प्रदोष व्रत का चमत्कारिक लाभ, इस विधि से रखें उपवास प्रसन्न होंगे देवता

somvar ko shiva ji ki puja abhishekam

(pradosh vrat 2017 and puja muhurat importance and significance of pradosh vrat in kartik month and puja muhurat)

वर्ष में आने वाले तिथि और वार का हमारे मन और मस्तिष्क पर गहरा असर पड़ता है। इस असर को समझकर कोई काम किया जाए तो चमत्कारिक फायदा पहुंचता हैं।
15 नवम्बर 2017 बुधवार को प्रदोष व्रत है। यह एक पाक्षिक व्रत है अर्थात प्रत्येक महिने शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष की प्रदोषकालीन त्रयोदशी तिथि को व्रत रखते हैं।
स्कंदपुराण के अनुसार
त्रयोदश्यां तिथौ सायं प्रदोष: परिकीत्र्तित: । तत्र पूज्यो महादेवो नान्यो देव: फलार्थिभि: ।।

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प्रदोषपूजामाहात्म्यं को नु वर्णयितुं क्षम: । यत्र सर्वेऽपि विबुधास्तिष्ठंति गिरिशांतिके ।।
प्रदोषसमये देव: कैलासे रजतालये । करोति नृत्यं विबुधैरभिष्टुतगुणोदय: ।।
अत: पूजा जपो होमस्तत्कथास्तद्गुणस्तव: ।
कत्र्तव्यो नियतं मत्र्यैश्चतुर्वर्गफला र्थिभि: ।।
दारिद्यतिमिरांधानां मत्र्यानां भवभीरुणाम् । भवसागरमग्नानां प्लवोऽयं पारदर्शन: ।।
दु:खशोकभयात्र्तानां क्लेशनिर्वाणमिच्छताम् । प्रदोषे पार्वतीशस्य पूजनं मंगलायनम् ।।
जिसका सार है “त्रयोदशी तिथि में सायंकाल को प्रदोष कहा गया है। प्रदोष के समय महादेवजी कैलाशपर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं। अत: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की इच्छा रखने वाले पुरुषों को प्रदोष में नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा, होम, कथा और गुणगान करने चाहिए।



दरिद्रता के तिमिर से अंधे और भक्तसागर में डूबे हुए संसार भय से भीरु मनुष्यों के लिए यह प्रदोषव्रत पार लगाने वाली नौका है। शिव-पार्वती की पूजा करने से मनुष्य दरिद्रता, मृत्यु-दु:ख और पर्वत के समान भारी ऋण-भार को शीघ्र ही दूर करके सम्पत्तियों से पूजित होता है।

प्रदोष व्रत विधि (pradosh vrat vidhi and katha in hindi )

दोनों पक्षों की प्रदोषकालीन त्रयोदशी को मनुष्य निराहार रहे। निर्जल तथा निराहार व्रत सर्वोत्तम है परंतु अगर यह संभव न हो तो नक्तव्रत करे। पूरे दिन सामथ्र्यानुसार या तो कुछ न खाये या फल लें । अन्न पूरे दिन नहीं खाना। सूर्यास्त के कम से कम 72 मिनट बाद हविष्यान्न ग्रहण कर सकते हैं।



जिन नियमो का पालन इन व्रत में अवश्य करना होता है, वह हैं, अहिंसा, सत्य वाचन, ब्रह्मचर्य, दया, क्षमा, निंदा और इष्र्या न करना।
-जितना संभव हो सके मौन धारण करें।
-अगर संभव हो सके तो सूर्योदय से तीन घड़ी (अर्थात 72 मिनट) पूर्व स्नान कर लें । श्वेत वस्त्र धारण करें।

-प्रदोषकाल में पूजा करें।
-प्रदोषकाल में घी के दीपक जलायें। कम से कम एक अथवा 32 अथवा 100 अथवा 1000 ।
-शिव पार्वती युगल दम्पति का ध्यान करके उनकी मानसिक पूजा करें ।
-पूजा के आरम्भ में एकाग्रचित्त हो संकल्प पढ़ें । तदनन्तर हाथ जोडक़र मन-ही-मन उनका आह्वान करें- “हे भगवान् शंकर !



आप ऋण, पातक, दुर्भाग्य और दरिद्रता आदि की निवृत्ति के लिये मुझ पर प्रसन्न हों।’ मैं दु:ख और शोक की आग में जल रहा हूँ, संसार भय से पीडि़त हूँ, अनेक प्रकार के रोगों से व्याकुल हूँ। वृषवाहन! मेरी रक्षा कीजिए। देवदेवेश्वर! सबको निर्भय कर देने वाले महादेव जी! आप यहाँ पधारिये और मेरी की हुई इस पूजा को पार्वती के साथ ग्रहण कीजिये।

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-पंचब्रह्म मंत्र का पाठ करें
-रुद्रसूक्त का पाठ करें।
-पंचामृत से अभिषेक करें।
-षोडशोपचार पूजा करें।

भगवान को साष्टांग प्रणाम करें।

 

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