ये है परशुराम की जन्मस्थली, पिता की आज्ञा पर काट दी थी मां की गर्दन!

Bhagwan Shri Parshuram janapav indore

इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर के निकट जानापाव में तानाशाह क्षत्रियों के वंश का सर्वनाश करने वाले भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। भगवान परशुराम से भक्त उनकी जन्मस्थली पर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना करके अजेय होने का आशीर्वाद मांगते हैं। इंदौर शहर से करीब 28 किमी दूरी पर स्थित जानापाव जाने के लिए बस सुविधाएं हर समय उपलब्ध रहती हैं। प्राचीन काल से ही भगवान परशुराम से जुुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। सबसे अधिक प्रचलित कथा भगवान परशुराम के पितृ और मातृ भक्ति दर्शाती है।



बताया जाता है कि परशुराम के पिता महर्षि जमदग्रि एवं माता रेणुका अपने पांच पुत्रों रक्तवान, वसु, सुखेण, विश्वनाथ एवं परशुराम के साथ जानापाव कुटी में रहते थे, इसी दौरान एक दिन माता रेणुका रोज की तरह नदी पर स्नान करके जल लाने के लिए गई थी। माता रेणुका इतनी पतिवृता थी, कि वे गीले घड़े में
पानी भरकर लाती थी एवं उनकी भक्ति के कारण ही कभी भी घड़ा गलता नहीं था। एक बार जब वे नदी  पर गई तो लौटते समय उनकी नजर राजा चित्ररथ पर पड़ गई। राजा चित्ररथ वहां स्नान करने के लिए आए थे। उनकी सुंदरता के प्रति क्षणभर के लिए मां रेणुका आसक्त हो गई।

उसी क्षण उनका कच्चा घड़ा टूट गया और मां को अपराध का अहसास हुआ तो वे बिलखकर रोने लगी। इधर मां रेणुका को देर होने के चलते महर्षि जमदग्रि ने अपने तपोबल से अपनी पत्नी के आचरण को जान लिया। गुस्से में महर्षि ने एक-एक कर अपने सभी पुत्रों को मां को शिश
काटकर लाने का आदेश दिया। परशुराम से बड़े चार पुत्रों ने मना कर दिया तो उन्हें क्रोध में पाषाण का बना दिया। परशुराम ने आदेश माना तो उनसे खुश होकर महर्षि ने तीन वरदान दिए।



-वरदान में परशुराम ने कहा, मां रेणुका को जीवनदान दीजिए, क्योंकि मातृ  हत्या का पाप लेकर मैं नहीं जी सकता और उनकी स्मृति में से यह घटना हटा दें।
-मेरे सभी भाईयों के शरीर में चैतन्यता वापस लौटा देंवे।
-मुझे यह वरदान देवें कि कोई भी शत्रु मुझे युद्ध में नहीं हरा पाएगा।

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