त्रिनेत्र गणेशजी का दुनिया का पहला मंदिर, यहां इस 1 काम से दूर होते हैं सारे विघ्न!

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रणथंभौर. जिंदगी के हर दुख हरने वाले भगवान गणेश की पूजा के लिए बुधवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा करने भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। अगर यह पूजा भगवान गणेश के मंदिर में की जाए तो और भी अच्छा है।
आज हम आपको भगवान गणेश के चमत्कारी मंदिर की कहानी बताने जा रहे है।
राजस्थान के रणथंभौर में भगवान गणेश का चमत्कारी मंदिर हैं।




मंदिर में भगवान गणेश स्वयं प्रकट हुए थे। यहां भक्त शुभ काम से पहले भगवान को चि_ी पहुंचाकर निमंत्रण देते हैं, फिर भगवान आर्शीवाद प्रदान करते हैं। वाट््सएप और फेसबुक के जमाने में आज भी भक्त पूरे मन से यहां पत्र लिखते हैं। मंदिर में इस तरह के निमंत्रणों का अंबार लगा हुआ है।

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यहां है तीन नेत्र वाले गणेश जी
मंदिर में दुनिया के अनोखे तीन आंखों वाले भगवान गणेश विराजमान है। तीन नेत्र वाले भगवान गणेश का पूरे संसार में एक ही मंदिर है। यहां भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि और अपने पुत्र शुभ और लाभ के साथ दर्शन देते हैं। भगवान गणेश का वाहन चूहा भी उनकी सेवा में रहता हैं।

यह है इतिहास
भगवान श्री कृष्ण का विवाह होने वाला था, तब भगवान गणेश को निमंत्रण नहीं दिया। भगवान कृष्ण को लगा था, कि गणेशजी बहुत मोटे हैं, इसलिए ज्यादा भोजन करेंगे, इसलिए उन्हें न बुलाया जाए। गणेश जी ने अपनी सवारी मूशक को कृष्ण भगवान के रथ के रास्ते में छोड़ दिया। मूशक ने पूरे रास्ते को खोद दिया और कृष्ण भगवान का रथ वहीं धंस गया। तब पता लगा कि भगवान गणेश ने किया तो सभी भगवान गणेश के पास आए। तब भगवान गणेश ने यह शर्त रखी कि किसी भी शुभ काम का निमंत्रण सबसे पहले दिया जाए। त्रिनेत्र गणेश को निमंत्रण देने से सभी काम शुभ होते हैं। यहां सभी निमंत्रण पुजारी भगवान गणेश को सुनाते हैं। कोई पत्र दूसरी भाषा का हो, उसे पुजारी नहीं पढ़ पाएं तो वे भगवान के आगे रख देते हैं।
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भगवान गणेश आए और बोले

सवाई माधौपुर से करीब 10 किमी दूर स्थित त्रिनेत्र गणेश का मंदिर है। बताया जाता है कि सन 1299 में यहां राजा हमीर और अलाउद्दीन खिलजी के बीच युद्ध छिड़ गया। यह युद्ध कई सालों तक चला। भोजन भंडार भी खाली होने लगा। तभी एक रात राजा के सपने में भगवान गणेश आए और बोले सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। कहते हैं अगले ही दिन तीन आंखों वाले भगवान गणेश किले की दीवार पर उभर आए। फिर राजा ने मंदिर बनवाया। यहां सच्ची आस्था के साथ जो भी आता है, उसे भगवान गणेश ज्ञान, बुद्धि आर्शीवाद प्रदान करते हैं।

ऐसे पहुंचे मंदिर
जिला सवाय माधोपुर में बने रणथम्भौर में जाएं। यहां से दो किमी की पहाड़ी चढ़कर मंदिर में पैदल जाना होगा। इसके बाद यहां दर्शन करें।

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