 पहला उपाय : आप सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूजा घर में पहले अपने इष्ट देव को याद करें. फिर आप निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें.फिर आप निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें.
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि में परम सुखं,
धनं देहि, रूपं देहि, यशो देहि, द्विषो जही |
इस मंत्र का जाप आपको रोजाना 108 बार करना है. ये उपाय आपकी कुंडली के नौवें और दसवें भाव वाले ग्रहों की स्थिति को मजबूत करता है और आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलकर आपको राजनीति में सफल बनाता है.
 दुसरा उपाय : एक प्रसिद्ध और सफल राजनेता बनने के लिए आपको 21 शुक्रवार तक माता दुर्गा का व्रत रखना है और 21वें शुक्रवार के दिन आप एक लाल कपड़ा लें और उसमें 42 लौंग, 21 लाल रंग की चूड़ियाँ, 7 कपूर, 5 गुडहल के फुल, 2 चांदी की बिछियाँ, सिंदूर और परफ्यूम रख कर देवी माता के चरणों में अर्पित करें. इस उपाय को मनवांछित राजनितिक सफलता पाने का सबसे सफल उपाय है.



 तीसरा उपाय : आप थोड़ा सा कुमकुम, लाख, कपूर, घी, मिश्री और शहद को मिलाकर एक गाढा पेस्ट तैयार करें. फिर इस पेस्ट से आप पहले माता दुर्गा और फिर खुद को तिलक लगायें. आप इस उपाय को 5, 7 और 11 दिनों तक लगातार अपनाएँ, आपको राजनीति में सफलता अवश्य मिलेगी.
 चौथा उपाय : चौथे उपाय के लिए आप थोड़ी सी मिटटी में पानी व शुद्ध देशी घी मिलाकर 9 गोलियाँ तैयार करें व उन्हें छाया में सूखने के लिए छोड़ दें. जब ये गोलियाँ सुख जाएँ तो इन्हें 9 दिनों तक पीले सिंदूर की डिब्बी में रखें व 9वें दिन ही इन्हें किसी बहते पानी में प्रवाहित कर दें. लेकिन ध्यान रहे कि आपको सिंदूर को प्रवाहित नहीं करना है बल्कि उसे आप संभाल कर रखें और जब भी आप घर से बाहर काम के लिए निकलें तो आप इस सिंदूर का टिका लगाकर ही निकलें. ये उपाय पहले आपको प्रसिद्धि दिलाता है और फिर धीरे धीरे एक सफल नेता.



 पांचवा उपाय : रविवार का दिन सूर्यदेव का होता है जो आपको ज्ञान, बल और समाज में मान सम्मान दिलाते है. तो आप रविवार के दिन पहले सूर्य देव की पूजा करें और फिर उनसे जुडी चीजों जैसेकि लड्डू, ताम्बे के बर्तन, गेहूँ, गुड, माणिक्य, लाल या फिर पीला कपड़ा और लाल चन्दन का दान करें. इससे सूर्य देव प्रसन्न होते है और आपको आपके हर क्षेत्र में सदा सफल होने का आशीर्वाद देते है.
 आदित्य हृदय स्तोत्र का रोज पाठ करें।
 सूर्य को रोज जल अर्पित करें।
 ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें।

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