शिव देंगे सिद्धि, सिद्धि योग की महाशिवरात्रि 13 को

somvar ko shiva ji ki puja abhishekam

ज्योतिषाचार्य डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे @ शिव महिम्न: स्त्रोत्र में प्रश्न है, “ तव तत्वं न जानामि, की दृषोसि महेश्वर:” अर्थात आप कैसे दिखते हैं शिव? हम आपका स्वरूप नही जानते। स्वयं शिव इस प्रश्न का उत्तर इस तरह देते हैं: “ या दृषोसि महादेव तादृषाय नमो नम:” अर्थात “मैने आपको दृष्टि दी है आप जिसमें तरह, जिसमें स्वरूप में मुझे देखना चाहते हैं देख लिजिये”।

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13 और 14 दोनों तारीख को मनाई जायेगी शिवरात्रि

लेकिन 13 तारीख है श्रेष्ठ

शास्त्रों में शिवरात्री को त्रि स्पृशा कहा गया है अर्थात तीन तिथियों की युति में मनाये जाने वाला पर्व| कम से कम दो तिथियों का स्पर्श तो होना ही चाहिए| मंगलवार 13   तारीख को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात्री  10.34 बजे तक है, तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि है। इसी दिन सूर्य प्रधान उत्तरा  षाढा नक्षत्र है।सिद्धि  योग का होना लाभदायक है । 13 तारीख को रात्री 10.34 के पश्चात चतुर्दशी है|  13 तारीख और 14 तारीख दोनों ही दिन रात्री के समय चतुर्दशी का होना संदेह को निर्मित करता है| लेकिन ‘धर्म सिन्धु’, ‘तिथि तत्व’ और ‘निर्णयामृत’ जैसे ग्रन्थ इस संदेह का समाधान इस तरह करते है की यदि लगातार दो रात्री महानिशीथ काल (रात्री 12 से 3 बजे का काल ) में चतुर्दशी हो तो पहली रात्रि वाले दिन ही शिवरात्री मनाई जाए| वैसे तो शास्त्रों में चतुर्दशी और श्रवण नक्षत्र की युति को ही शिवरात्रि पर्व मनाये जाने का प्रावधान है, अत: 14 तारीख को भी शिवरात्री मनाई जा सकती है|।

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भद्रा का है प्रभाव,

निशीथ काल की पूजा होगी लाभदायक

13 तारीख को रात्रि 10.34 बजे से भद्रा लग रही है। जो कि 14 तारीख को प्रात:  11.39 तक रहेगी। यह भद्रा मकर राशी की भद्रा है। यह  भद्रा मकर राशी मे पाताल लोक मे होने से शिवजी की पूजा की जा सकती है। लेकिन रात्रि काल मे पूजा करना श्रेष्ठ होगा।

 

राशी के अनुसार करें शिवजी को प्रसन्न

गुरुवार को शिवरात्रि के दिन शिवजी का, राशी के अनुसार, एक निश्चित मंत्र का लगभग 5 मिनट उच्चारण करते हुए, निश्चित सामग्री से अभिषेक करने से जीवन में आ रही बाधाओं का समाधान तो होता ही है, साथ ही सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है:

 

राशी                   मंत्र                                                 अभिषेक सामग्री

मेष             ऊँ ह्रीं अधोक्षजाय साम्ब सदाशिवाय नम:                  केसर दूध

वृषभ          ऊँ ह्रीं अम्बिका नाथाय साम्ब सदाशिवाय नम:            मिश्री युक्त दूध

मिथुन        ऊँ ह्रीं श्रीकंठाय साम्ब सदाशिवाय नम:                        गन्ने का रस


कर्क          ऊँ ह्रीं भक्तवत्सलाय साम्ब सदाशिवाय नम:                गाय का दूध

सिह          ऊँ ह्रीं पिनाकिने साम्ब सदाशिवाय नम:                   अनार का रस

कन्या        ऊँ ह्रीं शशि शेखराय साम्ब सदाशिवाय नम:              बेल का शर्बत

तुला          ऊँ ह्रीं शम्भवाय साम्ब सदाशिवाय नम:                   नारियल का पानी

वृश्चिक       ऊँ ह्रीं वामदेवाय साम्ब सदाशिवाय नम:                 पंचामृत

धनु          ऊँ ह्रीं सध्योजाताय साम्ब सदाशिवाय नम:                गुलाब जल

मकर        ऊँ ह्रीं नील लोहिताय साम्ब सदाशिवाय नम:             काले अंगूर का रस




कुम्भ       ऊँ ह्रीं कपर्दिने साम्ब सदाशिवाय नम:                मोंगरे का इत्र

मीन         ऊँ ह्रीं विष्णु वल्लभाय साम्ब सदाशिवाय नम:        बेलपत्र और दूध

 

चार पहर की पूजा: मिलेगा सब कुछ

शिवरात्रि को रात्रि के चारों पहरों में पृथक पूजन का भी विशेष विधान है:

1.प्रथम पहर में दूध से स्नान तथा ‘ओम हीं ईशानाय नम:’ का जाप करें।

  1. द्वितीय पहर में दधि स्नान करके ‘ओम् हीं अधोराय नम:’ का जाप करें।




3.तृतीय पहर में घृत स्नान एवं मंत्र ‘ओम हीं वामदेवाय नम:’ का जाप करें।

4.चतुर्थ पहर में मधु स्नान एवं ‘ओम् हीं सद्योजाताय नम:’ मंत्र का जाप करें।

 

                      काल सर्प दोष से मिलेगी मुक्ति: उपाय

 यदि आप की कुंडली में काल सर्प दोष के लक्षण हैं तो इस छोटी सी क्रिया को शिवरात्रि के दिन प्रात:,मध्यान्ह और सायंकाल करें, और इस क्रिया को प्रत्येक सोमवार को करें। भगवान शंकर की पांच मंत्रों से पंचोपचार विधि पूर्वक सफेद चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य चढाते हुए पूजा करता है, वह काल सर्प दोष से मुक्त हो जाता है हो जाता है। ये मंत्र हैं:

ॐसद्योजाताय नम:।ॐवामदेवाय नम: ।ॐअघोराय नम: ।ॐईशानाय नम: ।ॐतत्पुरुषाय नम:।




12 तरह के पुष्प शिव जी को हैं अत्यंत प्रिय

शिव जी की प्रसन्नता के लिए शिव पूजा के विशेष उपायों में अन्य पूजा सामग्रियों के अलावा शिव को विशेष फूल अर्पित करने का भी महत्व बताया गया है। शिव जी को अर्पित किये जाने वाले 12 तरह के पुष्प:

मन्दार ,मालती,धतूरा , सिंदुवार ,अशोक ,मल्लिका , कुब्जक ,पाटल ,आंकड़े ,कदम्ब, लाल और नीला रंग का कमल,कनेर।

jyotishacharya pandit dr dattatreya hosakere
(ज्योतिषाचार्य डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे)

शिव जी की अष्टमूर्ति की पूजा से

हर दिशा पर होगा वर्चस्व

शिवपुराण में लिखा है कि देवाधिदेव महादेव की  अष्टमूर्तियों से ही यह विश्व संचालित हो रहा है। अर्थात शिव के आठ स्वरूप आठों दिशाओं में आपकी प्रगति को सुनिश्चित करते हैं। अपनी सार्वभौम प्रगति के लिये भगवान शिव की इन अष्ट्मूर्तियों को इन्हीं आठ मन्त्रों से पुष्पांजलि दें-



ऊँ शर्वाय क्षितिमू‌र्त्तये नम:। ऊँ भवाय जलमू‌र्त्तये नम:। ऊँ रुद्राय अग्निमू‌र्त्तये नम:।     ऊँ उग्राय वायुमू‌र्त्तये नम:। ऊँ भीमाय आकाशमू‌र्त्तये नम:। ऊँ पशुपतये यजमान मू‌र्त्तये नम:। ऊँ महादेवाय सोममू‌र्त्तये नम:। ऊँ ईशानाय सूर्यमू‌र्त्तये नम:।

 

                 सभी समस्याओं का होगा समाधान

1.विवाह में यदि विलम्ब हो रहा है: लडके केसर युक्त दूध से और युवतियां अनार के रस से शिवजी का अभिषेक करें।  ह्रीं ह्रीं गिरिजा पतये शिवशंकराय ह्रीं ह्रीं’’ मंत्र का जाप 108 बार करें।

3.कैरियर के लिये: सर्प का पूजन करने के पश्चात शिव जी का अभिषेक कर एक कमल का पुष्प अर्पित करें। प्रतिदिन शिवजी का जल से अभिषेक करें।

3.परीक्षा में सफलता प्राप्ति के लिये: 21 बेल पत्र पर लाल चन्दन लगाकर अपनी सीधी हथेली के मध्य भाग से स्पर्श करा कर अर्पित करें। शिवशंकराय ह्रीं’ मंत्र का जाप करें।



  1. ऋण मुक्ति और स्वयं के घर के लिये: शिवजी का काले आंगूर के रस से अभिषेक करें। सूपा और काला छाता अर्पित कर मंत्र ‘‘धन समृद्धि प्रदाय श्रीमन महदेवाय नम:’’ का जाप तीनो पहर करें।
  2. 5. अच्छे स्वास्थ्य के लिए: ऊँ ह्रौं जूं स: मंत्र से शिवजी का कपूर युक्त जल से अभिषेक शिवरात्री को और प्रत्येक सोमवार को करे|

 

यहां वीडियों में करें भगवान महाकालेश्वर के दर्शन:-

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