सर्वप्रथम किसने बांधी राखी किसको और क्यों, जानिए पौराणिक कथा

raksha bandhan 2018 date auspicious time chandra grahan in indian calendar

भारतीय पौराणिक कथाओं में रक्षाबंधन की कथा काफी प्रचलित हैं। रक्षा बंधन त्योहार के बारे में जानने के लिए हर कोई उत्सुक होता है, कि यह त्योहार हिंदू धर्म में कैसे शुरू हुआ और सबसे पहले किसने और किसको राखी बांधी। यह सवाल कई बार पूछा जा चुका है, लेकिन इसका सटिक जवाब आज रायपुर के महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला बता रहे हैं। आईए जानते हैं राखी की पौराणिक कथा…

ये बात हैं जब की
तब दानबेन्द्र राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे
तब नारायण ने राजा बलि को छलने के लिये वामन अवतार लिया और तीन पग में सब कुछ ले लिया

सच्ची धार्मिक कहानियां पढऩे के लिए फेसबुक पेज लाइक करें-

 https://www.facebook.com/DharmKathayen/

तब उसे भगवान ने पाताल लोक का राज्य रहने के लिये दें दिया
तब उसने प्रभु से कहा की कोई बात नहीँ मैं रहने के लिये तैयार हूँ
पर मेरी भी एक शर्त होगी
भगवान अपने भक्तो की बात कभी टाल नहीँ सकते
उन्होने कहा ऐसे नहीँ प्रभु आप छलिया हो पहले मुझे वचन दें की जो मांगूँगा वो आप दोगे
नारायण ने कहा दूँगा दूँगा दूँगा

अन्य धार्मिक खबरों के लिए यह भी पढ़ें:- http://www.livehindustan.com/astrology/



जब त्रिबाचा करा लिया तब बोले बलि
की मैं जब सोने जाऊँ तो जब उठूं तो जिधर भी नजर जाये उधर आपको ही देखूं
नारायण ने अपना माथा ठोका और बोले इसने तो मुझे पहरेदार बना दिया हैं ये सबकुछ हार के भी जीत गया है
पर कर भी क्या सकते थे वचन जो दें चुके थे
ऐसे होते होते काफी समय बीत गया
उधर बैकुंठ में लक्ष्मी जी को चिंता होने लगी नारायण के बिना
उधर नारद जी का आना हुआ
लक्ष्मी जी ने कहा नारद जी आप तो तीनों लोकों में घूमते हैं क्या नारायण को कहीँ देखा आपने
तब नारद जी बोले की पाताल लोक में हैं राजा बलि की पहरेदार बने हुये हैं
तब लक्ष्मी जी ने कहा मुझे आप ही राह दिखाये की कैसे मिलेंगे
तब नारद ने कहा आप राजा बलि को भाई बना लो और रक्षा का वचन लो और पहले तिर्बाचा करा लेना दक्षिणा में जो मांगुगी वो देंगे
और दक्षिणा में अपने नारायण को माँग लेना
लक्ष्मी जी सुन्दर स्त्री के भेष में रोते हुये पहुँची
बलि ने कहा क्यों रो रहीं हैं आप
तब लक्ष्मी जी बोली की मेरा कोई भाई नहीँ हैं इसलिए मैं दुखी हूँ
तब बलि बोले की तुम मेरी धरम की बहिन बन जाओ
तब लक्ष्मी ने तिर्बाचा कराया
और बोली मुझे आपका ये पहरेदार चाहिये
जब
ये माँगा
तो बलि पीटने लगे अपना माथा
और सोचा
धन्य हो माता पति आये सब कुछ लें गये और ये महारानी ऐसी आयीं की उन्हे भी लें गयीं
तब से ये रक्षाबन्धन शुरू हुआ था
और इसी लिये जब कलावा बाँधते समय मंत्र बोला जाता हैं
येन बद्धो राजा बलि दानबेन्द्रो महाबला तेन त्वाम प्रपद्यये रक्षे माचल माचल:
ये मंत्र हैं
रक्षा बन्धन अर्थात बह बन्धन जो हमें सुरक्षा प्रदान करे
सुरक्षा किस से
हमारे आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से रोग ऋण से।
राखी का मान करे। लक्ष्मी जी ने सर्वप्रथम बलि को बांधी थी।

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला (महामाया मंदिर रायपुर) बताते हैं कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते का खास त्योहार राखी 7 अगस्त को हैं। इस दिन दुर्लभ संयोग 12 साल में आया है। राखी का दिन सूतक का दिन भी रहेगा।

raksha bandhan 2017 date auspicious time chandra grahan in indian calendar
(राखी बांधने का सही समय)

छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित पंचांग के अनुसार
चंद्रग्रहण का स्पर्श काल रात्रि 10.53 बजे और मोक्ष रात्रि 12.48 बजे होगा। सूतक तीन प्रहर पूर्व दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से लगेगा।
तथा इस दिन सुबह 11.04 बजे तक भद्रा काल भी है इसलिए भद्रा काल समाप्त होने और सूतक लगने के पूर्व ही बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांध सकेंगी। रक्षाबंधन के लिए सुबह 11.04 के बाद और दोपहर 1.53 तक का ही मुहूर्त शुभ है।

 

whatsapp पर रोज एक सच्ची धार्मिक कहानी पढऩे के लिए हमारे नंबर 8224954801 को dharma kathayen के नाम से सेव करें। इसके बाद हमारे नंबर पर start लिखकर whatsapp कर दें…

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!