महानंदा नवमी व्रत, अज्ञात कारण से उत्पन्न दुःख की निवृति

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माघ माह के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र की शुरूआत होती है और इसमें नवमी (26 जनवरी 2018 ) को श्री महानंदा नवमी व्रत किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन अज्ञात कारणों से किसी के जीवन में सुख-समृद्धि की कमी हुई हो तो इस नवरात्र में नवमी के दिन महानंदा नवमी की पूजा व्रत तथा दान-मंत्र जाप करने से व श्री की देवी की पूजन विधि विधान से करने से दारिद्रय सामाप्त होकर संपन्नता तथा विष्णुलोक की प्राप्ति होती हैं इस दिन पूजनस्थल के मध्य में एक बड़ा अखण्ड दीपक जलाकर रात्रि जागरण एवं ओं हृीं महालक्ष्म्यै नमः इस महालक्ष्मी मंत्र का जप करना चाहिए तथा ब्रम्ह मूहुर्त में घर का कूड़ा रखकर सूपे में रखकर बाहर ले जाना चाहिए.  घर का कूड़ा करकट एकत्रित का उसे किसी घर से बाहर करना चाहिए। इसे अलक्ष्मी का विसर्जन कहा जाता है।



विधि-विधान से स्नान ध्यान कर पूजा कर महालक्ष्मी का हाथ जोड़कर आव्हन करने से वे जरूर ही घर में आती हैं और अपने आशीर्वाद से आपको धन-धान्य से समृद्ध कर देती हैं।

विधि-विधान से माता का पूजन mata pujan ki vidhi

महानंदा नवमीं का व्रत कर गुप्त नवरात्र के पूर्ण होने पर विधि-विधान से माता लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। इस दिन कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने का अत्यधिक महत्व है। कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याएं दूर होती हैं और मनुष्य को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

व्रत पूजन vrat  pujan vidhi in hindi

महानंदा नवमी के दिन कुंवारी कन्याओं का मिला आशीर्वाद साक्षात देवी के आशीष के समान माना गया है। यदि आप दरिद्रता से पीड़ित हैं और अनेक उपाय करने के बाद भी लक्ष्मी आपके घर नहीं आ रहीं हैं तो महानंदा नवमी का व्रत पूजन निश्चित ही आपके जीवन में परिवर्तन लेकर आएगा…


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