गोपाष्टमी: गौ माता द्वापर युग से देती आ रही हैं यह फायदे

gopashtami
(gopashtami katha puja and importance in hindi)
गोपाष्टमी महोत्सव गोवर्धन पर्वत से जुडा उत्सव है । गोवर्धन पर्वत को द्वापर युग में भगवान् श्री कृष्ण ने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक गाय व् सभी गोप-गोपियों की रक्षा के लिए अपनी एक उंगली पर धारण किया था । गोवर्धन पर्वत को धारण करते समय गोप-गोपिकाओं ने अपनी- अपनी लाठियों का भी टेका दे रखा था। जिसका उन्हें अहंकार हो गया की हम लोग ही गोवर्धन को धारण किये हुए हैं ।



उनके अहम् को दूर करने के लिए भगवान् ने अपनी ऊँगली थोड़ी तिरछी की तो पर्वत नीचे आने लगा । तब सभीने एक साथ शरणागति की पुकार लगाई और भगवान् ने पर्वत को फिर से थाम लिया ।

गोमाता को परमात्मा का साक्षात् विग्रह जान कर उनको प्रणाम करने का मन्त्र (महर्षि वसिष्ठ द्वारा उपदिष्ट) – (gaay puja mantra)

यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
सुरूपा बहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः।
गावो मामुपतिष्ठन्तामिति नित्यं प्रकीर्तयेत्॥

गोमाता की स्तुति: (gau mata mantra in hindi)

नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नम:।
गवां बीजस्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।
नमो राधाप्रियायै च पद्मांशायै नमो नम:।
नम: कृष्णप्रियायै च गवां मात्रे नमो नम:।।



कल्पवृक्षस्वरूपायै सर्वेषां सततं परे।
श्रीदायै धनदायै बुद्धिदायै नमो नम:।।
शुभदायै प्रसन्नायै गोप्रदायै नमो नम:।
यशोदायै कीर्तिदायै धर्मदायै नमो नम:।।
(देवीभागवत ९।४९।२४-२७)

गोबर और गोमूत्र के गुण (amazing benefits of cow in hindi)

• गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका मल-मूत्र न केवल गुणकारी, बल्कि पवित्र भी माना गया हैं।
• गोबर में लक्ष्मी का वास होने से इसे ‘गोवर’ अर्थात गौ का वरदान कहा जाना ज़्यादा उचित होगा।
• गोबर से लीपे जाने पर ही भूमि यज्ञ के लिए उपयुक्त होती है।
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(लेखन संकलन- पंडित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर)
• गोबर से बने उपलों का यज्ञशाला और रसोई घर, दोनों जगह प्रयोग होता है।
• गोबर के उपलों से बनी राख खेती के लिए अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।
• गोबर की खाद से फ़सल अच्छी होती है और सब्जी, फल, अनाज के प्राकृतिक तत्वों का संरक्षण भी होता है।
• आयुर्वेद के अनुसार, गोबर हैजा और मलेरिया के कीटाणुओं को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है।
• आयुर्वेद में गौमूत्र अनेक असाध्य रोगों की चिकित्सा में उपयोगी माना गया है।
• लिवर की बीमारियों की यह अमोघ औषधि है। पेट की बीमारियों, चर्म रोग, बवासीर, जुकाम, जोड़ों के दर्द, हृदय रोग की चिकित्सा में गोमूत्र ने आश्चर्यजनक लाभ दिया है। इसके विधिवत सेवन से मोटापा और कोलेस्ट्राल भी कम होते देखा गया है।
• गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र से निर्मित पंचगण्य तन-मन और आत्मा को शुद्ध कर देता है।

• तनाव और प्रदूषण से भरे इस वातावरण की शुद्धि में गाय की भूमिका समझ लेने के बाद हमें गो धन की रक्षा में पूरी तत्परता से जुट जाना चाहिए, क्योंकि तभी गोविंद-गोपाल की पूजा सार्थक होगी।
• गोपाष्टमी के पर्व का मूल उद्देश्य है गो-संवर्धन की तरफ हमारा ध्यान आकृष्ट करना। अतएव इस त्योहार की प्रासंगिकता आज की युग में और बढ़ी है।
बोलिये वृन्दावन बिहारी लाल की जय ।
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