बाबा रामदेव ने गंगोत्री की इस गुफा में सीखा था योग

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दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ाने वाले बाबा रामदेव ने गंगोत्री में योग की शिक्षा पाई। रामदेव ने सोहम गुफा, गौरीकुंड, श्री कृष्ण आश्रम, गंगाबाग व अन्य क्षेत्रों में साल 1992 से 1994 तक रहकर ज्ञान पाया।

उन्होंने योग की शिक्षा भी यहीं से पाई। इन जगहों पर कठोर साधना करके बाबा योग में परिपक्व हुए। बाबा रामदेव ने योग सीखने के बाद योग को गुफाओं से बाहर निकालने का निर्णय लिया और योग आज देशभर में कई जगहों पर पहुंचा। आज पूरी दुनिया धूमधाम से भारत के साथ योग दिवस मनाने में जुटी हुई है। आज योग को एक बार फिर वही सम्मान प्राप्त हूआ है। 193 देशों में योग होता है।



बाबा रामदेव ने योग के ही बल पर आचार्य बालकृष्ण के सहयोग से आयुर्वेद को अंग्रेजी दवाओं की टक्कर में बाजार में ला दिया। बाबा रामदेव का नाम रामकिशन यादव है। वे हरियाणा के महेंद्रगढ़ में 1965 पैदा हुए थे। पिता का नाम रामनिवास यादव और मां गुलाबो देवी थीं।

बाबा रामदेव ने सालों तक कठोर मेहनत की
श्री कृष्ण आश्रम के महंत ब्रम्हचारी आत्मस्वरुप का कहना है, कि बाबा ने योग सीखने के लिए सालों तक कठोर मेहनत की है। गंगा का जन्म स्थल योग की दिव्य ज्योति का आभास कराता है, यह आभास स्वामी रामदेव ने भांप लिया और वे योग की सभी विधाओं में पारंगत हो गए। योग के सीखने के लिए बाबा रामदेव ने दिन-रात एक कर दिया था। महंत कहते हैं, गंगोत्री में आम दिनों में भी योग की महत्ता बेहद खास है।

किताबों से भी लिया योग का ज्ञान
बाबा रामदेव को किताबें पढ़ने का भी शौक है। उन्होंने योग सीखने के लिए कई किताबें पढ़ी। एक किताब में उन्होंने पढ़ा कि योग से मन और तन पर काबू पा सकते हैं।



तब से वे योग में रम गए और उन्होंने बचपन में हुए पैरालिसिस पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद योग की शिक्षा उन्होंने दूसरों को भी दी।

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