Dhanteras2017 के दिन इस मुहूर्त में करें खरीदी, बरकत के साथ आपका धन होगा 13 गुणा, पढ़ें सच्ची कथा

dhanteras 2017

(dhanteras 2017 puja shubh muhurat on diwali in india)

दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार मनाया जाता हैं। इस दिन खरीदारी करना शुभ होता हैं और मान्यता हैं कि धनतेरस पर धातु खरीदने से भगवान धन्वंतरी प्रसन्न होते हैं और पूरे साल बरकत रहती हैं। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजन से भाग्योदय होता हैं। शास्त्रों में कहा गया हैं कि इसी दिन भगवान धन्वंतरी का जन्म हुआ था, इसलिए धनतेरस त्योहार मनाया जाता हैं।



धन्वंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इस वजह से इस दिन धातु खरीदने की प्रथा हैं। धनतेरस तेहर गुणा करने वाला त्योहार कहा जाता हैं।

धनतेरस पर इस समय यह खरीदें (dhanteras 2017 shopping muhurat and choghadiya)

-वाहन खरीदने के लिए धनतेरस के दिन 12 बजे तक खरीद लेंवे।
-सुबह 9 बजे से 2 बजकर 40 मिनट तक इलेक्ट्रानिक उत्पाद और गैजेट खरीदने लिए है।

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-शाम 5.30 तक बर्तन, स्वर्ण आभूषण, गिफ्ट आइटम, खिलोनें और कपड़े खरीदने का शुभ समय है।
-घरेलू सामग्री खरीदने के लिए 7.30 बजे तक का समय उपयुक्त कहा गया है।

तब हुआ था धनतेरस पर 13 गुना (dhanteras vrat and puja katha in hindi)

एक समय की कथा हैं, जब कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य को प्रभावित करने से भगवान विष्णु ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था।

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राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे। शुक्राचार्य ने वामन रुप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया। राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। वामन साक्षात भगवान विष्णु हैं। वो देवताओं की सहायता के लिए तुमसे सब कुछ छीनने आए हैं।

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मगर बलि ने बात नहीं मानी। वामन को तीन पग जमीन दान करने कमंडल में जल ले संकल्प लेने लगे। बलि को रोकने शुक्राचार्य कमंडल में लघु रुप लेकर प्रवेश कर गए और जल निकलने का रास्ता बंद कर दिया। वामन भगवान इस चाल को भांप गए। कुशा को कमंडल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। शुक्राचार्य छटपटाकर कमंडल से बाहर हो गए। बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी।

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इधर वामन भगवान ने एक पैर से पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग से अंतरिक्ष को। तीसरे पग रखने के लिए जगह नहीं थी। तो बलि ने अपना सिर वामन भगवान को चरण रखने के लिए दिया था।



बलि दान में सब गवां चुका था। बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उसे कई गुना धन संपत्ति देवताओं को प्राप्त हो गई। इसी खुशी में धनतेरस त्योहार मनाया जाता हैं।

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ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वा पिवा. य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्माभ्यन्तर:

 

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