सृष्टि की उत्पत्ति के साथ स्वयं प्रकट हुए थे बाबा महाकाल, आज भी सच है यह कहानी!

amazing story of mahakaleshwar mandir ujjain

(mahakaleshwar jyotirlinga ujjain madhya pradesh)
उज्जैन.
बाबा महाकाल सृष्टि की उत्पत्ति के साथ स्वयं प्रकट हुए थे। आज भी उज्जैन के राजा महाकाल ही है। बाबा महाकाल के बारे में एक कथा प्रचलित है, जो आज भी सच है। पहले किसी भी राजा को महाराज महाकाल की नगरी उज्जैन में ठहरने की इजाजत नहीं थी।

कहा जाता है कि सदियों पहले कोई ओर राजा एक रात गुजार ले तो उसे अपनी सल्तनत गंवानी पड़ती थी। इसी वजह से महाकाल की शरण में रहने के लिए सिंधिया राजघराने ने महल बनवाया। उस समय में सिंधिया राजघाने ने उज्जैन में कालीदेह महल अपने ठहरने के लिए बनवाया था।



कहा जाता है उज्जैन आने पर सिंधिया महाराज इसी महल में ठहरा करते थे। आज भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री उज्जैन में रात नहीं रुकते हैं। यह कथा आाज भी उस जमाने की तरह ही सच है। आज भी उज्जैन के राजा बाबा महाकाल ही है।

ऐसे प्रकट हुए थे बाबा महाकाल (mahakal mandir ujjain)

देश के हृदयस्थली पर बसे उज्जैन शहर के राजा बाबा महाकालेश्वर के प्रकट होने की एक सच्ची कहानी भी उज्जैन ही नहीं देशभर में बताई जाती है। सृष्टी का निर्माण हुआ था, उस समय सूर्य की पहली 12 रश्मियां धरती पर गिरी। उनसे 12 ज्योर्तिलिंग का बने। उज्जैन की पूरी भूमि को उसर भूमि कहा जाता है। यानी शमशान की भूमि। भगवान महाकाल का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, इसलिए भी तंत्र क्रियाओं की दृष्टी से उज्जैन महाकाल मंदिर का बेहद खास महत्व है। महाकाल की नगरी में हरसिद्धी, कालभैरव, विक्रांतभैरव आदि भगवान विराजमान है।

वीडियों में करें दर्शन :-

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन (mahakaleshwar mandir ke darshan)

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर परिसर में कई देवी-देवाताओं के कई मंदिर हैं। महाकाल बाबा के दर्शन के लिए मुख्य द्वार से गर्भग्रह तक कतार में लगकर श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में एक प्राचीनकाल का कुंड भी है, यहां स्नान करने से पवित्र होने और पाप व संकट नाश होने के बारे में कहा जाता है।



महाकालेश्वर मंदिर तीन खंडों में है। निचे वाले हिस्से में महाकालेश्वर स्वयं है। बीच के हिस्से में ओंकारेश्वर है। ऊपर के हिस्से में भगवान नागचंद्रेश्वर है। भगवान महाकालेश्वर के गर्भग्रह में माता पार्वती, भगवान गणेश एवं कार्तिकेय की मूर्तियों के दर्शन किए जा सकते हैं।

भगवान कृष्ण ने उज्जैन में की थी पढ़ाई(lord sri krishna education in ujjain)

भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपनी शिक्षा उज्जैन से ही ग्रहण की थी। उज्जैन की ख्याति प्राचीन काल से ही धार्मिक नगरी के तौर पर देखी गई है। यहां लंबे समय राजा महाराजा विक्रमादित्य का शासन था।

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