करवा चौथ: जानिए व्रत का महत्व, पूजा मुहूर्त और कितने बजे उदय होगा चंद्रमा

(importance of karva chauth fast and moon in hindi)

हमारे देश में हर साल मनाए जाने वाला करवाचौथ का त्योहार इस साल 8 अक्टूबर को है। इसका शादीशुदा महिलाओं के लिए बेहद महत्व हैं। अविवाहित भी भावी पति के लिए इस निर्जला उपवास को करती हैं। महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खाती है, जो कि उन्हें उनकी सास द्वारा तैयार करके दी जाती है। सरगी खाने के बाद महिलाएं तब तक बगैर पानी के रहती है, जब तक रात में चांद न देख लें। इसके बाद पुरुष अपनी पत्नी को पानी पिलाकर उपवास खुलवाते हैं। आईए महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला से जानते हैं, करवा चौथ व्र्रत के बारे में…



करवा चौथ: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत किया जाता है। भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिये करवा चौथ एक प्रमुख पर्व माना जाता है। पौराणिक काल से ही अपने पति के दीर्घायु और सौभाग्य की कामना के लिये, दांपत्य जीवन की बगिया हमेशा महकती रहे तथा जीवन पर्यन्त पति पत्नी के बीच अगाध प्रेम बना रहे इसलिये यह व्रत किया जाता है।

रीति-रिवाज और परम्पराओं का स्वरूप (karwa chauth vrat vidhi in hindi )

करवा चौथ,महज एक व्रत नही है बल्कि एक सूत्र है साथ रहने के विश्वास का,एक साथ जीने का। रीति-रिवाज और परम्पराओं का स्वरूप तो समय के साथ ज्यादा कुछ नही बदलता पर उन्हें निभाने के  तौर -तरीके जरूर बदल रहे है। इस बदलते परिवेश में करवा चौथ पर पुरुषो की सकारात्मक सोच और सहभागिता शामिल है। करवा चौथ का व्रत आज पति-पत्नी दोनों के लिये प्यार व स्नेह को व्यक्त करने का पर्याय बन चूका है। पश्चिमी सभ्यता के चकाचोंध का अंधानुकरण के बाद भी पति-पत्नी दोनों यह समझने लगे है की जीवनसाथी एक दूसरे के लिये शक्ति स्तम्भ,दोस्त व सलाहकार होते है।
करवा चौथ के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर व्रत का मानसिक सकंल्प करें।
आँगन व द्वार पर रंगोली अल्पना बनाकर आम्रपत्रो का तोरण वन्दनवार बनाकर घर को सजाया जाता है।
दोपहर के समय महिलाये, एक साथ, एक जगह एकत्रित होकर एक साफ पीढ़ा या चौकी पर कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश शिव तथा माता पार्वती की मूर्ति को विराजित करते है । उसके सामने पानी से भरा लोटा कलश तथा मिट्टी,शक्कर या स्टील का करवा रखा जाता है । इस करवे को गेहूँ या शक्कर से भरकर रखा जाता है । स्वस्तिक बनाकर षोडशोपचार पूजा करके करवा चौथ की कहानी सुनाई जाती है।

करवा चौथ 2017 पूजा मुहूर्त समय (karwa chauth muhurat date and time in india)

करवा चौथ पूजा मुहूर्त -शाम 6.16 से 7.30 तक रहेगा।
चंद्रोदय का समय शाम 8.40 है।

पवित्रता व स्वछता का विशेष ध्यान (karva chauth importance in hindi )

चन्द्रोदय के समय, सोलह सिंगार करके सज सवंर कर , चाँद निकल आने पर चन्द्र देव को अर्घ्य दिया जाता है। ब्राह्मणों को दक्षिणा देकर एक थाल में सुहाग का सामान, गहना – रुपया व फल-मिठाई रखकर बहु अपने सासु माँ , जेठानी , ननद या आदरणीय महिला को देती है। इस दिन पवित्रता व स्वछता का विशेष ध्यान रखना चाहिये। प्रसन्न मुद्रा में , मर्यादित तथा मौन रहे या कम बात करें। किसी का अपमान या निंदा न करें। घर में उत्सव का वातावरण बनाकर रखें।
manoj shukla mahamaya mandir raipur
(लेखन संकलन- पंडित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर)

यह भी पढ़ें:- खैराबादधाम में आस्था और अनुष्ठान का इकलौता अष्टकोणीय श्रीफलौदी माता मंदिर

इस व्रत में चन्द्रमा की भी पूजा की जाती है क्योकि ज्योतिष विज्ञान के अनुसार चन्द्र देव, मन के देवता है । मन की चंचलता को स्थिरता के लिये चन्द्र देव के उदय हो जाने पर अर्घ्य देकर विधिवत पूजा कर प्रसन्न किया जाता है। इसके बाद ही व्रती महिलाएं अन्न जल ग्रहण करती है।



आज के इस विकासशील आधुनिक समाज में , जबकि स्त्री-पुरुष समान दर्जा पाने की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में भी करवा चौथ सहित समस्त प्रथा – मान्यताये हमें व सम्पूर्ण परिवार व समाज को जोड़कर रखती है। परिवार में जब प्रेम और खुशहाली होगी तो ही समाज मजबूत रहता है। हमें कृतज्ञ होना चाहिए अपने वैज्ञानिक दृष्टी रखने वाले पूर्वजो का , जिन्होंने ऐसे पर्व -प्रथाओं का सृजन किया जो हमें आपस में जोड़कर रखते है।
whatsapp पर रोज एक सच्ची धार्मिक कहानी पढऩे के लिए हमारे नंबर 8224954801 को dharma kathayen के नाम से सेव करें। इसके बाद हमारे नंबर पर start लिखकर whatsapp कर दें…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!