चमत्कारिक है सूर्यदेव का पश्चिमाभिमुख मंदिर, सूर्यकुंड तालाब में स्नान से खत्म होते हैं कुष्ठ रोग

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औरंगाबाद. बिहार के औरंगाबाद जिले में सूर्य भगवान का चमत्कारिक मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। त्रेतायुगीन यह मंदिर सदियों से आस्था का केंद्र रहा है। धार्मिक मान्यता हैं कि इस मंदिर को स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने अपने हाथों से बनाया था। काले और भूरे पत्थरों की बेहद सुंदर कृतियां, जिस तरह ओडिसा के पूरी के जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क के सूर्यमंदिर में है, ठीक उन्हीं से मेल खाता हुआ यहां का मंदिर भी दिखता हैं।

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मान्यता हैं कि यहां दर्शन मात्र से ही मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां सूर्य कुंड में स्नान से चमत्कारिक फायदा होता हैं, एक बार का स्नान शरीर के सभी चर्म रोग दूर कर देता है। छठ व्रत पर यहां दर्शन का विशेष महत्व बताया जाता है।


सूर्य कुंड की आस्था बेहद शक्तिशाली (lord sun temple )

मंदिर परिसर में देव सूर्यकुंड तालाब हैं। इस तालाब में श्रद्धालु स्नान करके पुण्य कमाते हैं, तो कई श्रद्धालु अपने कुष्ठ रोग भी मिटाते हैं।



जी हां, यहां के सूर्य कुंड की आस्था बेहद शक्तिशाली हैं। यहां स्नान से शहरी के सभी दाग दूर हो जाते हैं। जो काम बड़े से बड़े जानकार डॉक्टर नहीं कर पाते वह यहां हो जाता है।

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यह है सूर्य मंदिर की कहानी (real story of god surya in hindi)

मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि त्रेता युग में राजा ऐल के शरीर में सफेद दाग हो गए थे। राज्य के वैद्य-हकीमों ने काफी प्रयास किया लेकिन कोई दवा काम नहीं कर रही थी, फिर किसी देव सूर्यकुंड तालाब के बारे में बताया, राजा ने स्नान किया, तो उन्हें चमत्कारिक लाभ हुआ।



इसके बाद राजा ने सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया। धर्म-अध्यात्म की दुनिया में सूर्य को साक्षात देव माना जाता हैं, जबकि विज्ञान भी सूर्य को ऊर्जा के स्त्रोत का माध्यम स्वीकार करता है। मंदिर के निर्माण से जुड़ी एक और धार्मिक मान्यता प्रचलित है, इस मंदिर को स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने अपने हाथों से बनाया था। पुजारी सच्चितानंद पाठक बताते हैं कि इंसान के शरीर के मालिक सूर्यदेव हैं, भगवान सूर्य को पवित्र सूर्य कुंड में स्नान के बाद अघ्र्य देने से शरीर के सभी रोग दूर हो जाते हैं। यहां हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

 

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