भक्तों से फोन पर बात करते हैं ये अनोखे गणेश, हरते हैं चिंता और पूरी करते हैं मनोकामना

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इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर में गणेश जी का एक ऐसा मंदिर हैं, जहां भगवान जूना चिंतामण गणेशजी भक्तों से फोन पर बात करते हैं। भगवान गणेश भक्तों की सभी चिंताओं का हरण करके सारी मनोकामनाए पूरी करते हैं।1300 साल पुराने परमार कालीन जूना चिंतामण गणेश मंदिर की चमत्कारिक कहानी आज भी भक्तों को यहां खींच लाती हैं। वक्त की मारामारी के चलते भक्त देश में दूर जगहों पर या विदेशों में रहते हैं और भगवान के पास साक्षात नहीं आ पाते हैं, वे यहां अपने किसी परिचित को भेजकर भगवान

अनोखे हैं ये भगवान गणेश, इस मंदिर में उल्टा स्वस्तिक बनाने से सीधे होते हैं बिगड़े काम!

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इंदौर. किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती हैं। भगवान गणेश के सिद्ध मंदिरों में से एक मंदिर मध्यप्रदेश के इंदौर में स्थित हैं। इस विश्व प्रसिद्ध गणेश मंदिर की अलग ही चमत्कारिक कहानी है।मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु जो भी कामना लेकर आते हैं, वह पूर्ण होती हैं। भक्तों की मन्नत पूर्ण होने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाया जाता है, भक्त मंदिर की तीन परिक्रमा लगाते हैं

भगवान महाकालेश्वर की सच्ची कहानी, सूर्यदेव की 12 रश्मियों से प्रकट हुए थे ज्योर्तिलिंग

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उज्जैन. बाबा महाकाल सृष्टि की उत्पत्ति के साथ स्वयं प्रकट हुए थे। आज भी उज्जैन के राजा महाकाल ही है। बाबा महाकाल के बारे में एक कथा प्रचलित है, जो आज भी सच है। पहले किसी भी राजा को महाराज महाकाल की नगरी उज्जैन में ठहरने की इजाजत नहीं थी।कहा जाता है कि सदियों पहले कोई ओर राजा एक रात गुजार ले तो उसे अपनी सल्तनत गंवानी पड़ती थी। इसी वजह से महाकाल की शरण में रहने के लिए सिंधिया राजघराने ने महल बनवाया। उस समय में सिंधिया राजघाने ने

नाग पंचमी पर इस मंदिर में दर्शन मात्र से दूर हो जाता है कालसर्प दोष, जानिए कैसे होता है चमत्कार

वाराणसी. देश में ऐसा एकमात्र मंदिर हैं, जिसमें स्थापित शिवलिंग नागेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है। यह नागेश्वर महादेव नागकुआँ के अंदर स्थापित हैं।यह शिवलिंग शेषनाग अवतार महर्षि पतंजली के द्दारा नागकुएं में हैं। पुजारी पं. तुलसी पांडेय का कहना हैं कि नाग पंचमी को छोड़कर वर्षभर यह शिवलिंग पानी में डूबे हुए रहते हैं। शिवलिंग के दर्शन से कालसर्प दोष दूर होता हैं। राहू व केतू से परेशान भी यहां पूजन करें तो समस्या निवारण होता हैं। वाराणसी के जैतपुरा में यह नागकूप मंदिर हैं, जिसे

उज्जैन में ऐसे आए महाकाल, पुजारी ने पुत्र की चिता की चढ़ाई थी भस्म, पढ़ें पूरी कथा

उज्जैन. भगवान शिव का प्रिय सावन माह। यह महीना हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है, इसलिए शास्त्रों में इस माह को धर्म-कर्म का माह कहा गया है। सावन माह में बाबा महाकाल की आराधना का अलग ही महत्व है। मप्र के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देशभर में सिर्फ एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इसी वजह से तंत्र क्रियाओं की दृष्टी से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर शुरु से ही खास रहा है। -शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार अवंतिका राज्य के राजा वृषभसेन

1000 साल से नागदेेवता का वास है इस मंदिर में, भाग्यशाली ही कर पाते हैं दर्शन!

हमारे देश में नागों के कई मंदिर हैं, जिनमें से एक उज्जैन में नागचंद्रेश्वर है, जहां विदेशों से भक्त दर्शन करने आते हैं। विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान नाागदेवता साल में सिर्फ एक बार ही दर्शन देते हैं। साल 2018 की नाग पंचमी 15 अगस्त को रहेगी। इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में देशविदेश से भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं।11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में आते हैं। मंदिर में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्र्वती बैठी मुद्रा में दर्शन देते

तांत्रिक विधि से बना है श्री महामाया देवी का चमत्कारिक मंदिर, सदियों से है आस्था का केंद्र

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रायपुर. हैहयवंशी राजाओं ने छत्तीसगढ़ में छत्तीस किले बनवाए और हर किले की शुरुआत में मां महामाया के मंदिर बनवाए। मां के इन छत्तीसगढ़ों में एक गढ़ हैं, रायपुर का महामाया मंदिर, जहां महालक्ष्मी के रुप में दर्शन देती हैं मां महामाया और सम्लेश्वरी देवी। मां का दरबार सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ हैं। तांत्रिक पद्धति से बने इस मंदिर में देश ही नहीं विदेशों से भी भक्त आते हैं। माता का यह मंदिर बेहद चमत्कारिक माना जाता हैं, यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत

भगवान शिव स्वयं आते हैं इंसानों के भूत भगाने, मालनमाई के मंदिर में लगता है भूतों का मेला

छिंदवाड़ा. मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के गांव तालखमरा में मालनामाई का प्रसिद्ध मंदिर हैं। यहां मान्यता हैं कि यहां कार्तिक पूर्णिमा से शुरु हुए मेले में तांत्रिकों के आव्हान पर भगवान शिव और मालनमाई स्वयं आते हैं और मानसिक रुप से परेशान लोगों, लोगों में भूत का आना, बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाने की मनोकामना पूरी करते हैं। यहां सदियों से भूतों का मेला लगता हैं। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। इंसानों से भूत भगाने और मनोकामना सिद्धी के लिए लोग दूर-दूर से बड़ी

पौराणिक रहस्य, इस मंदिर में आज भी आती है एक दिव्य आत्मा

सतना। वैसे तो भारत देश में ओर से छोर तक कहीं भी चमत्कारों की कमी नही है, लेकिन कुछ ऐसे भी रहस्य हैं जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठ सका है। कोई इसे चमत्कार मानता है तो कोई दैविय शक्ति, तो कोई भक्ति का एक ऐसा उदाहरण जिसके बारे में सिर्फ किताबों में ही पढ़ने नही मिलता, बल्कि हर रोज साक्षात् देखने भी मिलता है। जी हां, आज यहां हम बात कर रहे हैं सतना के समीप ही स्थित सुप्रसिद्ध दैविय स्थान मैहर की, जो कि एक शक्तिपीठ के रूप

भगवान राम का वनवास 14 वर्ष ही क्यों ? कम या ज्यादा क्यों नहीं, जानिए अब तक का सबसे बड़ा रहस्य :o

हिंदू धर्म में श्रीराम को श्रेष्ठ पुरुष माना जाता है क्योंकि भगवान विष्णुजी ने श्रीराम के रूप में जन्म लेकर मानवजाति का उद्धार किया था. सभी जानते हैं कि त्रेता युग में भगवान राम को जो 14 सालों का वनवास हुआ था वो बहुत ही दुखदायी था और ऐसा कोई पिता अपने बेटे के साथ नहीं कर सकता है. महाराज दशरथ ने अपने सबसे प्रिय पुत्र को 14 वर्षों का वनवास दिया और खुद बीमारी के वनवास में चले गए, क्योंकि उन्होंने अपनी रानी कैकेयी के वचन को पूरा करने के

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