रवि चंपक द्वादशी व्रत से पुरे होते हैं सकल मनोरथ

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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की बारहवीं तिथि को चंपक द्वादशी कहते हैं। भगवान श्री कृष्ण का चंपा के फूलों से पूजन व श्रृंगार करने का विधान बताया गया है। शास्त्रों ने इस पर्व को राघव द्वादशी या रामलक्ष्मण द्वादशी के नाम से भी संबोधित किया गया है। इस दिन विष्णु के अवतार श्रीराम तथा शेषनाग के अवतार श्री लक्ष्मण की मूर्तियों का विधिवत पूजन करने का विधान है।ऐसी मान्यता है कि चंपक द्वादशी के दिन चंपा के फूलों से विधिवत भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति को

अगर आपकी प्रार्थनाएं नाकाम हो रही हों तो करे उपाय

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हर व्यक्ति को कभी ना कभी ये लगता है कि वह ईश्वर की प्रार्थना या पूजा तो खूब कर रहा है लेकिन ये सुनी नहीं जा रही हैं. अगर आप इस स्थिति में हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों कभी कभी प्रार्थनाएं नाकाम हो जाती हैं. पहले आप यह समझ लीजिए कि व्यवसाय और लेन-देन की तरह की प्रार्थना भी असफल होती है.प्रार्थना के नाकाम होने की कुछ वजह होती हैं, जैसे -- आहार और व्यवहार पर नियंत्रण न रखने से प्रार्थना नाकाम होती है- माता-पिता का

पंचांगानुसार निर्जला एकादशी व्रत कब है 2018 में

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निर्जला एकादशी भीमसेनी एकादशीसूर्यसिद्धान्तीय सूर्य पंचांगानुसार रविवार 24 जून 18 को निर्जला एकादशी व्रत मान्य है।उज्जैन के महाकाल पंचांगानुसार भी 24 जून को है। युधिष्ठिर ने कहा : जनार्दन ! ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी पड़ती हो, कृपया उसका वर्णन कीजिये ।**भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगे, क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद वेदांगों के पारंगत विद्वान हैं ।**तब वेदव्यासजी कहने लगे : दोनों ही पक्षों की एकादशियों के दिन भोजन न करे । द्वादशी के दिन स्नान आदि से

भीमसेनी एकादशी से बचे अपयश से

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सबकुछ अच्छा चलते चलते अचानक अपयश हो तो यह किसी भी इंसान के लिए सबसे बुरा वक्त कहा जा सकता है। कई बार जीवन में आप कुछ भी गलत नहीं कर रहे होते हैं किंतु जब कालचक्र की गति विपरीत होती है, तब उसके निशाने पर आ ही जाते हैं। सामान्य वक्त में कुछ जातक जरूर कुछ गलत या कार्य या गतिविधियों में लिप्त होते हैं हालांकि तब उन पर कोई भी दाग प्रत्यक्षतः नहीं लगता और वह साफ-साफ बच निकलता है किंतु बुरा वक्त उन्हें भी नहीं छोड़ता और

Fastivals July 2018 : जुलाई 2018 माह में यह प्रमुख व्रत, पर्व और त्योहार

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साल 2018 का सातवें माह जुलाई (July 2018 festival) में कई उत्सव, व्रत, पर्व और त्योहार हैं। हमें पहले से ही व्रत, पर्व और त्योहारों के बारे में जानकारी मिल जाए तो हम पहले से ही तैयारियां कर सकते हैं। इसके साथ ही हम अपने ईष्ठ देव की पूजन हम पूर्व विधि विधान से कर सकते हैं। कुछ इसी तरह की बातों को ध्यान में रखते हुए धर्म कथाएं डॉट कॉम  ( http://dharmakathayen.com ) आपको बताने जा रहा हैं, कि जुलाई 2018 में कौन-कौन से व्रत, पर्व और त्योहार (vrat

Fastivals June 2018 : जून 2018 माह में यह प्रमुख व्रत, पर्व और त्योहार

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साल 2018 का छठवें माह जून (june 2018 festival) में कई उत्सव, व्रत, पर्व और त्योहार हैं। हमें पहले से ही व्रत, पर्व और त्योहारों के बारे में जानकारी मिल जाए तो हम पहले से ही तैयारियां कर सकते हैं। इसके साथ ही हम अपने ईष्ठ देव की पूजन हम पूर्व विधि विधान से कर सकते हैं। कुछ इसी तरह की बातों को ध्यान में रखते हुए धर्म कथाएं डॉट कॉम  ( http://dharmakathayen.com ) आपको बताने जा रहा हैं, कि जून  2018 में कौन-कौन से व्रत, पर्व और त्योहार (vrat

निर्जला एकादशी : इस व्रत से भीम ने पाया था स्वर्ग, आप भी ऐसे करें उपवास!

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एक व्रत करके भीम ने स्वर्ग प्राप्त कर लिया था। यह व्रत आज के युग में भी कर सकते है। इसके लिए सिर्फ कुछ कठिनाईयों से गुजरना पड़ेगा। मोक्ष और संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है। यह व्रत इस बार साल की पहली एकादशी पर आया है, जी हां, हम बात कर रहे हैं, निर्जला एकादशी की। इस व्रत के करने से संतान की आयु बढ़ती है। सभी व्रतों में निर्जला एकादशी का उपवास कठिन माना जाता है। यह इसलिए क्योंकि भीषण गर्मी के समय में

भगवान बृहस्पति की पूजा सभी प्रकार से फलदायी

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भगवान बृहस्पति सभी देवताओं के गुरू हैं, गुरु के पास सभी समस्या का समाधान होता है। गुरुवार को कुछ ऐसे उपाय करें जिससे आपको अपने सभी समस्या का समाधान मिले जिससे काम में सफलता जरुर मिलेगी, क्योंकि गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु ब्रहस्पति देव का होता है।गुरुवार का दिन गुरु दोष शांति व गुरु की प्रसन्नता के लिए विशेष दिन माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं में भी गुरु सुखद दाम्पत्य जीवन व सौभाग्य में वृद्धि करने वाले ग्रह हैं। वे धन समृद्धि, पुत्र प्राप्ति और शिक्षा के दाता है।

त्रिकाल संध्या क्या है?

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संसार में प्रत्येक गतिशील वस्तु  अपनी गति को स्थिर रखने के लिये कहीं ना कहीं से नई शक्ति प्राप्त करती है ।गतिशोल वस्तु  वह चाहे सजीव हो या निर्जीव अपनी गतिशीलता को बनाये रखने के लिये आहार अवश्य चाहेगी।शरीर को भोजन पानी चाहिये तो शरीर से अधिक आत्मा का महत्व है।क्योंकि आत्मा अजर अमर है तो सबसे अधिक गतिशील है चैतन्य है, उसे भी आहार की आवश्यकता अधिक है। और आत्मा को स्वाध्याय, सत्संग, आत्म-चिन्तन,उपासना, साधना आदि साधनों द्वाराआहार प्राप्त होता है तब ही वह बलवान ,चैतन्य तथा क्रियाशील रहती

दान कितने प्रकार के होते है

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यस्य वित्तं न दानाय नोपभोगाय देहिनाम्।नापि कीर्त्यै न धर्माय तस्य वित्तं निर्थकम्।।अर्थात- जिसका धन ना तो दान में प्रयुक्त होता है , ना लोगों के उपयोग में आता है , ना यश के लिये होता है और ना धर्मार्जन में विनियुक्त होता है उसका धन ही निरर्थक है, निष्प्रयोजन है।दान केवल धन का ही नहीं होता है दान के कई प्रकार हैं यथा - छायादानआजीविकादानश्रमदानसमयदानक्षमादानसम्मानदानविद्यादानजपदानभक्तिदानपुण्यदान(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});आशीषदानशरीर के अंगो का दानशरीर के अंगों का दान भी जीवित अवस्था में ही करना चाहिये।इसके अतिरिक्त

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