नवरात्र 2017: जीवन को मंगलमयी बनाकर अकाल मृत्यु से बचाती हैं कालरात्रि देवी मां

maa kalratri photo

(maa kaalratri is worshiped on seventh day of navratri 2017 in hindi)

नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरुप कालरात्रि की पूजन की जाती हैं। कालरात्रि देवी मां की आराधना से काल, संकट, समस्याओं का नाश होता हैं। इसलिए मां दुर्गा के सातवें स्वरुप को कालरात्रि कहा गया हैं।
मान्यता हैं कि कालरात्रि देवी मां के ध्यान मात्र से ही अग्निभय, आकाशभय, भूत-पिशाच आदि भाग जाते हैं। मां कालरात्रि देवी अपने आराधकों को अभय बनाती हैं। मां भक्तों के लिए हमेशा अभयकारी रही हैं। उनका ऊपर का दाहिना हाथ वर की मुद्रा में हैं।



वहीं नीचे वाला दाहिना हाथ अभयमुद्रा में। बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोह-कण्टक और निचले हाथ में खड्ग जैसे प्रलयंकारी अस्त्र-शस्त्र हैं, जिनमें वह शत्रुओं का विनाश करती हैं। कालरात्रि देवी मां का वाहन गर्दभ यानी गधा हैं।

सप्तमं- कालरात्रि (navratri seventh day puja maa kaalratri devi)

आसुरी शक्तियों और विकृत वृत्तियों का संहार कर संसार में सात्विक वृत्तियों का सृजन करने वाली शक्ति ही कालरात्रि हैं। अति भयंकर रुप में तीन नेत्रों वाली श्वांसों में कालाग्रि की लपटों को लिए हुए, दाहिने हाथ से भक्तों को अभय मुद्रा से निश्चिंत करती हुई, अन्य हाथों में खड्ग, कांटा, खप्पर लिए हुए असुरों और दुष्टों के लिए भयंकरी शक्ति ही काल रात्रि हैं। आज के युग में जहां पापाचार, अत्याचार, अनाचार और क्रूरता की मानसिकता से मानव समाज जकड़ा जा रहा है। सुख और शांति से जीवन यापन करने वाले दु:खी और पीडि़त हो रहे हैं, नीजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए प्रकृति नष्ट की जा रही है, आतंक और क्रूरता बढ़ रही है। ऐसे में भगवती भवानी का यह स्वरुप मानव सभ्यता बचाने की ओर प्रेरित करता हैं। वस्तुत: सारा संसार काल के चक्र से बंधा हुआ है। फिर भी अहंकारी व्यक्ति इस क्रम को अनदेखा करने से ही दु:ख का भागी बना रहता है। इसी दु:ख की निवृत्ती हेतु सातवीं शक्ति काल रात्रि की आराधना होती हैं।

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काल रात्रि से सीखें सेवाभाव (maa kalratri puja vidhi in hindi)

मां कालरात्रि से नि:स्वार्थ भाव से मदद करने की सीख मिलती हैं। एकाकी महसूस करने वाले लोग कालरात्रि का पूजन करें।

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इस मंत्र से दूर होंगे दोष (maa kalratri mantra in hindi)

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयग्डरी।।

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तांत्रिक पूजा से प्रसन्न होती हैं मां कालरात्रि (maa kalratri puja tantrik vidhi in hindi )

मां कालरात्रि की तांत्रिक पूजा से प्रसन्न होती हैं। सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह होती हैं, मगर रात में खास विधि-विधान से मां की आराधना होती हैं। तांत्रिक विधि से पूजा करने पर मां को मदिरा भी अर्पित किया जाता हैं। साधक पूजन में सहस्त्रसार चक्र भेदन भी करते हैं।

27 सितम्बर बुधवार महासप्तमी- ( माँ कालरात्रि पूजन)
प्रातः आरती सुबह 8:00 बजे, मध्यान्ह आरती दोप. 12:30 बजे
फलाहारी भोग दोप. 1:30 बजे, सन्ध्या आरती रात्रि 8:00 बजे
महानिशा पूजा रात्रि 12 बजे से

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