जैन धर्म : पढि़ए जिंदगी बदलने वाले ये संदेश!

jain dharma : life changing jinvani quotes

आज बदलते वक्त के साथ देश का धार्मिक माहौल भी बदलता जा रहा है। कुछ लोग अपने धर्म का प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से कर रहे हैं। जी हां फेसबुक पर ग्रुप्स में कई लोग धार्मिक पोस्ट से कई जानकारियों से रूबरू करवा रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं, कंचन जैन। कंचन समय-समय पर जैन समाज की लोकहित की बातों को शेयर करके लोगों के मन को शुद्ध करने का काम कर रही हैं। ये संदेश महज संदेश नहीं है, इन्हें जीवन में धारण कर लें तो ये जिंदगी बदलने वाले संदेश होंगे।



यहां पढ़ें जिनवाणी : विशुद्ध वाणी
1-हे मित्र! जो जीव मंदिर में बैठा हो वह धर्म कर रहा हो ये नियत नहीं है और जो घर में बैठा हो वो पाप कर रहा हो ये नियत नही है लेकिन यदि वह घर में बैठ कर भी यदि परिणाम अच्छे कर रहा हो तो मित्र! जब भी आवि होगा वह पुण्य का ही आवि करेगा लेकिन जो मंदिर में बैठ कर भी देख रहा है कि किसको नीचे दिखाना है अपने को ऊंचा दिखाना चाहता है ऐसे परिणाम चल रहे है। तो मित्र! वह मंदिर में दीवाल पर बैठी छिपकली के तुल्य हो जिसको कुछ नहीं दिख रहा है न भगवान न जिनवाणी उसे तो मात्र केवल ये दिख रहा है कि जीव आ जाये तो कब उसका भक्षण करूँ।।

2- हे मित्र!! भूत को देखो भविष्य को देखो तो वर्तमान पवित्र हो जायेगा।।

3- हे जीव!! जैसे शिकारी जंगल में जाल फैलाता है कि खरगोश आदि जीव फंस जाये तो मैं इसका शिकार करूँ ऐसे ही हे युवाओं! जो तुम पर को चहेरे पर लपेट कर आ रहे हो यह व्यभिचार है जो मंदिर में श्रृंगार करके आ रहे हो ये उसी शिकारी के तुल्य है जो जाल फैला कर जीव फंसा रहा है ऐसे तुम दूसरे के शील को भंग करने का जाल फैला रहे हो इसलिए आज से त्याग कर देना कि मंदिर में हिंसक पदार्थों को लगाकर नहीं आएंगे।

4- हे मित्र! शीलवन्तो का श्रृंगार श्रृंगारदानी का श्रृंगार नही है उनका श्रृंगार तो शील का श्रृंगार है।

5- हे मित्र! जो खण्डर थे वे आज महल है और जो आज महल है वे भी कभी खंडर होंगे लेकिन भूमि तो शास्वत है ऐसे ही ये तो वृद्धावस्था पहले युवा अवस्था थी जो युवा अवस्था है उनकी वृद्धवस्था आएगी लेकिन मित्र! द्रव्य तो सास्वत है इसलिए हे ज्ञानियों भूत को देखो भविष्य को देखो तो वर्तमान सुधर जायेगा।

6- हे युवाओं! जो चिंता से रहित है उसी की शिक्षा अच्छी होगी, उसका स्वास्थ ठीक रहेगा इसलिये चिंता करना छोड़ दो तो स्वस्थ रहेगा।

7- हे जीव! वर्तमान यशभूत दिख रहा है वो भूत का पुण्य फलींभूत हो रहा है इसलिये मित्र वर्तमान संभाल लो तो भविष्य सुधर जायेगा।

8- हे मित्र!! यदि नीबू एक बूंद की दूध में गिर जाये तो वह दूध फट जायेगा। ऐसे ही तुमने कितने वर्षो का पुण्य कमाया है ऐसे ही मुमुक्षु!! जो हजारो वर्षो तक साधना की होगी लेकिन तुमने एक क्षण भी किसी के प्रति परिणाम अशुभ कर लिए तो मित्र! उस दूध की भांति तुम्हारा पुण्य फट जायेगा।

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9- हे जीव! संबंध तो पयाज़्य के है लेकिन परिणाम में सम्बन्ध नहीं हैं, पर के चिंता में तू अपने परिणामों का विघात मत करो।

10- हे मित्र! जैसे पानी की बूंद गन्ने में जाये तो मीठा रस देता है और वही बूंद नीम में चली जाये वह कड़वा रस देगा ऐसे ही जो भव्य होगा उसे जिनवाणी की बात अच्छी लगेगी लेकिन जो अभव्य होगा उसे जिनवाणी में और भगवान में दोष दिखेगे।

11- हे जीव! नीर क्षीर में मिल सकता है, लेकिन नीर क्षीर नही है, क्षीर नीर नही है ऐसे ही देह में आत्मा हो सकती है आत्मा देह में हो सकती है लेकिन देह आत्मा नहीं है और आत्मा देह नहीं है।

12- हे मित्र! हमारी समाज का बालक चाहे विदेश पढऩे जाये, चाहे बम्बई जाये, पूना जाये लेकिन वह हॉस्टल में बैठकर भी पानी छान के पिए और अंथऊ करे तो समझ लेना वो जिन धर्म की प्रभावना कर रहा है इसलिये अपने बच्चों को संस्कार दो, संस्कार दो।

13- हे जीव! जीवन तो तुम विदेश में जी सकते हो, लेकिन तुम विदेश में समाधि नहीं कर सकते हो विदेश में भगवान लेकर जा सकते हो लेकिन निग्र्रन्थ गुरु के दर्शन तो भारत की भूमि पर ही होगा।

। जो है सो है।

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