Partial solar eclipse 2018 साल का पहला सूर्य ग्रहण, सूतक काल में इन कामों से बचें वरना आ जाएगी आफत

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गुरवार 15 फरवरी 2018 को आधी रात के बाद से सूर्य ग्रहण शुरु हो जाएगा। यह 2018 का पहला सूर्य ग्रहण होगा। अभी 31 जनवरी को ही चंद्र ग्रहण लगा था और भारत में इसे देखा गया था। अब सूर्य ग्रहण ने दस्तक दे दी है। लेकिन सूर्य ग्रहण अर्जेटीना, चिली, पैराग्वे और उरुग्वे में ही देखा जा सकेगा। वहीं भारत के लोग NASA की वेबसाइट पर सूर्य ग्रहण को लाइव देख सकते हैं। इसी साल आंशिक सूर्य ग्रहण 18 जुलाई व 11 अगस्त को होंगे। पर इन्हें भी भारत में नहीं देख सकेंगे।

ग्रहण का यह है समय

इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 15 फरवरी की रात 12 बजकर 25 मिनट पर शुरु होगा। अगले दिन 16 फरवरी की सुबह चार बजे ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण रात में होने की वजह से भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं दिखेगा। मगर इसका असर राशियों पर पड़ना तय है।

सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, १५ फरवरी रात्रि १२. २५ मिनट (१६ फरवरी 00.२५ ) से १६ फरवरी सुबह ४.१७ तक रहेगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण दक्षिण जार्जिया, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील और अंटार्कटिका आदि देशों में दिखाई देगा।


जानिए ग्रहण में क्या करें, क्या न करें?

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानंद शास्त्री ने बताया की सूर्य हो या चंद्र ग्रहण, दोनों ही अपने बुरे प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। ना केवल शास्त्रीय दृष्टि सेम वरन् साइंस ने भी ग्रहण की वजह से होने वाले बुरे प्रभावों को माना है। ग्रहण के दौरान कुछ सावधनियां बरतनी जरूरी हैं यह वैज्ञानिकों ने भी माना है, क्यूंकि ग्रहण के दौरान निकलने वाली तरंगे हमें हानि पहुंचा सकती हैं।
सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, सूतक लगने के बाद से और सूतक समाप्त होने तक भोजन नहीं करना चाहिये।
ग्रहण के वक्त पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए।
ग्रहण के वक्त बाल नहीं कटवाने चाहिये।
ग्रहण के सोने से रोग पकड़ता है किसी कीमत पर नहीं सोना चाहिए।
ग्रहण के वक्त संभोग, मैथुन, आदि नहीं करना चाहिये।
ग्रहण के वक्त दान करना चाहिये। इससे घर में समृद्धि आती है।
कोइ भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये और नया कार्य शुरु नहीं करना चाहिये।
अगर संभव हो सके तो पके हुए भोजन को ग्रहण के वक्त ढक कर रखें, साथ ही उसमें तुलसी की पत्ती डाल दें।
तुलसी का पौधा शास्त्रों के अनुसार पवित्र माना गया है। वैज्ञानिक रूप से भी यह सक्षम है, इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट आसपास मौजूद दूषित कणों को मार देते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ में डालने से उस भोजन पर ग्रहण का असर नहीं होता।
चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है।
श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है।
सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं।
ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।
ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।
ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।
ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है।
गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए। तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।
भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।
ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है। ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है।
भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए।

 

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