इस गुरुद्वारे में मिलता है चने का प्रसाद…जानिए क्या है चमत्कार की कहानी

patna saheb

पटना. तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला लगातार जारी है। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना में 350 वें प्रकाशोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है। बताया जाता है कि श्रद्धालुओं के लिए पटना साहिब गुरुद्वारा गुरुगोविंद सिंह की बाल लीलाओं का प्रतीक है। मान्यता है कि गुरुजी ने यहीं पर अपनी बाल लीलाएं की थीं। इसलिए आज भी यहां संगतों को प्रसाद में घुघनी (चने की सब्जी) दी जाती है।

सजाया जाता है कोना-कोना

बाललीला गुरुद्वारा के प्रधान संत बाबा कश्मीर सिंह भूरीवाले के अनुसार गुरु गोविंद सिंह बचपन में यहां चमत्कार किया था। फतह चंद मैनी एक बड़े जमींदार थे। उनका राजा की पद्वी मिली हुई थी। उनकी पत्नी विश्वंभरा देवी की कोई संतान नहीं थी। गुरु गोविंद सिंह अपने दोस्तों के साथ यहीं पर खेलने आया करते थे।

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प्रकाशोत्सव को लेकर श्री हरमंदिर जी पटना साहिब का कोना-कोना बेहतरीन सजाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म यहीं 1666 ईस्वी सन में हुआ था। तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब से थोड़ी दूर हरिमंदिर गली में स्थित बाललीला साहिब (मैनी संगत) गुरुद्वारा है।

इस दौरान रानी विश्वंभरा देवी ने गोविंद राय (गुरु गोविंद सिंह के बचपन का नाम) जैसे बालक की कामना कर रोज प्रभु से पुत्र प्राप्ति की प्रार्थना करती थीं। इसी बीच एक दिन गोविंद राय रानी की गोद में जाकर बैइ गए और उन्हें मां कहकर पुकारा तो वे पहले तो चौंक गईं। फिर रानी खुश होकर उन्हें धर्मपुत्र के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद एक दिन बाल गोविंद राय ने रानी मां से कहा बहुत जोर से भूख लग रही है। कुछ खाने के लिए दे दो। रानी के घर में उस वक्त चने की घुघनी के अलावा कुछ नहीं था। रानी मां ने बाल गोविंद राय को वही खाने को दे दिया, इसे गोविंद ने खुद भी खाया और दोस्तों को भी खिलाया। इसके बाद से यही प्रसाद के रूप में बांटा जाने लगा।

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