राजिम कुंभ में सतपाल जी महाराज ने कहा, ऐसे घोषित होगा भारत हिंदू राष्ट्र और बनेगा विश्व गुरु

satpal ji maharaj minister
राजिम. राजनीति के साथ धर्म में भी बड़ी भागीदारी निभाने वाले सतपाल जी महाराज (उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री ) ने राजिम कल्प कुंभ 2018 में धर्म कथाएं डॉट कॉम से सौजन्य भेंट कर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भगवान राजीव लोचन की नगरी राजिम में महापर्व कुंभ मनाना, बड़ी प्रसन्नता की बात है।
कुंभ में सद्भावना सत्संग समारोह हो रहा है, यह इस बात की प्रेरणा देता है, कि हमें अपना हृदय परिवर्तन करना है। अगर हम युग परिवर्तन चाहते हैं, तो उसके लिए हमें आसमान को नहीं बदलना, मिट्टी को नहीं बदलना, पानी को नहीं बदलना, हवा को नहीं बदलना बल्कि मानव के मन को बदलना है। जब मानव के मन को बदलना है, हृदय परिवर्तन होगा तब युग परिवर्तन होगा। आइए हमारे प्रधानमंत्री जी जो चाहते है, भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प है उसे पूरा करें। भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए आध्यात्म की शक्ति को प्रकट करें। आध्यात्म की शक्ति से ही भारत विश्व गुरु बनेगा।

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आप हर बार राजिम कुंभ में आते हैं, इस बार  कैसा लगा?

राजिम से मेरा गहरा नाता है। बड़े लंबे अर्से से में यहां आ रहा हूं। यह बहुत बड़ा महापर्व है। हमारे लिए जहां हमारी आस्था है, वही हमारे लिए गंगा है। जो लोग यहां से हरिद्वार नहीं जा सकते है, आज वे यहां गोता लगाते हैं। मुझे यहां आकर मॉरिशियस की याद आती है, कि गिरबिटिया समाज के लोग वहां रहते थे, गंगा के प्रति उनकी बड़ी श्रद्धा रहती थी, उन्होंने वहां गंगा तालाब बनाया। उसमें स्नान करते थे। लोगों की आस्था है, इसलिए वे यहां गंगा स्नान करते हैं। हम तो उस देश के वासी हैं, जहां गंगा हर जगह बहती हैं। यह बड़ा महत्व है। गंगा, गाय और भारत का एक ही नाता है। हमारी आस्था मजबूत होगी तभी देश मजबूत होगा।



आप कैबिनेट मंत्री भी हैं और साथ में संत भी हैं, दोनों का आप सामनजस्य कैसे बनाते हैं?

अगर संत कैबिनेट मिनिस्टर बन गया तो सबका भला होगा। यह हमारी मान्यता है कि संत न होते जगत में तो जल मरता संसार। आग लगी आकाश में झरझर पड़े अंगार। संतों की हमेशा प्रवृत्ति रही है।
उन्होंने कहा कि मैं धमस्व, सिंचाई विभाग और पर्यटन को देख रहा हंू। उसमें हमने धर्म को बढ़ावा दिया है, जितने मंदिर भगवती, शिवजी, भगवान विष्णु, नव ग्रह, नाग राज आदि भगवान के मंदिरों का एक सर्किट बनाया है। ताकि हमारे उत्तराखंड में पर्यटक यात्रा करके अपने आप को धन्य माने।

भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग लगातार की जा रही हैं, आप क्या सोचते हैं ?

मेरा मानना है कि यह जनमत का काम है। जनता की जो आकांशाएं होंगी वह पूरी हों। सबसे पहली बात यह है कि जो राष्ट्र का चरित्र है, संस्कार है वह हममे आना चाहिए, तभी हम एक राष्ट्र बन सकते हैं। उन संस्कारों पर चलना बहुत जरुरी है, उन आस्थाओं का प्रकट होना बहुत जरुरी है और मैं यह समझता हूं कि भारत में यह चीज हो रही है।

आपके सत्संग समारोह में बहुत भीड़ हैं, कहां-कहां से श्रद्धालु आए है…

अधिकांश श्रद्धालु छत्तीसगढ़ से ही हैं, हम यह कार्यक्रम यहीं के लिए करते हैं। बहुत थोड़ी संख्या में नागपुर और गुजरात से भी श्रद्धालु आए हैं। ज्यादातर हमारे छत्तीसगढ़ के शिष्य लोगों के लिए यह कार्यक्रम करते हैं। हम चाहते हैं कि निर्धन से निर्धन व्यक्ति भी सत्संग की गंगा में सम्मिलित होकर के अपना कल्याण करे।

हम नदियों को मां के रुप में पूजते हैं, कुछ नदियां प्रदूषित हैं, आप क्या सोचते हैं…

नदियों का प्रदूषण कम होना चाहिए। सभी नदियां साफ होनी चाहिए। नमामी गंगे के तहत हम लोग गंगाजी को साफ कर रहे हैं। पानी में भी जीव-जंतु रहते हैं, वे भी प्रदूषित होते हैं। लोग गंगा का आचमन लेते हैं। जल प्रदूषित होगा तो प्रदूषण कहीं न कहीं आम आदमी को प्रभावित करेगा। नदियां देश का तंत्रिका तंत्र हैं, इनका स्वच्छ रहना देश के लिए बड़ा आवश्यक है।

हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति को खत्म करने की सजिश पर आप कुछ टिप्पणी दें?

हिंदू धर्म पर बड़े आक्रमण हुए। कई प्रकार की की क्रूरताएं की गई, लेकिन कोई अंत नहीं हुआ। सनातन का अर्थ ही यही होता है कि जिसका कोई आदि अंत न हो।
ऋषि मुनियों की यही भावना थी, सर्वे भवंतु सुखीन: सर्वे भवंतु कल्याण। सभी सुखी रहें और सभी का कल्याण हो। सारे जगत का कल्याण हो। यह हमारे ऋषियों की ही भावना है, जो प्रकट हुई है। हमारे महापुरुष कहते है जो धर्म की रक्षा करता हैं, धर्म उनकी भी रक्षा करता है।
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