गुरु नानक देव: बाबा के इन चमत्कारों को देख आदमखोर बन गए थे भक्त

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दिल्ली. सिख समुदाय के संस्थापक और सिखों के पहले धर्म गुरु नानक देव थे। गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना करके पवित्र जपजी की रचना की। उन्होंने अपने चमत्कारों से बड़े-बड़े आदमखोर को भी झुका दिया और उनकी जिंदगी बदल दी थी। गुरु नानक देव ने अपने जीवन में पांच यात्राएं की थी। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने अपने चमत्कारों से लोगों को अपना भक्त बना दिया था। बाबा के चमत्कार के किस्से तो कई हैं, लेकिन एक चर्चित किस्सा हमेशा याद किया जाता है।



दरअसल विंध्याचल के दक्षिणी जंगलों में कौड़ा नामक एक आदमखोर भील जाति का सरदार था, जिसका बेहद खौफ था। उसका काम सिर्फ लोगों को लूटना और डाके डालकर लोगों को मार कर खा जाना हुआ करता था। एक दिन बाबा भैंसे चराने के लिए जंगल की ओर गए, गर्मी के दिन होने के कारण वे पेड़ की छांव देखकर कुछ देर आराम करने के लिए लेट गए और उन्हें नींद आ गई। कुछ देर में बाबा के मुहं पर धूप आ गई। अचानक कहीं से एक काला सांप आया और उनके मुहं पर फन की छाया करने लगा यह देख लोगों का शोर होने लगा। इतने में सांप विलुप्त हो गया। इसी घटना की याद में माल जी साहिब गुरुद्वारा ख्यात स्थल है। गुरुनानक देवजी का जन्म माता तृप्ता और कालू मेहता के घर पाकिस्तान के ननकाना साहिब में हुआ था।

एक बार फिर गुरु नानक देवजी जंगल गए और वे इस बार कौड़ा को सुधारने के लिए गए थे। इसी बीच कौड़ा ने नानक देवजी के शिष्य मरदाने को पकड़ लिया और उसे तेल में तलकर खाने में जुट गया, गुरु नानक देवजी नेे शिष्य की ओर ध्यान करके देखा तो वह शीतल पड़ गया।

गुरुजी की यह चौंकाने वाली शक्ति देख कौड़ा उनके चरणों में आ गिरा और गुरु नानक देवजी ने उसे राक्षक कुल से देव योनी वाला बना दिया, जिसके बाद कौड़ा ने गुरुनानक देवजी का आर्शिवाद लिया। फिर गुरुजी लंका की ओर रवाना हुए।

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