आदि शंकराचार्य: वेदों व उपनिषदों का ज्ञान और दर्शन व तीर्थ भ्रमण से जोड़ा देश

famous hindu saints adi shankaracharya biography in hindi

भारतीय धर्म और दर्शन को देश ही नहीं विदेशों में भी सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचाने वाले संत आदि शंकराचार्य ने वेदों व उपनिषदों का ज्ञान और दर्शन व तीर्थ भ्रमण से जोड़ा देश था। संत आदि शंकराचार्य के जन्म को लेकर कई भ्रांतियां आज भी हैं। इतिहासकारों की मानें तो संत आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ था। वहीं इतिहास के दस्तावेजों में युधिष्ठिर संवत 2631 में होना बताया गया है। 2 साल की उम्र में लिया था यह ज्ञान संत आदि शंकराचार्य ने अपनी 2 साल की आयु में काफी ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इसके बाद उन्होंने सन्यास लेने का फैसला लिया था, लेकिन मां ने रोकने की कोशिष की और नारद मुनि से जुड़ी कथा सुनाई। इसमें नारदजी की आयु 5 साल थी, उस समय अपने स्वामी की अतिथिशाला के मुंह से हरिकथा सुनकर सिर्फ और सिर्फ हरि से मिलने का प्रण ले लिया था, मगर मां का प्रेम के कारण घर से जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

चार वर्णों से चार शिष्य

famous hindu saints adi shankaracharya biography in hindiआदि शंकराचार्य के चार वर्णों के चार शिष्य थे। पहले पद्मपाद, दूसरे हस्तामलक, तीसरे मंडन मिश्र और चोथे तोटक (तोटकाचार्य)। शंकराचार्य के दो गुरु थे। आदि शंकराचार्य गौडपादाचार्य और गोविंदपादाचार्य के शिष्य के रूप में भी जाने जाते है। आदि शंकराचार्य का स्थान संसार के महान दार्शनिकों में सबसे ऊपर लिया जाते हैं। आदि शंकराचार्य ने एक ब्रम्हा वाक्य का प्रचार किया था, उन्होंने कहा, ब्रह्म ही सत्य है और जगत माया। आत्मा की रफ्तार मोक्ष में निहित है।

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