श्री सिद्धिविनायक मंदिर में पहली बार भगवान विष्णु ने थी पूजा, यहां दर्शन मात्र से पूरी होती हैं मनोकामना

ganesh ji ka chamatkari mandir shree siddhivinayak ganapati temple mumbai maharashtra

वैसे तो भगवान गणेश की पूजा बुधवार को करने का महत्व है, लेकिन प्रथम पुज्य श्रीगणेश का एक चमत्कारी मंदिर ऐसा भी हैं, जहां मंगलवार को जमकर भीड़ रहती हैं। मुंबई के
प्रभादेवी क्षेत्र में श्री सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश के सबसे पूजनीय चमत्कारी मंदिरों में से एक हैं। मान्यता हैं कि यहां दर्शन मात्र से ही भगवान सिद्धिविनायक सारे कष्ट हर लेते हैं। मंदिर का निर्माण 1801 में विट्ठु और देउबाई पाटिल ने किया था। इस मंदिर की प्रतिमा भगवान विष्णु ने स्थापित की थी।

खास बात यह हैं कि यहां भगवान सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए सभी समुदाय व जाति के लोग पहुंचते हैं। हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा का अलग ही महत्व हैं, हर शुभ काम शुरु करने से पहले भगवान गणेश की पूजा कर आशीर्वाद लिया जाता है। यहां अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्ति यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के चमत्कारों के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं। भगवान श्री सिद्धिविनायक के दर से कोई आज तक खाली हाथ नहीं लौटा। यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती हैं।

लाइव दर्शन के लिए यहां क्लिक करें- http://www.siddhivinayak.org/

मंदिर से जुड़ी हैं यह पौराणिक कथा
सृष्टि की रचना के बाद भगवान विष्णु विश्राम कर रहे थे। तब भगवान विष्णु के कानों से राक्षस मधु और कैटभ आए। राक्षस अन्य देवताओं को परेशान करने लगे, तो सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के समक्ष प्रार्थना की। भगवान विष्णु जागे तो वे स्वयं भी इन राक्षसों का वध नहीं कर पाए। तब उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की, भगवान गणेश ने राक्षसों का संहार किया। इसके बाद भगवान गणेश की विशेष पूजा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान गणेश की मूर्ति एक पहाड़ी इलाके में स्थापित की, जिसे सिद्धिविनायक के रुप में पूजा जाता हैं। यह स्थल तब से सिध्दटेक के नाम से जाना जाता हैं। मूर्ति स्थापना के बाद पहली बार श्री सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान विष्णु ने पूजा की थी।

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भगवान सिद्धिविनायक के मंदिर की कथा
भगवान गणेश की जिन प्रतिमाओं की सुड़ दाहिनी ओर मुड़ी हो वह सिद्धपीठ से जुड़ी हुई होती है। ऐसे मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर कहे जाते हैं। मुंबई के श्री सिद्धिविनायक का मंदिर करीब 200 से अधिक साल पुराना हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती हैं। मंगलवार और बुधवार के दिन यहां बढ़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जो अष्ठविनायकों में गिनी जाती है। अत: मुंबई स्थित सिद्धिविनायक भी उसी का एक वृहद रुप है। जिसमें मूर्ति में कुछ विशेषताएं है। जैसे यह मुर्ति चर्तुभुजी बनाई गई है। रिद्धी तथा सिद्धी की मूर्तियां मुख्य गणेश मूर्ति के कंधों के आसपास स्थापित की गई है। मूशकों की संख्या भी अधिक है। एक मूशक बड़ा और चांदी का है। मंदिर का विस्तार भव्य पांच मंजिला बनाया गया है। गर्भग्रह में विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें भक्त आसानी से दर्शन कर लेते हैं।

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