जानिए आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं मंत्र

किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अनिवार्य रूप से किया जाता है। सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है-कर्पूरगौरं मंत्रकर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।ये है इस मंत्र का अर्थइस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है-कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं।संसारसारं- समस्त सृष्टि के

रविवार के दिन करें इनमें से कोई 1 उपाय, समस्त मुसीबतें होंगी दूर

सूर्य मानव शरीर में आत्मा का कारक माना जाता है। इस द्युलोक में सूर्य भगवान नक्षत्र तारों के मध्य में विराजमान रहकर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं। पुराणों के अनुसार सूर्य देवता के पिता का नाम महर्षि कश्यप व माता का नाम अदिति है।मान्यताओं के आधार पर यदि सूर्य देव के कुछ उपाय किए जाए तो लाभ प्राप्ति होती है। प्रत्येक रविवार सूर्य का व्रत करने से व्रत करने वाले को नौकरी में उच्च पद और प्रतिष्ठा हासिल होती है। इसके अलावा रविवार को व्रत करने से नेत्र व

अनंत चतुर्दशी व्रत उद्यापन विधि, कथा, ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

अनन्त चतुर्दशी का व्रत: दिनाँक 23/9/2018 दिन रविवार को अनन्त चतुर्दशी व्रत है। आईये जानें इस व्रत के बारे में। पंडित मनोज शुक्ला से। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में अनन्त के रूप में भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा होती है। अनन्त चतुर्दशी के दिन पुरुष दाहिने हाथ में तथा नारियाँ बाँये हाथ में अनन्त धारण करती हैं। अनन्त कपास या रेशम के धागे से बने होते हैं, जो कुंकमी रंग में रंगे जाते हैं तथा इनमें चौदह गाँठे होती हैं।

मां लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं तो शुक्रवार को करें ये उपाय, किस्मत खुल जाएगी आपकी

धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं - माँ लक्ष्मी. माना जाता है समुद्र से इनका जन्म हुआ था, और इन्होंने श्री विष्णु से विवाह किया था. इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है साथ ही वैभव भी मिलता है. अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएँ तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है. ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है.इनकी पूजा से किन किन फलों की प्राप्ति होती है?- इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं बल्कि नाम यश भी मिलता है.- इनकी उपासना से दाम्पत्य

गुरुवार को मालामाल बनाने वाला गुरु मंत्र

नवग्रहों में देवगुरू बृहस्पति को धन, पुत्र और विद्या का दाता माना गया है। शास्त्रों ने बृहस्पति ग्रह को हर तरह की आपदा-विपदाओं से धरती और मानव की रक्षा करने वाला ग्रह बताया है। कुण्डली में बृहस्पति की अच्छी स्थिति व्यक्ति को समृद्धि के मार्ग पर ले जाती है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति अर्थात जुपिटर को गुरु की उपाधि प्राप्त है। संसार के स्मस्त प्राणियों में से बृहस्पति का प्रभाव सर्वाधिक रूप से मानव जीवन पड़ता है। ये दिन भगवान श्री हरि विष्णु को भी समर्पित है। जग के पालनकर्ता

एकादशी व्रत करने से दूर हो जाते हैं सारे कष्ट…

हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत की बहुत मान्यता है और शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से इंसान के सारे कष्ट दूर होते हैं. साथ ही सारे पापों से मुक्ति भी मिल जाती है.सभी धर्मों में व्रत-उपवास करने का महत्व बहुत होता है और हर व्रत के आने नियम कायदे भी होते हैं. खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए. ऐसा करने से उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा? क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती?

भारत त्‍योहारों का देश है. जीवन एक उत्‍सव है और इसी धारणा के साथ यहां साल भर अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं. इन्‍हीं में से एक त्‍योहार है विश्‍वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja). यह पर्व हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है. मान्‍यता है कि इसी दिन निर्माण के देवता विश्‍वकर्मा का जन्‍म हुआ था. विश्‍वकर्मा को देवशिल्‍पी यानी कि देवताओं के वास्‍तुकार के रूप में पूजा जाता है. मान्‍यता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए महलों, हथियारों और भवनों का निर्माण किया था. विश्‍वकर्मा पूजा के मौके पर ज्‍यादातर

हरतालिका तीज 2018 व्रत: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथा : पँ कपिल शर्मा काशी

हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं। खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गया हैं। विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से जहाँ कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है.हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व

धन प्राप्त करने के लिए शुक्रवार को करें यह पूजा, खींचे चले आएंगे लक्ष्मी-कुबेर

पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा से कम भी नहीं। आज के परिवेश में यह बात शत प्रतिशत खरी उतरती है। मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी समस्या हैं गरीबी अर्थात निर्धनता। धन के अभाव में मनुष्य मान-सम्मान प्रतिष्ठा से भी वंचित रहता है। ऐसा शास्त्रों में वर्णन है की व्यक्ति को दरिद्रता दूर करने हेतु मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है अर्थात जो कभी एक स्थान पर रूकती नहीं। अतः लक्ष्मी अर्थात धन को स्थायी बनाने के लिए कुछ उपाय,

जन्माष्टमी को सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए करें ये ज्योतिष के विशेष उपाय

शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी माँ लक्ष्मी का अवतार थी अत: अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यदि आप जन्माष्टमी के दिन ये उपाय पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास से करेंगे तो आपको अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी कृष्ण जन्माष्टमी कब है हिन्दू पंचांग के अुनसार भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को कृष्ण का जन्म हुआ था. इसलिए हर साल

Top
error: Content is protected !!