गुस्से में भगवान शिव ने इस जगह काटा था गणेशजी का सिर, आज भी हैं कटा शरीर!

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(real story of devlok patal bhuvaneshwar cave temple history in hindi)

पिथौरागढ़. हिंदू धर्म की पौराणिक कथा हैं, जिसमें गुस्से में भगवान शंकर द्वारा गणेशजी का सिर काटने का जिक्र हैं। जी हां इस सच्ची कहानी के सबूत आज भी हिमालय की दुर्गम वादियों में आप देख सकते हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा में मंदिर हैं, जिसमें आज भी भगवान गणेश के शरीर के दर्शन कर सकते हैं। पुजारी नीलम भंडारी के अनुसार इनका परिवार कई पुश्तों से इस मंदिर में भगवान की आराधना कर रहा हैं।



मुख्य सडक़ मार्ग से कठिन पहाडिय़ों पर 3 से 4 दिन का समय पैदल चलकर पहुंचते हैं। इसके बाद इस मंदिर के दर्शन होते हैं।

माता पार्वती से मिलने गए शंकर भगवान को इसलिए रोका था

पौराणिक कथा हैं, जिसमें कहा गया हैं कि माता पार्वती से मिलने के लिए भगवान शंकर गुफा में प्रवेश कर रहे थे, लेकिन माता के पहरेदार बने भगवान गणेशजी ने शिवजी को रोका तो गुस्से में भगवान शिव ने गणेश जी की गर्दन काट दी थी।

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इसके बाद मां पार्वती की जिद पर भगवान गणेश का जिंंदा किया और उनको हाथी का सिर इसी गुफा में लगवाया गया था। यह कथा स्कंद पुराण के मानस खंड में 103 अध्याय में भी बताई गई हैं।

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यहां दर्शन मात्र से पूरी होती जीवन की हर कामना

पुजारी के अनुसार यहां दर्शन करना बेहद कठिन काम हैं। यह गुफा बेहद जंगली और पहाड़ी क्षेत्र में हैं। गुफा में अंदर जाने का रास्ता भी सिर्फ 3 फिट चौड़ा और 4 फीट लंबे आकार का होने से ऑक्सीजन की बेहद कमी होती हैं, जिससे अंदर जाना और यहां रुककर दर्शन करना आसान नहीं हैं। कहा जात हैं कि इस गुफा का अयोध्या के राजा ऋतुपर्णा ने 4720 ईसापूर्व में पता लगाया था। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे।

 

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