मां लक्ष्मी के इस मंदिर में दिवाली बाद प्रसाद में देते हैं सोने के जेवर, पहले करना होता है यह 1 काम!

mahalaxmi mandir ratlam

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रतलाम. आपने भगवान के मंदिरों में रुपए-पैसे, जेवर भेंट करते तो भक्तों को देखा ही होगा। हमारे देश मेें एक ऐसा महालक्ष्मी मंदिर हैं, जहां दिवाली की पूजा के बाद भक्तों को प्रसाद में सोने-चांदी के जेवर दिए जाते हैं।
जी हां, हम बात कर रहे हैं, मध्यप्रदेश के रतलाम शहर के माणकचौक पर स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर की। जहां सालों से यही परंपरा चली आ रही हैं। मां लक्ष्मी जी के मंदिर को दिपावली पूजन से पूर्व नोट, जेवर, आभुषणों से सजाया जाता हैं। मंदिर में करीब 100 करोड़ रुपए मूल्य के नोट और गहनों के साथ दिपावली की पूजन की जाती हैं।



महालक्ष्मी माता की पूजन में करीब 1100 से अधिक भक्त हिस्सा लेते हैं। दिपोत्सव के अंतिम दिन भाईदूज की पूजन के बाद भक्तों को प्रसाद के रुप में जेवर दिए जाते हैं।

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यह है प्रसाद में जेवर देने की कहानी (ratlam mahalaxmi temple amazing story on diwali puja)

रतलाम के करीब 350 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर को चमत्कारिक माना जाता हैं। दिपोत्सव के पहले यहां भक्त अपने सभी नोट, आभुषण, जेवर मंदिर में जमा करवाते हैं, इन्हें माता के चरणों में रखकर दिपावली की पूजन की जाती हैं। दिपोत्सव पूजा के बाद धन वैभव और प्रसाद के रुप में लोगों को अपने आभुषण, नोट, जेवर आदि दे दिए जाते हैं।

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इनकी बकायदा मंदिर समिति रजिस्टर में एंट्री करती हैं, जिस भक्त ने जितने आभुषण-नोट जमा कवाए वे उन्हें वापस दिए जाते हैं। लोगों की ऐसी आस्था हैं कि मां महालक्ष्मी की पूजन के बाद यहां से लेकर जाया गया धन पूरे साल घर में बरकत देता हैं। पुजारी पंडित संजय बताते हैं कि यह सिलसिला सालों से चल रहा हैं।

भक्तों को दिया जाता हैं एक टोकन (mahalaxmi temple ratlam madhya pradesh)

जो भी भक्त यहां अपने नोट, जेवर जमा करवाते हैं, उन्हें एक टोकन दिया जाता हैं। इसके साथ ही भक्त का नाम व पहचान, पता मंदिर के रजिस्टर में लिखा जाता हैं।



बड़ी बात यह हैं कि यहां रखे गए नोटों की कोई गिनती नहीं होती और न हीं रखते समय गिने जाते हैं और न ले जाते समय गिने जाते हैं। सभी भक्त मां लक्ष्मी के चरणों में अपने नोट व जेवर रखकर पूजन में शामिल करते हैं। भाईदूज के दिन टोकन देकर अपना पैसा और जेवर ले जाते हैं।

मां लक्ष्मी पूजन के लिए 3 शुभ मुहुर्त (lakshmi puja 2017 shubh muhurat time in hindi)

प्रदोष काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त – 19.11 से 20.16

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मुहूर्त का समय- 1घंटा 5 मिनट
प्रदोष काल- 17.43 से 20.16
वृषभ काल- 19.11 से 21.06

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चौघडिय़ा पूजा मुहूर्त
प्रात: काल मुहूर्त (शुभ) -06.28 से 07.53
प्रात: काल मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- 10.41 से 14.55
सायंकाल मुहूर्त (अमृत, चर) 16.19 से 20.55
रात्रि मुहूर्त (लाभ)- 24.06 +(20 अक्टूबर 2017 को 00.06) से 24.41 +(20 अक्टूबर 2017 को 00.41)



महानिशिता काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त -23.40 से 24.31 +(20 अक्टूबर 2017 को 00.31) (स्थिर लग्र के बिना)
मुहूर्त का समय- 0घंटा 51 मिनट
महानिशिता काल- 23.40 से 24.31 +(20 अक्टूबर 2017 को 00.31)
सिंह काल -25.41 +(20 अक्टूबर 2017 को 01.41) से 27.59+(20 अक्टूबर 2017 को 03.59)

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र (maa laxmi ji ko prasann karne ka mantra in hindi)

ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वा पिवा. य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्माभ्यन्तर:

 

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