Navratri 2017 : नौंवा दिन, मां सिद्धिदात्री की आराधना से सिद्ध हो जाएंगे सारे काम

siddhidatri

नवरात्र 2017 का आज नौंवा दिन हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की नवमी 29 सिंतबर को है। इस दिन मां को विदा करने और कन्या पूजा करके नवरात्रि का समापन किया जाना हैं। आज मां के नौंवे स्वरुप सिद्धिदात्री की पूजन होगी। मां सिद्धिदात्री तमाम सिद्धियों की दाती देवी हैं। इस वजह से उन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता हैं। नवरात्र में नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना करने से सभी रुके काम पुर्ण होते हैं। हर काम में सिद्धि प्राप्त होती हैं। मां की पूजन के लिए 9 फूल, 9 फल, 9 किस्म का प्रसाद, 9 कलश, 9 आभुषण सहित सभी सामग्री 9 प्रकार की होनी चाहिए।



नवमं-सिद्धिदात्री
इस प्रकार से नवरात्र उपासना क्रम से चनते हुए ही मनुष्य को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह मां दुर्गा का नवम स्वरुप सिद्धिदात्री प्रकट करता है। कहा गया है कि कष्ट सिद्धि के बाद ही नौ निधियां प्राप्त होती है। निधि का तात्पर्य है खजाना। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, सकल पदारथ या जगमाही, कर्महीन नर पावन नाहीं, यानी इस संसार में सभी पदार्थ खजाने से भरे हुए हैं, लेकिन कर्म हीन व्यक्ति उसे प्राप्त नहीं कर सकता।

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अत: नवरात्र उपासना क्रम में दुर्गा के नौ रुपों की आराधना व्यक्ति को कर्म योगी होने का क्रम बताती है, तभी उसके लिए सभी खजाने खुलते हैं। चाहे वह तन-मन से स्वस्थ रहने का खजानाहो या संसार में भौतिक उपलब्धियां प्राप्त करते हुए आलौकिक सुख की उपलब्धिध्यां हों। नवमी की सिद्धिदात्री शक्ति समृद्धि के प्रतीक कमल में विराजमान चार भुजाओं में क्रमश: चक्र, गदा, शंख और कमल पुष्प, शक्ति शक्ति संतुलन, ज्ञान और समृद्धि का खजाना लिए मानव को सुखी रहने का अमिट वरदान देती हैं। नवदुर्गा पूजा की पूर्णता कुमारी पूजन यानी कन्या पूजन के द्वारा होती है। यथाशक्ति, यथाभक्ति, यज्ञ-हवन के बाद कन्याओं को पूजन-अर्चन भोजन और उपहार अवश्य देना चाहिए। तभी नवरात्र उपासना की वास्तविक पूर्णता कही जा सकती है। कन्या पूजन को दिखावटी या बाहरी मन से नहीं अपितु भावना पूर्ण होकर ही करना चाहिए। नवरात्र आराधना भारतीय उपासना पद्धति का वह अंग है, जिस में नारी समाज का महानतम महत्व और गरिमा प्रकट होती है।



आधुनिक काल में जहां बाजार और विज्ञापन ने समाज में अपना अधिकार या जमा लिया है, ऐसे में नवरात्र आराधना और कन्या पूजन हमें भारतवर्ष में विलुप्त होते मानवीय मूल्यों को पूनर्जागृत करने और नारी को नारायणी स्वरुप में देखने की नई दृष्टि प्रदान करेगी।

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सिद्धिदात्री से सीखें खुशमिजाजी
तनाव में या दुखी रहने वालों को माता सिद्धिदात्री की आराधना करनी चाहिए। यह अष्टसिद्धियां, नववनिधियां देने वाली हैं।

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(शारदीय नवरात्र कलश स्थापना)

इस मंत्र से मिलेगी खुशी
सिद्ध गन्धर्व यज्ञद्यैर सुरैर मरैररि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनि।।

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