आपका दिल रो देगा इस महान संत की यह सच्ची दास्तां पढक़र…

स्वप्निल व्यास @ गजानन महाराज महाराष्ट्र के शेगांव जिले के एक संत है. कुछ विद्वानों के मतानुसार वो भगवान गणेश और अत्रिपुत्र दत्तात्रय के अवतार हैं. वैसे तो उनके जन्म के बारें में कोई सटीक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं लेकिन कहा जाता हैं कि उन्हें 23 फरवरी 1878 को शेगांव के एक जमीनदार ने बरगद के पेड़ के नीचे झूठी पत्तलों से चावल के दाने उठाकर खाते हुए देखा था, तब जमीनदार ने पूछा था झूठी पत्तलों से भोजन क्यों खा रहे हैं. तब गजानन महाराज ने उत्तर दिया –

छप्पर फाडक़र बरसेगा धन, कामना एकादशी का यह चमत्कारिक व्रत बदल देगा किस्मत

सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत उपवास करके भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। इस दिन प्रात: काल उठ कर भगवान श्री कृष्णन को जल चढ़ायें और उन्हें तुलसी दल और उसकी मंजरी अर्पित करें। भगवान के सामने घी के दीपक प्रज्वलित करें। भगवान को पंचामृत से स्नाभन करायें और धूप, दीप, चंदन आदि सुगंधित पदार्थों से उनकी आरती उतारें। कामिका एकादशी के दिन पूजा के बाद इसकी कथा का श्रवण करें और पूरे दिन फलाहार करके व्रत करें।

द्रोणागिरि: यहां वर्जित है हनुमान जी की पूजा

हम सब जानते है हनुमान जी हिन्दुओं के प्रमुख आराध्य देवों में से एक है, और सम्पूर्ण भारत में इनकी पूजा की जाती है। लेकिन बहुत काम लोग जानते है की हमारे भारत में ही एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ के रहवासी हनुमान जी द्वारा किए गए एक काम से आज तक नाराज़ हैं। यह जगह है उत्तराखंड स्तिथ द्रोणागिरि गांव द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ प्रखण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर है। यह गांव

उज्जैन में ऐसे आए महाकाल, पुजारी ने पुत्र की चिता की चढ़ाई थी भस्म, पढ़ें पूरी कथा

उज्जैन. भगवान शिव का प्रिय सावन माह। यह महीना हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है, इसलिए शास्त्रों में इस माह को धर्म-कर्म का माह कहा गया है। सावन माह में बाबा महाकाल की आराधना का अलग ही महत्व है। मप्र के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देशभर में सिर्फ एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इसी वजह से तंत्र क्रियाओं की दृष्टी से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर शुरु से ही खास रहा है। -शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार अवंतिका राज्य के राजा वृषभसेन

1000 साल से नागदेेवता का वास है इस मंदिर में, भाग्यशाली ही कर पाते हैं दर्शन!

हमारे देश में नागों के कई मंदिर हैं, जिनमें से एक उज्जैन में नागचंद्रेश्वर है, जहां विदेशों से भक्त दर्शन करने आते हैं। विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान नाागदेवता साल में सिर्फ एक बार ही दर्शन देते हैं। साल 2018 की नाग पंचमी 15 अगस्त को रहेगी। इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में देशविदेश से भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं।11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में आते हैं। मंदिर में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्र्वती बैठी मुद्रा में दर्शन देते

तांत्रिक विधि से बना है श्री महामाया देवी का चमत्कारिक मंदिर, सदियों से है आस्था का केंद्र

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रायपुर. हैहयवंशी राजाओं ने छत्तीसगढ़ में छत्तीस किले बनवाए और हर किले की शुरुआत में मां महामाया के मंदिर बनवाए। मां के इन छत्तीसगढ़ों में एक गढ़ हैं, रायपुर का महामाया मंदिर, जहां महालक्ष्मी के रुप में दर्शन देती हैं मां महामाया और सम्लेश्वरी देवी। मां का दरबार सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ हैं। तांत्रिक पद्धति से बने इस मंदिर में देश ही नहीं विदेशों से भी भक्त आते हैं। माता का यह मंदिर बेहद चमत्कारिक माना जाता हैं, यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत

भगवान शिव स्वयं आते हैं इंसानों के भूत भगाने, मालनमाई के मंदिर में लगता है भूतों का मेला

छिंदवाड़ा. मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के गांव तालखमरा में मालनामाई का प्रसिद्ध मंदिर हैं। यहां मान्यता हैं कि यहां कार्तिक पूर्णिमा से शुरु हुए मेले में तांत्रिकों के आव्हान पर भगवान शिव और मालनमाई स्वयं आते हैं और मानसिक रुप से परेशान लोगों, लोगों में भूत का आना, बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाने की मनोकामना पूरी करते हैं। यहां सदियों से भूतों का मेला लगता हैं। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। इंसानों से भूत भगाने और मनोकामना सिद्धी के लिए लोग दूर-दूर से बड़ी

पौराणिक रहस्य, इस मंदिर में आज भी आती है एक दिव्य आत्मा

सतना। वैसे तो भारत देश में ओर से छोर तक कहीं भी चमत्कारों की कमी नही है, लेकिन कुछ ऐसे भी रहस्य हैं जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठ सका है। कोई इसे चमत्कार मानता है तो कोई दैविय शक्ति, तो कोई भक्ति का एक ऐसा उदाहरण जिसके बारे में सिर्फ किताबों में ही पढ़ने नही मिलता, बल्कि हर रोज साक्षात् देखने भी मिलता है। जी हां, आज यहां हम बात कर रहे हैं सतना के समीप ही स्थित सुप्रसिद्ध दैविय स्थान मैहर की, जो कि एक शक्तिपीठ के रूप

जब भगवान शिव ने दिया यमराज को प्राणदान

स्वप्निल व्यास, इंदौर @ मृत्यु को कोई जीत नहीं सकता। स्वयं ब्रह्मा भी चतुर्युगी के अंत में मृत्यु के द्वारा परब्रह्म में लीन हो जाते हैं।लेकिन भगवान शिव ने अनेक बार मृत्यु को पराजित किया है इसलिए वे ‘मृत्युंजय’ और ‘काल के भी काल महाकाल’ कहलाते हैं ।ईश्वर के प्रिय भक्त का स्वामी ईश्वर ही होता है । उस पर मौत का भी अधिकार नहीं होता है । यमराज भी उस पर जबरदस्ती करे तो मौत (यमराज) की भी मौत हो जाती है । यह प्रसंग कोई काल्पनिक नहीं हैं वरन्

शिवजी की तीसरी आंख का रहस्य

स्वप्निल व्यास @ इंदौर. शिव को हमेशा त्रयंबक कहा गया है, क्योंकि उनकी एक तीसरी आंख है। दरअसल शिव की तीसरी आंख कोई अतरिक्त अंग नहीं है बल्कि यह प्रतिक है उस दृष्टि की जो आत्मज्ञान के लिए आवश्यक है. शिव जैसे परम योगी के पास यह दृष्टि होना बिलकुल भी अचरज की बात नहीं है दो आंखें सिर्फ भौतिक चीजों को देख सकती हैं। अगर मैं अपना हाथ उन पर रख लूं, तो वे उसके परे नहीं देख पाएंगी। उनकी सीमा यही है अगर तीसरी आंख खुल जाती है, तो इसका

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