पितृपक्ष 2017: श्राद्ध कर पितरों को करें खुश, पितर करते हैं कुल की रक्षा

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उज्जैन. गणेश चतुर्थी के बाद आस्था और श्रद्धा का 14 दिनी श्राद्ध पर्व मनाया जाएगा। पितरों की आराधना का महापर्व पितृपक्ष अमृत और स्वार्थसिद्धी जैसे शुभ योग के साथ आ रहा हैं।
श्राद्ध ही पितरों का यज्ञ कहा जाता है। देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण में से श्राद्ध की क्रिया से पितरों का पितृ ऋण उतारा जाता है। हिंदू धर्म में पितरों का श्राद्ध करना बहुत जरुरी माना गया है। यदि किसी व्यक्ति का विधिविधान से श्राद्ध और तर्पण नहीं हुआ तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती हैं।



वह भूत-प्रेत के रुप में दुनिया में ही विचरण करता रहता हैं। विष्णुपुराण में कहा है श्राद्ध से तृप्त होकर पितृ ऋण सभी कामनाओं को तृप्त करते हैं।

यह है श्राद्ध का महत्व  (importance of pitru paksha)
शास्त्रों में लिखा हैं, पितृ पक्ष में तर्पण व श्राद्ध करने से व्यक्ति के पूर्वज प्रसन्न होते हैं। वे प्रसन्न होकर सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।

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इससे जीवन सुखी होता और समृद्धि आती हैं। पितृ गुस्सा हो जाएं तो उस व्यक्ति का जीवन समस्याओं से ग्रसित रहता हैं। हर प्रकार की हानी होती हैं। पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध जरुर करना चाहिए। कहा जाता है कि यमराज श्राद्ध पक्ष में हर वर्ष सभी जीवों को आजाद कर देते हैं। ये जीव स्वजनों के पास पहुंचकर तर्पण, भोजन आदि ग्रहण करते हैं। शास्त्रों में लिखा है कि पितर ही अपने कुल की रक्षा करते हैं।

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श्राद्ध करने की तिथियां  (pitra dosh dates and time)
-प्रतिपदा श्राद्ध 7 सितंबर
-द्वितीया श्राद्ध 8 सितंबर
-तृतीया श्राद्ध 9 सितंबर
-चतुर्थी और पंचमी 10 सितंबर
-षष्ठी 11 सितंबर
-सप्तमी 12 सितंबर
-अष्ठमी 13 सितंबर
-नवमी 14 सितंबर
-दशमी 15 सितंबर
-एकादशी -16 सितंबर
-द्वादशी 17 सितंबर
-त्रयोदशी एवं मघा श्राद्ध 18 सितबर
-चतुर्दशी 19 सितंबर
-पितृ विसर्जन 20 सितंबर।

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