कार्तिक मास 2017 शुरु, ऐसे पूजन और कार्तिक स्नान से मिलता है लाभ

kartik month 2017
(importance of kartik month and kartik snan in hindi)
सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार बारह महीनो का अपना अलग अलग महत्त्व तो है लेकिन इन समस्त मासों में कार्तिक माह अत्यधिक पवित्र माना गया है।

भारतके सभी तीर्थों की यात्रा के समान पुण्य फलों की प्राप्ति एक इस माह में मिलती है। इस माह में की गयी स्नान, दान, पूजा तथा व्रत से ही तीर्थयात्रा के बराबर शुभ फलों की प्राप्ति हो जाती है। इस माह के महत्व के बारे में स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण आदि प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। कार्तिक माह में किए स्नान का फल, एक सहस्र बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान है।



जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वही फल कार्तिक माह में किसी पवित्र नदी के तट पर स्नान करने से मिलता है। इस माह में अधिक से अधिक जप करना चाहिए ।

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भोजन दिन में एक समय ही करना चाहिए। जो व्यक्ति कार्तिक के पवित्र माह के नियमों का पालन करते हैं, वह वर्ष भर के सभी पापों से मुक्ति पाते हैं।

कार्तिक स्नान (kartik snan vidhi in hindi)

इस माह में पवित्र नदियों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का बहुत अधिक महत्व होता हैं । घर की महिलायें सुबह जल्दी उठ स्नान करती हैं, यह स्नान कुँवारी एवम वैवाहिक दोनों के लिए श्रेष्ठ हैं। छत्तीसगढ़ की लोक परम्परा में कार्तिक मास भर ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों व तालाबो में जाकर स्नान करने की प्राचीन प्रथा है।कार्तिक स्नान का प्रारम्भ शरद पूर्णिमा के दिन से हो जाता है, धर्मशास्त्रो में स्नान का विशेष महत्त्व बताया गया है –
तुला मकर मेषेषु प्रातः स्नानं विधीयते
हविष्यं ब्रह्मचर्यम् च महापातकनाशनम्
जब कार्तिक मास में सूर्य तुला राशि में , माघ मास में सूर्य मकर राशि में तथा वैशाख मास में सूर्य जब मेष राशि का हो तो ब्रह्मचर्य पूर्वक स्नान करने से अनन्त गुना फल की प्राप्ति होती है।
manoj shukla mahamaya mandir raipur
(लेखन संकलन- पंडित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर)
इन मासों में तीर्थों की पूण्य दायिनी गंगा, यमुना आदि महा नदियों में जाकर स्नान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। हमारे नित्य कर्मो में स्नान का विशेष स्थान है। धार्मिक भावना से जुड़े होने के साथ साथ यह आरोग्य व स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। क्योंकि कार्तिक मास तक वर्षा काल समाप्त हो चूका होता है तथा नदियों का जल स्वच्छ हो चुका होता है। साथ ही वर्षा जल के साथ पहाड़ो से बहकर आये औषधीय तत्व इन नदियों के जल में मिल चुके होते है,जो की स्वस्थ्य के लिये उत्तम होते है। अतः कार्तिक मास का स्नान न केवल धार्मिक रूप से बल्कि स्वास्थ्य के लिये भी अति लाभदायक है।

कार्तिक मास में दीपदान (deepdan in kartik month 2017 and get the blessings)

कार्तिक माह में दीप दान का बहुत अधिक महत्व होता हैं । इस दिन पवित्र नदियों में, मंदिरों में, दीप दान किया जाता हैं । साथ ही आकाश में भी दीप छोड़े जाते हैं । यह कार्य शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता हैं ।दीप दान के पीछे का सार यह हैं कि इससे घर में धन आता हैं । कार्तिक में लक्ष्मी जी के लिए दीप जलाया जाता हैं और संकेत दिया जाता हैं अब जीवन में अंधकार दूर होकर प्रकाश देने की कृपा करें । कार्तिक में घर के मंदिर, तुलसीचौरा, गौशाला , कोठी-कोठा , नदी के तट एवम शयन कक्ष में दीपक लगाने का महात्म्य पुराणों में वर्णित हैं ।

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ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के बाद जल में ही भगवान विष्णु के निमित्त दीप दान का भी विशेष महत्त्व है। नदी तालाबो में स्नान करने के बाद दोने आदि में रखकर जल देवता वरुण देवता के नाम से भी उसी नदी तालाबो में भी दीप दान किया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार शंखासूर नामक राक्षस ने वेदों को चुराकर जल में डुबो दिया था जिसे भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वापस लाये थे , इस कारण  भगवान विष्णु के निमित्त जल में दीपदान किया जाता है।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में , कार्तिक मास भर शाम के समय आकाश दीप जलाने की परम्परा आज भी बनी हुई है।
ऐसा कहा जाता है कि पितृपक्ष में अपने पितर लोक को छोड़ कर धरती पर आये हुए पितर देवता ,इसी आकाश दीप की रौशनी से अपना मार्ग देखकर अपने लोक को लौट जाते है।



कार्तिक मास बहुत ही पवित्र माना गया है। इस मास में किये गये स्नान,दान, व्रत-उपवास, गायत्री मन्त्र का जाप, आँवला वृक्ष का पूजन,तुलसी माता के पूजन तथा दीपदान आदि से अनन्त गुना फल की प्राप्ति होती है।

कार्तिक मास में नियम (basic rules to be observed during kartik month 2017)

कार्तिक माह में कई तरह के नियमो का पालन किया जाता है, जिससे मनुष्य के जीवन में त्याग एवम शैयम के भाव उत्पन्न होते हैं .
पुरे माह मॉस, मदिरा आदि व्यसन का त्याग किया जाता हैं । कई लोग प्याज, लहसुन, बैंगन आदि का सेवन भी निषेध मानते हैं ।
इन दिनों फर्श पर सोना उपयुक्त माना जाता हैं कहते हैं इससे मनुष्य का स्वभाव कोमल होता हैं उसमे निहित अहम का भाव खत्म हो जाता हैं ।
कार्तिक में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर तुलसी एवम सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता हैं । काम वासना का विचार इस माह में छोड़ दिया जाता हैं ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता हैं । इस प्रकार पुरे माह नियमो का पालन किया जाता हैं .
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