सौभाग्यशाली गजकेसरी योग

गुरु से बनने वाला योग गजकेसरी योग gajkesari-yog-hindi

ज्योतिष में माना जाता है की एक अकेला गुरु अच्छी स्थिति में हो तो सभी ग्रहों की बुराई समाप्त करने की ताकत रखता है… सबसे प्रमुख योगो में गुरु से बनने वाला योग गजकेसरी योग माना जाता है… गजकेसरी योग एक बहुत ही शुभ योग माना जाता है, जो गुरु और चंद्र के योग से बनता है… जातक की कुंडली के किसी भी भाव में गुरु व चंद्रमा की युति हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि उन पर न पड़ रही हो या कोई पाप ग्रह उनके साथ न हो तो यह योग बहुत शुभफलदायी माना जाता है.. प्रभावकारी गजकेसरी योग का निर्माण गुरु की चंद्रमा पर पांचवी या नवीं दृष्टि से भी बनता है…

यदि गुरु और चंद्रमा कर्क राशि में एक साथ हों और कोई अशुभ ग्रह इन्हें न देख रहा हो तो ऐसे में यह बहुत ही सौभाग्यशाली गजकेसरी योग बनाते हैं.. गजकेसरी योग होने से व्यक्ति साहस व सूझबूझ के दम पर, उच्च पद व प्रतिष्ठा प्राप्त कर समाज में सम्मानीय होता है… गजकेसरी योग में उत्पन्न जातक शत्रुहन्ता, वाकपटु, राजसी सुख एवं गुणों से युक्त, दीर्घजीवी, कुशाग्रबुद्धि, तेजस्वी एवं यशस्वी होता है… किसी कुंडली में वास्तव में गज केसरी योग बन जाने पर भी इस योग से जुड़े सभी उत्तम फल जातक कों मिल हीं जाएं, ऐसा आवश्यक नहीं क्योंकि विभिन्न कुंडलियों में बनने वाला गज केसरी योग कुंडलियों में उपस्थित अनेक तथ्यों तथा संयोगो के कारण भिन्न भिन्न प्रकार के फल दे सकता है…



अगर कुंडली में जग केसरी योग बन रहा हो और फल ना दे पा रहा हो तो गुरु की सेवा करना, पीले वस्त्र, पुष्प, पीले पदार्थ, फल का दान करना जगतगुरु श्री कृष्ण की पूजा करना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना गुरु वार का व्रत करना बड़ो को हमेशा आदर देना और सत्य तथा सुचिता का पालन करना चाहिए इससे गुरु के शुभ फल प्राप्त होते है…

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