जीवन से कडवाहट ऐसे दूर करें, मनाएं मकर संक्रांति का पर्व

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सूर्य का मकर राशि में प्रवेश ही मकर संक्राति कहलाता है, इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है… शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है। इस दिन स्नान, दान, तप, जप और अनुष्ठान का अत्याधिक महत्व है… … मकर राशि में सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी रविवार को रात 8 बजकर 00 मिनट पर होगा। ऋषिकेश पंचांग के अनुसार पर्व का पुण्यकाल 16 घंटे का जो 15 जनवरी दिन सोमवार को दोपहर 12.00 मिनट तक रहेगा… सामान्य पुण्यकाल सूर्यास्त तक रहेगा…जानिए क्या कहते हैं पंडित पी. एस. त्रिपाठी…

यदि सूर्य रात्रि के समय मकर राशि में प्रवेश करे तो पर्वकाल दूसरे दिन तक मान्य होता है… इसी दिन से सौरमास का आरम्भ होता है.. ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाय तो सूर्य के शनि कि राशि में प्रवेश से तमाम तरह की परिस्थिति बदलती है… मौसम में बदलाव के साथ ही प्रकृति में बदलाव भी शुरू हो जाता है… ज्योतिष में सूर्य को पुत्र और शनि को बेटा माना जाता है और दोनों में विरोधाभाष के कारण नहीं पटती जिसके कारण एक स्थान पर रहने से विरोध और न्याय अन्याय से सम्बन्धित गहमा गहमी बनती है… हमारे पुराणों में इसी अवरोध को दूर करने के लिए सूर्य से सम्बन्धित गुड और शनि के लिए तिल को मिलाकर तिल कि कडवाहट दूर कर तिल गुड का लड्डू प्रसाद में बाटा जाता है जिससे व्यवहार कि कडवाहट दूर होकर मिठास बने… तिल-गुड़ से बने व्यंजनों और लड्डुओं का मंदिरों में भोग लगाकर दान करना पुण्यकारी होता है… और जीवन से कटुता दूर होती है… और मिठास लेन के लिए खिचड़ी, सेम कि सब्जी का भोग लगाया जाता है.. सोने या ताम्बे के श्री यंत्र के पूजा करें… गेंहू , गुड़ , तांबा , लाल वस्त्र और लाल फल , शहद इत्यादि का दान करें …मकर लग्न के जातक यदि सूर्य की दशा हो तो महामृत्युंजय मन्त्र का जप करें…

क्या कहती हैं राशियां (पं. दयानन्द शास्त्री  के अनुसार)

मेष राशि -सम्मान बढ़ेगा
वृषभ राशि – तनाव की संभावना
मिथुन राशि – धन लाभ होगा
कर्क राशि -हानि की संभावना
सिंह राशि -भूमि लाभ
कन्या राशि -समृद्धि की संभावना
तुला राशि – आर्थिक लाभ होगा
वृश्चिक राशि -चिंता बढ़ेगी,
धनु राशि -सुख मिलेगा
मकर राशि – लाभ होगा
कुम्भ राशि -पदोन्नति होगी
मीन राशि -कष्ट मिलेगा

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पतंग उड़ाने का महत्व-
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं है। संक्रांति पर जब सूर्य उत्तरायण होता है तब इसकी किरणें हमारे शरीर के लिए औषधि का काम करती है। पतंग उड़ाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आ जाता है जिससे सर्दी में होने वाले रोग नष्ट हो जाते हैं। और हमारा शरीर स्वस्थ रहता है।
तिल का महत्व
संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र होते हुए भी सूर्य से शत्रु भाव रखते हैं। इसलिए शनिदेव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें, इसलिए मकर संक्रांति पर तिल का दान किया जाता है।
दान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन ब्राह्मणों को अनाज, वस्त्र, ऊनी कपड़े, फल आदि दान करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के दिन दान करने वाला व्यक्ति संपूर्ण भोगों को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
पूर्व  में संक्रांति का पर्व मनाए जाने का क्रम
16 व 17वीं शताब्दी में 9 व 10 जनवरी
17 व 18वीं शताब्दी में 11 व 12 को
18 व 19वीं शताब्दी में 13 व 14 जनवरी को
19 व 20वीं शताब्दी में 14 व 15 को
21 व 22वीं शताब्दी में 14, 15 और 16 जनवरी तक मनाई जाने लगेगी।

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