आंवला नवमी: इस विधि से करें पूजा, पुत्र प्राप्ति की कामना होगी पूरी

amla navami 2017
(amla navami 2017 date katha puja vidhi at home and pujan samagri list in hindi)
दीपावली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी (आंवला वृक्ष की पूजा परिक्रमा), आरोग्य नवमी, अक्षय नवमी, कूष्मांड नवमी के नाम से जाना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व कल यानि 29 अक्तूबर रविवार को है। अक्षय नवमी के अवसर पर आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। आज के दिन सुबह नहाने के पानी में आंवले का रस या पावडर मिलाकर नहाएं।



ऐसा करने से आपके ईर्द-गिर्द जितनी भी नेगेटिव ऊर्जा होगी वह समाप्त हो जाएगी।सकारात्मकता और पवित्रता में बढ़ौतरी होगी। फिर आंवले के पेड़ और देवी लक्ष्मी का पूजन करें।

पुण्यों में बढ़ोतरी और पाप नष्ट (akshay amla aanvla navami katha in hindi) 

पंडित मनोज शुक्ला महामाया मन्दिर रायपुर बताते हैं कि कार्तिक शुक्ल नवमी को आंवले की पूजा कर ब्रह्मणों को भोजन करा स्वयं भी परिवार सहित आवळा पेड के छांव में भोजन का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि कार्तिक मास की नवमी को आंवला के पेड़ के नीचे अमृत की वर्षा होती है।



चरक संहिता में बताया गया है अक्षय नवमी को महर्षि च्यवन ने आंवला खाया था जिस से उन्हें पुन: जवानी अर्थात नवयौवन प्राप्त हुआ था। आप भी आज के दिन यह उपाय करके नवयौवन प्राप्त कर सकते हैं। शास्त्र कहते हैं आंवले का रस हर रोज पीने से पुण्यों में बढ़ोतरी होती है और पाप नष्ट होते हैं। कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि में आंवले की पूजा को पुत्र प्राप्ति के लिए भी विशेष लाभदायक माना गया है।

व्रत की पूजा का विधान (akshay amla aanvla navami puja vidhi mahatva In Hindi)

-आवळा नवमी के दिन महिलाएं सुबह से ही स्नान ध्यान कर आंवला के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में मुंह करके बैठती हैं।



-इसके बाद वृक्ष की जड़ों को दूध से सींच कर उसके तने पर कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है।
-तत्पश्चात रोली, चावल, धूप दीप से वृक्ष की पूजा की जाती है।
-आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करके ब्राह्मण भाई बंधू व परिवार जनो के साथ वहीं पर भोजन करें।
manoj shukla mahamaya mandir raipur
(लेखन संकलन- पंडित मनोज शुक्ला महामाया मंदिर रायपुर)
विशेष निवेदन –
आप सब से सादर निवेदन कि सोशल मीडिया के काल्पनिक दुनिया से कुछ समय के लिय बाहर निकले तथा अपने भाई बंधुओ व परिवार जनो के साथ मिल बैठ कर साथ भोजन करने के इस पावन अवसर का सदुपयोग करें।
सलाह – चार मित्रो का परिवार, एक एक भोजन सामग्री बनाकर , एक जगह एकत्रित होकर आपस में मिल बांट कर भोजन करेंगे तो आपसी सहयोग भी होगा , साथ बैठ कर भोजन करने से प्रेम भी बढेगा , और आवळा नवमी का फळ भी प्राप्त होगा।
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