इसलिए करें पापमोचनी एकादशी व्रत, शास्त्रों में बड़ा है इस व्रत का महत्व

dev uthani gyaras 2017

चैत्र मास में आने वाली एकादशी इस बार 13 मार्च 2018 को है। यह एकादशी पाप मोचनी एकादशी होती है, इस एकादशी का व्रत करने से सारे कष्ट तो दूर होते ही हैं, साथ ही सारे पापों का भी नाश होता हैं। वर्ष 2018 में पापमोचनी एकादशी व्रत 13 मार्च मंगलवार को करने से सारे कष्ट दूर होते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पापमोचनी एकादशी के बारे में स्वयं श्रीकृष्ण ने इसके फल एवं प्रभाव को अर्जुन के समक्ष प्रस्तुत किया था।
व्र्रत चैत्रादि सभी महीनों के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों में किया जाता है। फल दोनों का ही समान है। जिस प्रकार शिव और विष्णु दोनों आराध्य हैं, उसी प्रकार कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों का एकादशी उपोष्य है। विशेषता यह है कि पुत्रवान् गृहस्थ शुक्ल एकादशी और वानप्रस्थ तथा तथा विधवा दोनों व्रत करें तो उत्तम होता है।

शुभ मुहूर्त 2018

13 मार्च को प्रात: पूजा संकल्प मुहूर्त 6.11 बजे स्नान के बाद।
सूर्योदय समय- 6.15 मिनट, सूर्यास्त समय- 6.10.54
राहूकाल- दोपहर 3.12 बजे से 4.41 बजे तक

दान- ब्राह्मण या पिता तुल्य या शिक्षक को आहार कराएं। बुजूर्ग को आहार दान करें, पिले वस्त्र दान करें, पिले रसीले फल दान करें, बेसन से बनी मिठाई और चने की दाल का दान करें।

पाप मोचनी एकादशी पूजन विधि

-इस व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रुप की पूजा करते हैं।
-व्रती को दशमी तिथि को एक बार सात्विक भोजन करें और मन से भोग विलास की भावना को निकालकर भगवान विष्णु की पूजन करें।
-एकादशी के दिन सूर्योदय होते ही स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए संकल्प के उपरांत श्री विष्णु की पूजन करें।
-पूजन के बाद श्रीमद् भागवात का पाठ करें या सुनें।
-एकादशी की रात को जागरण से कई गुणा लाभ मिलता हैं।
-द्वादशी के दिन प्रात:काल स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और ब्र्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करें। इसके बाद आहर ग्रहण करें।

 

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