36 वर्ष बाद पड़ रहा यह चन्द्र ग्रहण, करें राशि अनुसार ये चीजें दान

chandra grahan kaise hota hai in hindi

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31 जनवरी 2018, बुधवार को माघ पूर्णिमा मनाई जाएगी। अगली बार 31 दिसम्बर 2028 को पड़ेगा. यह 2018 का पहला ग्रहण होगा। इसका संयोग दुर्लभ है और कई वर्षों के अंतराल पर यह घटनाक्रम देखने को मिलेगा. इस घटनाक्रम की एक विशेषता यह भी है कि चन्द्रग्रहण के बावजूद चांद पूरी तरह काला दिखाई देने के बजाय तांबे के रंग जैसा दिखाई पड़ेगा. क्योंकि इस बार कर्क राशि पर ग्रहण है जिसके कारण चाँद काला नहीं दिखाई देगा.

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माघ पूर्णिमा का समय magha purnima 2018 date

पूर्णिमा तिथि आरंभ = 30 जनवरी 2018, मंगलवार 22:22 बजे।



पूर्णिमा तिथि समाप्त = 31 जनवरी 2018, बुधवार 18:56 बजे।

पुष्य नक्षत्र का समय pushya nakshatra 2018 in hindi

पुष्य नक्षत्र आरंभ = 30 जनवरी 2018, मंगलवार 20:18 बजे।

पुष्य नक्षत्र समाप्त = 31 जनवरी 2018, बुधवार 17:36 बजे।

31 जनवरी 2018 को है माघ पूर्णिमा, व्रत की कथा एवं इतिहास 

हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा का कार्तिक पूर्णिमा जैसा महत्व है। वर्ष 2018 का माघ पूर्णिमा बुधवार 31 जनवरी 2018 को मनाई जाएगी। वैसे तो वर्ष के प्रत्येक माह की पूर्णिमा का महत्व है परन्तु माघ पूर्णिमा की बात भिन्न है। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों तथा सरोवरों या संभव हो तो संगम में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के सारे पाप कट जाते है तथा व्यक्ति की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

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माघ पूर्णिमा की कथा magh purnima vrat katha in hindi

प्राचीन समय में एक बार कान्तिका नगरी में धनेश्वर नामक एक ब्राह्मण रहता था। ब्राह्मण हमेशा दुखी रहता था क्योकि वह निः संतान था। ब्राह्मण धनेश्वर ने बहुत जतन किया परन्तु उनकी पत्नी रूपमती से कोई संतान की उत्पति नही हुई। ब्राह्मण प्रतिदिन भिक्षा के लिए दूसरे गाँव जाया करता था। एक दिन जब भिक्षा के लिए एक यजमान के घर पधारे तो यजमान ने भिक्षा देने से इनकार कर दिया। यजमान ने कहा की क्षमा करे, ब्राह्मण देव पर मैं आपको भिक्षा नही दे सकता हूँ क्योकि आपकी कोई संतान नही है तथा मैं निः संतान को दान या भिक्षा प्रदान नही कर सकता हूँ। क्षमा करे, ब्राह्मण देव। परन्तु मैं आपको संतान प्राप्ति के लिए एक माध्यम देता हूँ।



माँ चन्द्रिका देवी अर्थात माँ काली की पूजा तथा उपवास करे। आपको अवश्य पुत्र की प्राप्ति होगी। धनेश्वर ब्राह्मण तथा उसकी पत्नी रूपमती ने माँ काली की श्रद्धा और निष्ठा से भक्ति किया जिससे माँ काली प्रसन्न हो दोनों को दर्शन देकर वर दिया की निकट भविष्य में तुम्हे संतान प्राप्ति होगी। कुछ समय के पश्चात ब्राह्मण धनेश्वर को संतान की प्राप्ति हुई।

माघ पूर्णिमा पूजन विधि

माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है जिसे सतनारायण पूजा भी कहते है। इस दिन उपासक को भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, पान, सुपारी, दूर्वा तथा प्रसाद में चूरमा से किया जाता है। भगवान विष्णु व्रती के विधि-विधान से सम्पन्न किये गए पूजा को स्वीकार करते है। पूजन समाप्ति के समय भगवान विष्णु से परिवार के सुख, शांति और मंगल की कामना करे। भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से व्रती का सदैव मंगल होता है।

माघ पूर्णिमा का महत्व importance of magh purnima in hindi

माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करना चाहिए। इस दिन गंगा, यमुना तथा पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पाप का नाश होता है और अमोघ फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रो में उल्लेख है की जो मनुष्य स्वर्ग की अभिलाषा करते है तथा स्वर्ग में अत्यधिक समय तक सुख का आनंद पाना चाहते है। उन्हें माघ पूर्णिमा के दिन (जब सूर्य मकर राशि में होते है) पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इससे मनुष्य की आकांक्षा पूरी होती है।

सूतक काल में किए जाने वाले कार्य 

सूतक के समय तथा ग्रहण के समय दान तथा जापादि का महत्व माना गया है. पवित्र नदियों अथवा तालाबों में स्नान किया जाता है. मंत्र जाप किया जाता है तथा इस समय में मंत्र सिद्धि का भी महत्व है. तीर्थ स्नान, हवन तथा ध्यानादि शुभ काम इस समय में किए जाने पर शुभ तथा कल्याणकारी सिद्ध होते हैं. धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि अनुसार अथवा किसी योग्य ब्राह्मण के परामर्श से दान की जाने वाली वस्तुओं को इकठ्ठा कर के रख लेना चाहिए फिर अगले दिन सुबह सूर्योदय के समय दुबारा स्नान कर संकल्प के साथ उन वस्तुओं को योग्य व्यक्ति को दे देना चाहिए.

सूतक में वर्जित कार्य sutak ke niyam in hindi

सूतक के समय और ग्रहण के समय भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना निषिद्ध माना गया है. खाना-पीना, सोना, नाखून काटना, भोजन बनाना, तेल लगाना आदि कार्य भी इस समय वर्जित हैं. इस समय झूठ बोलना, छल-कपट, बेकार का वार्तालाप और मूत्र विसर्जन से परहेज करना चाहिए. सूतक काल में बच्चे, बूढ़े, गर्भावस्था स्त्री आदि को उचित भोजन लेने में कोई परहेज नहीं हैं



सूतक आरंभ होने से पहले ही अचार, मुरब्बा, दूध, दही अथवा अन्य खाद्य पदार्थों में कुशा तृण डाल देना चाहिए जिससे ये खाद्य पदार्थ ग्रहण से दूषित नहीं होगें. अगर कुशा नहीं है तो तुलसी का पत्ता भी डाल सकते हैं. घर में जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा अथवा तुलसी पत्ता डालना आवश्यक नहीं है.

सन 2018 में कुल ग्रहण grahan in 2018 in india timings

इस वर्ष सन 2018 में कुल 05 ग्रहण पड़ रहें हैं, जिनमे 03 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण हैं.

वर्ष 2018 में कुल पांच ग्रहण लग रहे है : 3 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण

पहला चन्द्र ग्रहण: 31 जनवरी , 2018 पहला सूर्य ग्रहण: 15 फरवरी , 2018



दूसरा चन्द्र ग्रहण: 27-28 जुलाई , 2018

दूसरा सूर्य ग्रहण: 13 जुलाई , 2018

तीसरा सूर्य ग्रहण: 11 अगस्त , 2018

ग्रहणों के विषय में यह नियम है कि एक वर्ष में कम से कम दो और अधिक से अधिक सात ग्रहण पड़ सकते  हैं, जिनमे बहुदा सूर्य ग्रहण पाच तथा चन्द्रग्रहण दो होते हैं । कभी-कभी सूर्य ग्रहण की संख्या चार तथा चन्द्र ग्रहण की संख्या तीन भी हो सकती है. इसी भांति जब एक वर्ष में कम से कम दो ग्रहण पड़ते हैं तो दोनों ही सूर्य ग्रहण होते हैं-



( १) खग्रास ग्रस्तोदय चन्द्रग्रहण- यह ग्रहण माघ शुक्ल 15, बुधवार, 31 जनवरी 2018 को खग्रास चन्द्रग्रहण यह ग्रहण सप्पूर्ण मारत में दृश्य है । भारत के अलावा यह एशिया, रूस, मंगोलिया, जापान, आस्ट्रेलिया आदि में चंद्रोदय के समय प्रारंभ होगा तथा उत्तरी अमेरिका, कनाडा, पनामा के कुछ भागो में चन्द्र आस्ट के समय प्राण का मोक्ष दृष्टिगोचर होगा। भारतीय मानक समयनुसार पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों असम, मेघालय, बंगाल, झारखण्ड, बिहार में खग्रास चन्द्रग्रहण का स्पर्श सायं 05.19 से तथा मोक्ष 08.43 पर होगा. खग्रास चन्द्रग्रहण की कुल अवधि 01 मिनट 17 मिनट तथा चन्द्र ग्रहण की कूल अवधि 03 घंटा मिनट 24  की होगी ।



यह ग्रहण पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र में और कर्क राशि पर पडेगा. ग्रहण का सूतक 08 बजकर 19 मिनट प्रात: से शुरू हो जायेगा. बालक, बुजुर्ग रोगी प्रात: 11.19 तक आहार ले सकते हैं. ग्रहण काल में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता और अन्न-जल इत्यादि खाद्य वस्तुओं में तुलसी के पत्ते या कुशा रखी जाती है. इस काल में मंदिरों में आरती नहीं की जाती. ग्रहण मोक्ष के पश्चात गर्म कपड़े, काला कंबल, छाता, उड़द, इमरती, तिल, गुड दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है. ऊं क्षीरपुत्राय विह्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्।। चंद्रग्रहण के सूतक के दौरान इस मंत्र का जाप करना सबसे लाभकारी माना जाता है।

ग्रहण का राशियों पर प्रभाव chandra grahan ka rashi par asar

मेष- चिंता बढ़ेगी, व्यर्थ के व्यय से बचें, स्वास्थ्य में गिरावट रहेगी।

दान- गुड का दान करें .. ॐ हिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम: का जाप करें.

वृष- विवाद का समझौता होगा, धन बढ़ेगा, व्यापार-व्यवसाय में उन्नति।



दान- उड़द दाल का दान करें. ॐ क्लीं कृष्णायै नम: का जाप करें.

मिथुन- कार्यभार और जवाबदारी बढ़ेगी, आर्थिक समस्या का निराकरण संभव।

दान- चीनी का दान करें. ॐ गौपालायै उत्तर ध्वजाय नम: का जाप करें.

कर्क- अपनी ही राशि में ग्रहण होने से दुर्घटना, चिंता, परेशानी होगी।

दान- दूध और चावल का दान करें. ॐ क्लीं ब्रह्मणे जगदधारायै नम: का जाप करें.

सिंह- रुके काम बनेंगे, राजकीय कार्य बनेंगे, जवाबदारी बढ़ेगी।



दान- गेहूं का दान करें. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम: का जाप करें.

कन्या- पदमान-सम्मान बढ़ेगा, राजकीय कार्यों में बाधा बनी रहेगी।

दान- हरे कपड़े का दान करें. ॐ नमो प्रीं पीताम्बरायै नम: का जाप करें.

तुला- स्वास्थ्य संबंधी कष्ट बढ़ेंगे, दुर्घटना से बचें।

दान- दवाई का दान करें. ॐ तत्व निरंजनाय तारक रामायै नम: का जाप करें.

वृश्चिक- मिला-जुला प्रभाव रहेगा, विवाद का हल निकलेगा।

दान- पेन पेन्सिल का दान करें. ॐ नारायणाय सुरसिंहायै नम: का जाप करें.

धनु- नई कार्ययोजना बनेगी, आय के स्रोत बढ़ेंगे, सहयोग मिलेगा।



दान- मुंग का दान करें. ॐ श्रीं देवकीकृष्णाय ऊर्ध्वषंतायै नम: का जाप करें.

मकर- पुराने मामले से परेशानी होगी, निर्णय सोच-विचार कर लें।

दान- धार्मिक पुस्तको का दान करें. ॐ श्रीं उपेन्द्रायै अच्युताय नम: का जाप करें.

कुंभ- स्वास्थ्य कमजोर रहेगा, धन हानि होने की संभावना।

दान- तीन प्रकार के अन्न का दान करें. ॐ श्रीं वत्सलायै नम: का जाप करें.

मीन- कार्ययोजना साकार होगी, रुके हुए काम बनेंगे, आय के स्रोत खुलेंगे।

दान- रसीले फलो का दान करें. ॐ क्लीं उद्‍धृताय उद्धारिणे नम: का जाप करें.

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