गंगा दशहरा: मां गंगा की इस पूजा से पापों का होता है नाश

latest updates of ganga dussehra 4 june 2017 muhurat and snan

मां गंगा का अवतरण दिवस गंगा दशहरे के रुप में देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। गंगा नदी के तटों पर श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ देखी जा रही है। गंगा दशहरे के दिन मां गंगा की पूजन और गंगा नदी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। गंगा दशहरा पर गंगा नदी में स्नान के लिए दूर-दूर से लोग परिवार सहित गंगा तट पर पहुंच रहे हैं।

गंगा दशहरा की कहानी
अयोध्या के राजा सगर ने एक बार युद्ध में सात समुद्र जीत लिये थे। उनकी दो पत्नियां थी। एक पत्नी से उन्हें 60 हजार पुत्र रत्न प्राप्त हुए थे। इसके बाद राजा ने अश्वमेघ यज्ञ किया और अश्वमेघ अश्व को छोड़ा। यह देख स्वर्ग के भगवान घबराने लगे। उन्होंने अश्वमेघ अश्व  को रोकने के प्रयास शुरु कर दिए। कुछ समय बाद अश्वमेघ अश्व का हरण हो गया मुनि कपिल के आश्रम में अश्वमेघ अश्व को बंधवा दिया गया। राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रों को अश्वमेघ अश्व की खोज करने भेजा। अश्वमेघ अश्व मुनि कपिल के आश्रम में नजर आया तो राजा के बेटे मुनि को चोर कहने लगे। मुनि कपिल ने आंख खोली तो सब कुछ देख उन्हे गुस्सा आ गया। श्राप में उन्होंने सभी को भस्म कर दिया। इसके बारे में सगर के पौत्र को पता लगा। उसने अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए गरुड़ से पूछा, तो उन्होंने गंगा नदी को मृत्यु लोक ले जाने की सलाह दी। इसके बाद राजा दिलीप के बेटे भागीरथ ने तपस्या की और मां गंगा को धरती पर ला दिया। गंगा धरती पर आई तो चारों तरफ हाहाकार मच गया। शिवजी ने गंगा मां को जटाऔं में समेट लिया। इस तरह पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति हुई।

ऐसे करें पूजा
-गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में जाकर पूजा का बड़ा महत्व है।
-गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर स्नान आदि कर्मों से पवित्र होकर पूजन करें।
-नम: शिवाय नारायनये दशहराये गंगाये नम: मंत्र से स्तूति करें।
-गंगा दशहरा के दिन दीप दान और तिल तर्पण का महत्व है।

whatsapp पर रोज एक सच्ची धार्मिक कहानी पढऩे के लिए हमारे नंबर 8224954801 को dharma kathayen के नाम से सेव करें। इसके बाद हमारे नंबर पर start लिखकर whatsapp कर दें…

Leave a Reply

Top
error: Content is protected !!