मां वैष्णो देवी : आरती का महत्व और नियम

maa vaishno devi aarti lyrics in hindi

पूजा पाठ, ईश्वर आराधना से आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। लेकिन भगवान की पूजा बगैर आरती के पूरी नहीं मानी जाती है। पूजन में आरती का बहुत खास महत्व है।

आरती का महत्व और नियम
पूजा के बाद आरती दूर करती है मुश्किलें
आरती से ईश्वर की आराधना और पूजा से मनोकामना पूरी होती है
-पूजा पाठ और साधना में सभी मनोकामना पूरी करती है
-चिंताओं से दूर कर असीम शांति का अहसास करवाती है
-भगवान की आरती के बाद ही पूजा पूरी होती है
-आरती की सबसे पहले चर्चा स्कंद पुराण में की गई
-आरती हिंदू धर्म की पूजा परंपरा का बेहद महत्वपूर्ण काम है
-किसी भी पूजा पाठ, यज्ञ-अनुष्ठान के अंत में देवी-देवताओं की पूजा की जाती है
आरती की प्रक्रिया में एक थाल में ज्योति और कुछ विशेष वस्तुओं को रखकर भगवान के सामने घुमाते है
-थाल में अलग-अलग वस्तुओं का अलग-अलग महत्व होता है
-मगर सबसे अधिक महत्व आरती के साथ की जाने वाली स्तुति का महत्व होता है
-जितने अच्छे मन और श्रद्धा से की जाने वाली स्तुति फल प्रदान करवाती है
-बगैर पूजा-उपासना के आरती नहीं की जाती है
-पूजा के अंत में ही आरती की जाती है
-दीपक से आरती करें तो यह पंचमुखी होना चाहिए
-आरती की थाल को ऐसे घुमाएं की ऊं की आकृति बनें
-पूजा के फुल और कुमकुम भी रखें
-आरती की थाल को भगवान के चरणों में चार बार, नाभि में दो बार, मुख पर एक बार, संपूर्ण शरीर पर सात बार घुमाना चाहिए
-आरती के बाद कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए
-ईश्वर की भक्ति में बहुत ही शक्ति होती है, इसलिए सच्चे मन से की गई भक्ति जरूरी फलती है।

यहां पढ़ें मां वैष्णों देवी की आरती
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी मैया जय आनन्द करनी।
तुमको निशदिन ध्यावत, मैया जी को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमदको
मैया टीको मृगमदको ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे मैया रक्ताम्बर राजै ।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी मैया खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
मैया नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, कोटिक चद्रं दिवाकर सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती मैया महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे
मैया शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी…..
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी
मैया तुम कमलारानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू मैया नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अौर बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता
मैया तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पति
करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी…..
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी
मैया वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी…..
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती मैया अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत, श्री मालकेतु कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी….
श्री अंबेजी की आरती, मैया जी की आरती जो कोइ नित गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, कहत हरिहर स्वामी मनवांछित फल’ पावे
ॐ जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी
मैया जय मगंल करनी
मैया जय आनन्द करनी।
तुम को निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवरी
बोल सच्चे दरबार की जय
सबके मनोरथ पुरी करन वाली माता
तेरी सदा ही जय

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