किसानों के इस 1 श्राप से हो जाता है सर्वनाश, पढ़ें कृषिदेव भगवान बलराम की कथा!

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भोपाल. किसान आंदोलन में 6 किसानों की मौत के बाद आक्रोषित किसानों को मनाने के लिए सीएम शिवराज ने सत्याग्रह उपवास शुरू कर दिया है। मप्र के किसान परेशान है। वे सिर्फ अपना हक और अपनी खेती को बचाने के लिए सरकार से कुछ सुविधाएं मांग रहे है। ऐसे में आंदोलन कुछ हिंसक भी हो गया। ऐसे में राजनीति हो रही है। वहीं किसानों की परेशानी खत्म नहीं हुई। किसान अब भी नाराज है।
आज के माहौल में किसानों के देवता भगवान बलराम की कथा हर कोई को याद आती है, जिन्हें याद नहीं उन्हें यह पढऩा चाहिए।

भगवान बलराम की यह सच्ची कथा किसानों को ताकत और प्रेरणा देती है। इस कथा के आधार पर यह माना जाता है कि किसान को कोई परेशान करता है, तो वह गुस्से में किसी को श्राप दे तो सर्वनाश हो सकता है। इसके बारे में यह भी कहा गया है कि किसान सच्चा होना चाहिए और किसी का अहित सोचकर श्राप न दें। तो आईए जानते हैं भगवान बलराम की कथा के बारे में…

यह है भगवान बलराम की कथा

बात महाभारत काल की है। भगवान बलराम के भतीजे सांबकुमार व दुर्योधन की कन्या लक्ष्मणा का प्रेम के बारे में सभी को पता लगा। इसके बाद कौरव और पांडव के पितामह को भी पता लगा तो उन्होंने बलराम के भतीजे को जेल में भेजने का आदेश दे दिया। लेकिन भगवान बलराम के भय से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उसे जेल में डाल दें।



बाद में दुर्योधन, कर्ण, शकुनी मामा, अश्वत्थामा आदि को पता लगा और इन्होंने हिम्मत और श्रडय़ंत्र कर बलराम के भतीजे को कैद कर लिया। कुछ समय बाद लक्ष्मणा ने घोषणा कर दी कि वह किसी और से विवाह नहीं करेगी, तो एक ही रास्ता बचा कि बलराम के भतीजे से ही करवा दो। फिर पितामह ने लड़के के माता-पिता से बात की। इतने में पूरी बात भगवान बलराम को पता लगी कि भतीज कैद है, तो उसे छुड़ाने जेल पहुंच गए और ले आए। वे भी इस विवाह के लिए राजी हो गए। इसी बीच दुर्योधन ने छोटी बात करते हुए कह दिया कि यादव भरतवंश से सेवक थे, उनसे हमारी बेटी का विवाह कैसे हो सकता है। इस बात से भगवान बलराम क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपना हल हस्तिनापुर महल में के सामने फैंका। इससे आसमान गर्जने लगा और बिजली की चमकने लगी और धरती कांपने लगी। शहर नदी में डूबने लगा। कोरवों में भगवान के क्रोधा का भय दिखा और दुर्योधन ने भगवान से माफी मांगी। भगवान ने माफ किया और बाद में विवाह भी हुआ। लेकिन दुर्योधन के प्रति भगवान बलराम को भरोसा टूट गया। एक राजा को भी शासित करने की शक्ति भगवान बलराम में थी। इसी कारण किसान अपने कुल देवता के रूप में भगवान बलराम को पूजते हैं। भगवान बलराम के भक्तों और किसानों को परेशान करने वालों को भगवान बलराम कभी माफ नहीं करते है। किसानों का एक मामूली श्राप भी बड़े से बड़े राजा के लिए सर्वनाशकारी साबित हो सकता है। ऐसा भगवान बलराम का आर्शीवाद है।

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