भयंकर ठण्ड में भी उबलता रहता है यहाँ गुरुद्वारा का पानी,इसका वास्तविक सच जानकर आपको भी यक़ीन नहीं होगा :o

कई बार लोग ईश्वर के अस्तित्व को मानने से इनकार करते हैं। उनके अनुसार ईश्वर जैसी कोई चीज़ इस दुनिया में नहीं होती है। लेकिन समय-समय पर ऐसे चमत्कार होते रहते हैं, जिसे देखकर लोग बिना हैरान हुए नहीं रह पाते हैं। इन चमत्कारों को देखने के बाद लोग ईश्वर पर यक़ीन करने लगते हैं। हालाँकि इन चमत्कारों के पीछे ईश्वर का हाथ होता है या विज्ञान का, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। कुछ जगहों पर ऐसे चमत्कारों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी सामने आए हैं और

सनातन धर्म की रक्षा के सिक्खों ने दी प्राणों की आहुति- बृजमोहन अग्रवाल : संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए हो सार्थक प्रयास

रायपुर. कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल राजधानी रायपुर में सिक्ख समाज महिला विंग द्वारा आयोजित बैसाखी पर्व में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से समाज को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को अक्षुण बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। आधुनिकता के इस दौर में संस्कृति और संस्कारों को बचाए रखना एक चुनौती है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी को बेहतर दिशा देने के लिए सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। ऐसे प्रयास सार्थक तभी होंगे जब समाज के सभी

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जनता को बैसाखी पर्व की बधाई

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रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैसाखी पर्व के पावन अवसर पर सिक्ख समाज सहित आम जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने आज यहां जारी बधाई संदेश में कहा है यह खेतों में नई फसल के स्वागत का महापर्व है, जो पंजाब की धरती पर मेहनतकश किसानों के साथ सभी लोगों के जीवन में उत्साह का नया पैगाम लेकर आता है। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर सिक्खों के दसवें गुरू गोविंद सिंह महाराज द्वारा 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ की स्थापना के ऐतिहासिक प्रसंग को भी

सिख समाज के गुरु तेग बहादुर की सच्ची कहानी, औरंगजेब ने इस्लाम न स्वीकारने पर कटवाया था सिर

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(guru tegh bahadur guru tegh bahadur ji shaheedi diwas aurangzeb get killed sikhs ninth guru for not converting to islam) दिल्ली. सिख समुदाय में 24 नवंबर का दिन बेहद यादगार दिन है। इसी दिन सिख समाज के 9 वें गुरु तेग बहादुर ने अपना बलिदान दिया था। इतिहासकारों की मानें तो मुगल बादशाह औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर का सिर कटना था, औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर के आगे शर्त रखी थी कि उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकार करना होगा। मगर गुरु तेग बहादुरजी ने ऐसा करने से मना कर दिया था।

गुरु गोविंद सिंह: तंबाकू के पौधे उखाड़ कर सिख समाज को दी थी यह शिक्षा

sikha guru gobind singh ji ki sakhiyan

दिल्ली. सिख समाज के धर्म गुरु गोविंद सिंह ने एक ऐसी शिक्षा दी थी, जिसका लोग आज भी अनुसरण करते है। इस शिक्षा को दूसरे धर्मों के अन्य लोग भी मानते हैं। गुरु गोविंद सिंह ने एक बार तंबाकू के पौधों को नष्ट कर दिया था। इस पर एक शिष्य ने चौंकते हुए पूछा था, कि गुुरुजी आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि शराब से सिर्फ एक ही पीढ़ी को नुकसान होता है। जबकि तंबाकू से कई पीढिय़ां खत्म हो जाती हैं।(adsbygoogle

गुरु तेग बहादुर ने इस वजह से दिया था बलिदान

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(sikh samaj history and sikh 9th guru teg bahadur story in hindi)दिल्ली. सिख समुदाय में 24 नवंबर का दिन बेहद यादगार दिन है। इसी दिन सिख समाज के 9 वें गुरु तेग बहादुर ने अपना बलिदान दिया था। इस दिन उन्होंने कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों को बचाने के लिए स्वयं को बलिदान कर दिया था।उन्होंने अपना बलिदान देकर यह संदेश दिया था, कि सच के मार्ग में किसी के आगे नहीं झुकना चाहिए। इतिहास में वे एक मात्र ऐसे धर्मगुरु है, जो किसी दूसरे धर्म की रक्षा के लिए

गुरु नानक देव: बाबा के इन चमत्कारों को देख आदमखोर बन गए थे भक्त

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दिल्ली. सिख समुदाय के संस्थापक और सिखों के पहले धर्म गुरु नानक देव थे। गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना करके पवित्र जपजी की रचना की। उन्होंने अपने चमत्कारों से बड़े-बड़े आदमखोर को भी झुका दिया और उनकी जिंदगी बदल दी थी। गुरु नानक देव ने अपने जीवन में पांच यात्राएं की थी। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने अपने चमत्कारों से लोगों को अपना भक्त बना दिया था। बाबा के चमत्कार के किस्से तो कई हैं, लेकिन एक चर्चित किस्सा हमेशा याद किया जाता है।

इस गुरुद्वारे में मिलता है चने का प्रसाद…जानिए क्या है चमत्कार की कहानी

patna saheb

पटना. तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला लगातार जारी है। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना में 350 वें प्रकाशोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है। बताया जाता है कि श्रद्धालुओं के लिए पटना साहिब गुरुद्वारा गुरुगोविंद सिंह की बाल लीलाओं का प्रतीक है। मान्यता है कि गुरुजी ने यहीं पर अपनी बाल लीलाएं की थीं। इसलिए आज भी यहां संगतों को प्रसाद में घुघनी (चने की सब्जी) दी जाती है।सजाया जाता है कोना-कोनाबाललीला गुरुद्वारा के प्रधान संत बाबा कश्मीर सिंह भूरीवाले के

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