“पुरूषोत्तम मास” चला गया, हम क्या कर पाये?

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सत्कर्म या किसी और शुभ कार्य के लिये उपयुक्त समय की प्रतिक्षा करना क्या आवश्यक है ।प्रत्येक दिन व प्रत्येक क्षण सत्कर्म के लिये  अनुकूल है। कोई समस्या नहीं रहेगी तभी हम सत्कर्म करेंगे, ऐसा विचार कर कार्य रोकना समझदारी नहीं।"प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचै:प्रारभ्य विघ्नविहिता विरमन्ति मध्याः।विघ्नैः पुनःपुनरपि प्रतिहन्यमानाःप्रारभ्य चोत्तमजना न परित्यजन्ति"।।अर्थात्- विघ्न के भय से  जो कार्य की शुरूआत ही नहीं करते वे निम्नकोटि के पुरूष हैं।कार्य का आरम्भ करने के बाद विघ्न आने पर जोरूक जाते हैं वे मध्यम पुरूष हैं। परन्तु  कार्य के आरम्भ से ही,

निर्जला एकादशी : इस व्रत से भीम ने पाया था स्वर्ग, आप भी ऐसे करें उपवास!

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एक व्रत करके भीम ने स्वर्ग प्राप्त कर लिया था। यह व्रत आज के युग में भी कर सकते है। इसके लिए सिर्फ कुछ कठिनाईयों से गुजरना पड़ेगा। मोक्ष और संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है। यह व्रत इस बार साल की पहली एकादशी पर आया है, जी हां, हम बात कर रहे हैं, निर्जला एकादशी की। इस व्रत के करने से संतान की आयु बढ़ती है। सभी व्रतों में निर्जला एकादशी का उपवास कठिन माना जाता है। यह इसलिए क्योंकि भीषण गर्मी के समय में

गधे को पिलाया गंगाजल…, रामेश्वरम का अभिषेक हो गया!

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स्वप्निल व्यास @ प्रारंभ से प्रारब्ध तक संत एकनाथ का जन्म महाराष्ट्र के पैठण में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री सूर्यनारायण तथा माता का नाम रुक्मिणी था। एकनाथ अपूर्व संत थे। वे श्रद्धावान तथा बुद्धिमान थे। उन्होंने  अपने गुरु से ज्ञानेश्वरी, अमृतानुभव, श्रीमद्भागवत आदि ग्रंथों का अध्ययन किया।वे एक महान  संत होने के साथ-साथ कवि भी थे। उनकी रचनाओं में श्रीमद्भागवत एकादश स्कंध की  मराठी-टीका, रुक्मिणी स्वयंवर, भावार्थ रामायण आदि प्रमुख हैंवह स्वभाव से अत्यंत सरल और परोपकारी थे। एक दिन उनके मन में विचार आया कि प्रयाग पहुंचकर त्रिवेणी

शमशान पर विराजी है ये चमत्कारी कंकाली माता, 400 साल पहले 1 सपने के बाद बना था मंदिर

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(real story of kankali mata mandir raipur chhattisgarh history in hindi)रायपुर. दुर्गा मां के देशभर में कई मंदिर हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर हैं, जो केवल सालभर में एक बार ही खुलता हैं। 400 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर शमशान के ऊपर बना हुआ हैं। इस मंदिर के निर्माण की कहानी भी निराली हैं, मंदिर का निर्माण मां के दिए हुए एक सपने के बाद हुआ था। कंकाली मठ के नाम से यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध हैं। पण्डित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर ने बताया

दुर्लभ एकादशी है आज, कमला एकादशी व्रत से बनायें सन्तान को सुयोग्य

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मलमास का महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। एकादशी बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है क्योंकि यह तभी आती है जब अधिक मास यानी मलमास लगता है। पद्म पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास यानि अधिक मास में कमला एकादशी किया जाता है। कमला एकादशी व्रत अधिक मास का एक अतिरिक्त व्रत है। इस व्रत के दिन भगवान विष्णु और उनके अनेक रूपों की पूजा की जाती है। रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया। इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र

भादवा माता मंदिर में दर्शन मात्र से ठीक हो जाते है लकवा के मरीज!

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miraculous temple for lakwa disease treatment in bhadwa mata temple neemuch hindi storyनीमच. मां यानी शक्ति का साक्षात रुप, जो विभिन्न रुपों में भक्तों की समस्याएं हरण करती हैं। फिर भलेहीं वे माता त्रिकुट पर्वत पर विराजमान मां वैष्णवी हों, पावागढ़ वाली मां हो या महामाया देवी भादवा माता ही क्यों न हों। माता का हर रूप चमत्कारी और मनोहारी हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं, समस्याएं हल हो जाती हैं।सच्ची धार्मिक कहानियां पढऩे के लिए फेसबुक पेज लाइक करें-  https://www.facebook.com/DharmKathayen/मध्यप्रदेश का नीमच के

सोमवती पंचमी व्रत विधि, कथा, जब देवताओं से रुष्ट हो गई थीं देवी लक्ष्मी

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पंचमी व्रत हिन्दू धर्म के विशेष व्रतों में से एक है। सोमवार के दिन पड़ने वाली पंचमी सोमवती पंचमी कहलाती है। क्योंकि श्रवण नक्षत्र होने से यह दिन पित्र दोष, काल सर्प दोष की शांति के लिए बहुत ही शुभ दिन है। पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है। किसी भी शिव मंदिर में सोमवती पंचमी के दिन ही काल सर्प दोष की शांति करनी चाहिए। इस बार श्रवण नक्षत्र में पड़ रही ये सोमवती पंचमी विशेष रूप से पितृ दोष की

श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी 2018 व्रत कथा: भगवान शंकर ने मनोकामना पूर्ति के लिए किया था यह व्रत

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संकष्टी चतुर्थी 2018 पर व्रत करके कथा पढऩे वाले व्यक्ति की मन की शक्ति प्रबल होती हैं, ऐसी मान्यता हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान शिव ने भी किया था।इस व्रत वाले दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं।2 जून 2018 को यह व्रत कर सकते है , चंद्रोदय का समय 9 बजकर 7 मिनट हैं। शास्त्रों में कहा गया हैं कि भगवान गणेश की पूजन और उनका यह व्रत करना बेहद लाभकारी होता हैं। इस कथा के मुताबिक भगवान

भगवान श्रीकृष्ण जैसे पुत्र के लिए इस मंदिर में मां यशोदा देती हैं आशीर्वाद!

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amazing story of goddess yashoda mata mandir indore madhya pradesh in hindiइंदौर. पूरे देश में माता यशोदा का एकमात्र मंदिर हैं। जहां भगवान श्री कृष्ण जैसा पुत्र पाने के लिए महिलाएं माता यशोदा से आर्शीवाद लेने के लिए आती हैं। माता यशोदा के चमत्कारिक मंदिर में पूजन कर कई महिलाएं अपनी सूनी गोद भर चुकी हैं। इस मंदिर में मां यशोदा का चमत्कार 222 वर्षों से निरंतर जारी हैं। जी हां सच्चे मन से मन्नत मांगने पर माता यशोदा श्रीकृष्ण जैसे पुत्र से गोद भरने का आर्शीवाद देती हैं। हम

मप्र-राजस्थान की बार्डर पर विराजे हैं दमदम के बालाजी, यहां एक मुट्ठी अनाज लाने से होता है चमत्कार!

राजपुरा. मप्र-राजस्थान की बार्डर पर एक चबूतरे पर हनुमान जी विराजे हैं। देखते ही देखते दमदम के बालाजी के नाम से आसपास के क्षेत्र में ख्यात हुए हनुमानजी के इस छोटे से मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। यहां की एक और खास बात यह है कि यहां पर किसी भी प्रकार बाधा चाहे ऊपरी बाधाएं हों या अन्य प्रकार की समस्याएं हों, संकट मोचन के दरबार में भक्त परेशानियों से मुक्त होकर जाता हैं। यहां एक मुट्ठी आनाज लाने से चमत्कार होते देखा जा

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