ईसाई धर्म: कब्रिस्तान में इसलिए शुरु हो रही यह अजीब परंपरा

isai dharm : christian peoples problems for cremation land

कोटा. आज के आधुनिक युग में ईसाई धर्म के लिए अनोखा संकट पैदा होता नजर आ रहा है। ईसाई धर्म के लोगों के मरने के बाद कब्रिस्तान नसीब नहीं हो रहे है। इसके लिए कई लोग जीते-जी अपने लिए कब्रिस्तान की बुकिंग करवा रहे है। कब्रिस्तान के संकट का यह वाक्या धार्मिक संकट के तौर पर भी देखा जा रहा है। धार्मिक संकट इसलिए क्योंकि कब्रिस्तान का संकट होने से ईसाई धर्म के लोग धार्मिक परंपराओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि ईसाई धर्म के लोग अब जीते-जी कब्रिस्तान के लिए बुकिंग करवा रहे है।



फिलहाल यह अजीब परंपरा शुरु होने का मामला राजस्थान के कोटा शहर में देखने को मिला है। दरअसल यहां ईसाई कब्रिस्तानों की जगह लगभग समाप्त हो गई है। कोटा शहर में ईसाई धर्म के लोगों की तदात करीब 10 हजार परिवार है। समय के साथ इन परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बढ़ती जा रही समाज के लोगों की संख्या के मुताबिक कब्रिस्तान की जमीनें नहीं मिली। इस वजह से समाज के लोगों के लिए धार्मिक रिवाजों का पालन और परंपरा निभाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। धर्म के अस्तित्व को बचाने की जंग में समाज के लोगों ने अजीब परंपरा विकसित की है, जिसमें कब्रिस्तान की बुकिंग करवा रहे है।

100 साल पुराना कब्रिस्तान
कोटा में अंग्रेजों के समय का 100 साल पुराना कब्रिस्तान है। कोटा के ईसाई धर्म के लोगों को सन् 1921 के बाद से कब्रिस्तान के लिए जमीन नहीं मिली। इस वजह से लोग जीते-जी अपने लिए कब्रिस्तान की बुकिंग करवा रहे है। हाल ही में समाज के कुछ लोगों ने कब्रिस्तान जमीन के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी। तत्कालिक कलेक्टर आरएस
गठाला ने जमीन देने के लिए रायपुरा फोरलेन की जगह देखी, मगर कलेक्टर की तबादला होने के बाद समाज के लोगों के निराशा ही मिली।

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