मिलिए शादी कराने वाले गणेशजी से, सिर्फ 1 काम करने से होती है चट मंगनी पट ब्याह

रामगंजमंडी. विवाह में बाधा के कारण अगर आप परेशान हैं, तो अब परेशान होने की जरुरत नहीं हैं। जी हां, हम मिलवा रहे हैं शादी कराने वाले गणेशजी से। राजस्थान के कोटा जिले में रामगंजमंडी तहसील में स्थित धायपुरा गांव में मंदिर गणेशजी महाराज है। इस मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन और भगवान गणेशजी की प्रतिमूर्ति लाकर अपने घर पर विराजमान करने से विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं। जिनके विवाह में देरी होती हैं, उनके विवाह जल्द हो जाते हैं। पुजारी रमेशजी बताते हैं कि यहां जो भी

सोमवती अमावस्या: पांडव जीवनभर तरसे इस महासंयोग के लिए, आज इस 1 मंत्र का जाप करें होगी धन वर्षा

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साल में एक बार सोमवार को पडऩे वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस साल आज यानी 15 अप्रैल सुबह 8.37 से 16 अप्रैल 07.27 बजे तक अमवस्या है। इस दिन के महासंयोग के लिए पांडव जीवनभर तरसे थे। आज के दिन कुछ जरूरी उपाय कर लेने से पुण्य प्राप्त किया जा सकता हैं। ग्रंथों में बताया गया हैं कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से आती हैं। पांडव पूरे जीवन तरसते रहे थे, लेकिन सोमवार को सोमवती अमावस्या नहीं आई थी। आज के दिन नदियों तीर्थों में स्नान, गोदान,

शनि शिंगणापुर : शनिदेव के मंदिर की एक दिलचस्प कहानी, जब चौंक गए थे भक्त

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Shani Shingnapur Situated in Nevasa taluka in Ahmednagar district, the village is known for its popular temple of Shani, the Hindu god associated with the planet (graha) Saturnशनि शिंगणापुर. महाराष्ट्र के नासिक शहर के पास शिंगणापुर गांव में न्याय के देवता शनिदेव का अतिप्राचीन मंदिर हैं। यहां शनिदेव की अत्यंत प्राचीन पाषाण की प्रतिमा हैं।प्राचीनकाल से ही इस प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता आया हैं। अहमद नगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर की महिमा अपरंपार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव न्याय के देवता हैं। वे हर जीव-जंतु को

बारसूर में मामा भांजा मंदिर दर्शन के लिए देश-दुनिया से पहुंचते हैं पर्यटक

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां धार्मिक स्थालों को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक आते हैं। जगदलपुर और दंतेवाड़ा क्षेत्र में भी बारसूर की ऐतिहासिक धरोहरें कुछ ऐसी ही हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कोई यहां के धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं, तो कोई यहां के गौरवशाली इतिहास का जीवंत नजरा देखने आते हैं। छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक ज्ञात पुरातात्विक स्थलों में से एक हैं, बारसूर के प्रारंभिक इतिहास के बारे में विद्वानों के बीच कोई

पवित्र शंख के चमत्कारिक रहस्य…जानिए पं. कपिल शर्मा ‘काशी’ से

क्या शंख हमारे सभी प्रकार के कष्ट दूर कर सकता है? भूत-प्रेत और राक्षस भगा सकता है? क्या शंख में ऐसी शक्ति है कि वह हमें धनवान बना सकता है? क्या शंख हमें शक्तिशाली व्यक्ति बना सकता है?पुराण कहते हैं कि सिर्फ एकमात्र शंख से यह संभव है। शंख की उत्पत्ति भी समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। शिव को छोड़कर सभी देवताओं पर शंख से जल अर्पित किया जा सकता है। शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था अत: शंख का जल शिव को निषेध बताया गया

हनुमान जन्मोत्सव विशेष : पँ कपिल शर्मा जी ‘काशी’ से जानिए हनुमानजी कैसे बने हनुमानजी, यहां है पूरी कहानी

पवन पुत्र हनुमान के जन्म की कहानी ज्योतिषीयों के सटीक गणना के अनुसार हनुमान जी का जन्म १ करोड़ ८५ लाख ५८ हजार ११२ वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्र नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह ०६:०३ बजे हुआ था।हनुमान जी की माता अंजनि के पूर्व जन्म की कहानी कहते हैं कि माता अंजनि पूर्व जन्म में देवराज इंद्र के दरबार में अप्सरा पुंजिकस्थला थीं। ‘बालपन में वो अत्यंत सुंदर और स्वभाव से चंचल थी एक बार अपनी चंचलता में ही उन्होंने तपस्या करते एक तेजस्वी ऋषि

इस गांव में हनुमानजी ने लिया था जन्म, आज भी हैं साक्ष

टीकमगढ़. हनुमानजी के जन्म को लेकर कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। लेकिन पौराणिक मान्यता हैं कि मध्यप्रदेश के एक गांव में हनुमान जी ने जन्म लिया था। जी हां, टीकमगढ़ जिले के टिहरका गांव में हनुमानजी का अतिप्राचीन मंदिर हैं, इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता हैं, कि भगवान हनुमानजी ने इसी गांव में जन्म लिया था। इसी पावन पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार को मारुतिनंदन का जन्म हुआ। अंजनी माता अपने पति केशरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करते थे। जब कई सालों तक माता

जय हनुमान : हनुमान जन्मोत्सव २०१८ विशेष

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त्रेता युग की बात है कि विश्रवा और कैकसी की संतान रावण और कुंभकरण के अत्याचारों से संसार में त्राहि त्राहि मच गया... इधर रावण ने अपना शीश चढ़ाकर शिव को प्रसन्न कर लिया था .. तो वहीं ब्रह्मा के आशीष से कुंभकरण भी लगभग अमर हो चुका था.. सारी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था सभी परेशान थे... तभी भगवान विष्णु ने सोचा कि उन्हें अपने संगी-साथियों के साथ धरती में जन्म लेना होगा... मगर उन्हें लगा कि यह काम वह अकेले नहीं कर सकते तब उन्होंने सहस्त्र कमल

110 सालों से सटिक रही गोठड़ा माताजी की भविष्यवाणी, इस साल भी जानिए देश और प्रदेश में क्या होगा!

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रतलाम. यहां से समीप गोठड़ा गांव में, महिषासुर मर्दनी भैसासरी माताजी की भविष्यवाणी सुनने हजारों लोगो की भीड़ उमड़ते हैं| ऐसा ही नजारा आज एक बार फिर गोठड़ा गांव में माता की भविष्यवाणी में देखने को मिला| जिसे सुनने के लिए प्रदेश के कोने-कोने से लोग पहुंचे|हर साल चैत्र के माह की एकादशी के दिन, जावरा से 17 किमी दूर स्थित गोठड़ा गांव में, महिषासुर मर्दनी , भैसासरी माताजी खुद देश और प्रदेश का भविष्य बताती है| जिसे सुनने आज भी 30 हजार से ज्यादा लोग गोठड़ा गांव पहुंचे| यह

भगवान राम का स्त्री दर्शन

इस बार नवरात्रि के आठवें दिन भगवान राम का प्रकटोत्सव आया है। उनके जीवन में भी आठ स्त्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने राम को राम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि कुछ के साथ उनके व्यवहार में विरोधाभास भी नजर आता है। समग्रता में महसूस करेंगे तो पाएंगे कि वे आठ स्त्रियां आठ सीढिय़ों की तरह नवमी को हुए राम के अवतार को पूर्णता की ओर ले जाती हैं।कैकेयी- कैकेयी उन्हें शुरू से बहुत प्रिय रहीं। वे भी माता कैकेयी को भरत से अधिक प्रिय थे, लेकिन मंथरा के भडक़ाने और

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